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Friday, January 19, 2018
बेशक ये बड़ा नाजुक मसला है। मेरे बहुत से मुस्लिम दोस्त हैं। जाहिर है सब पढ़े लिखे हैं और तलाक को बेहूदी चीज मानते हैं। पढ़ लिखे मुस्लिम घरों में तलाक को हिकारत की नजर से देखा जाता है।...
स्वाधीनता दिवस एक बार फिर आत्मावलोकन का अवसर लेकर उपस्थित हुआ है। इसमें संदेह नहीं कि देश ने विगत सात दशकों  में सामाजिक-आर्थिक उन्नयन के नए कीर्तिमान गढ़े हैं। शिक्षा, चिकित्सा, वाणिज्य, कृषि, रक्षा, परिवहन तकनीकि आदि सभी क्षेत्रों...
लोक में कृष्ण की छवि ‘कर्मयोगी’ के रूप में कम और ‘रास-रचैय्या’ के रूप में अधिक है। उन्हें विलासी समझा जाता है और उनकी सोलह हजार एक सौ आठ रानियाँ बताकर उनकी विलासिता प्रमाणित की जाती है। चीर-हरण जैसी...
: राजेश के शरीर पर 83 घाव बताते हैं कि केरल में किस तरह लाल आतंक हावी है : केरल में दिखाई नहीं देता क़ानून का राज : केरल पूरी तरह से कम्युनिस्ट विचारधारा के 'प्रैक्टिकल' की प्रयोगशाला बन गया है। केरल में जिस...
भारतीय संविधान में 'वंदेमातरम्' को राष्ट्रगान 'जन-गण-मन' के समकक्ष राष्ट्रगीत का सम्मान प्राप्त है। 24 जनवरी, 1950 को संविधान सभा ने 'वन्देमातरम्' गीत को देश का राष्ट्रगीत घोषित करने का निर्णय लिया था। यह अलग बात है कि यह निर्णय आसानी से नहीं हुआ था। संविधान सभा में...
‘‘तन जितना चलता रहे उतना ही स्वस्थ रहता है, मन जितना स्थिर रहे उतना ही स्वस्थ रहता है, वन जितना पृथ्वी पर रहे उतनी ही धरा स्वस्थ रहती है‘‘ चंदन जैसा बन नहीं सकते जो चन्दन का वृ़क्ष तो...
प्रकृति के बिना मनुष्य के जीवन की कल्पना संभव नहीं है। जल-जंगल के बिना जन का जीवन संभव है क्या?  साधारण बुद्धि का व्यक्ति भी इस प्रश्न का उत्तर जानता है। लेकिन, लालच से वशीभूत आदमी प्रकृति का संवर्द्धन करने...
भारतीय सेना सदैव से कम्युनिस्टों के निशाने पर रही है। सेना का अपमान करना और उसकी छवि खराब करना, इनका एक प्रमुख एजेंडा है। यह पहली बार नहीं है, जब एक कम्युनिस्ट लेखक ने भारतीय सेना के विरुद्ध लेख लिखा हो।...
शांत चित्त चेहरा, हमेशा बनी रहने वाली मुस्कान और गंभीरता से सभी की बात को सुनने की कला ये वो बातें हैं, जो मेरे जेहन में स्व. अनिल माधव दवे की स्मृतियों को हमेशा जिंदा रखेंगी। मितभाषी होने के...
: स्‍मृति शेष अनिल माधव दवे : केंद्रीय पर्यावरण मंत्री अनिल माधव दवे, देश के उन चुनिंदा राजनेताओं में थे, जिनमें एक बौद्धिक गुरूत्वाकर्षण मौजूद था। उन्हें देखने, सुनने और सुनते रहने का मन होता था। पानी, पर्यावरण, नदी और राष्ट्र के भविष्य से जुड़े सवालों...
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