मुगलसराय में सिक्का दिया तो नहीं मिलेगा ट्रेन टिकट

मुगलसराय। स्थानीय रेलवे स्टेशन स्थित रेलवे के अनारक्षित टिकट काउंटर पर अगर आप टिकट लेने के लिए सिक्का देंगे तो आपको टिकट नहीं मिलेगा। जी हां ये मैं नहीं कह रहा बल्कि बुकिंग क्लर्क की करास्तनी कह रही है। फुटकर रुपए के अभाव में यात्री की ट्रेन छोड़नी पड़ी, टिकट भी नहीं मिली और अपमानित होना पड़ा ब्याज में।

रिजर्व बैंक या चाहे किसी भी सरकार के सिक्के लेने के आदेश हों, मुगलसराय रेलवे के कर्मचारी नहीं मानते। यही नहीं उनके विरुद्ध पुलिस भी किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं कर सकती। ऐसा ही एक वाकया शुक्रवार प्रातः स्थानीय रेलवे स्टेशन के अनारक्षित टिकट काउंटर संख्या 3 पर देखने को मिला जब वाराणसी निवासी धर्मेंद्र शर्मा नामक एक युवक ने मुगलसराय से सैयदराजा स्टेशन का टिकट खरीदने के लिए अन्य नोटों के साथ ₹1 का छोटा सिक्का दिया तो उसे उक्त काउंटर पर ड्यूटीरत बुकिंग क्लर्क ने लेने से इंकार कर दिया।

काफी हुज्जत के बाद धर्मेंद्र ने 100 डायल पुलिस को फोन कर इसकी सूचना दी। लेकिन सूचना के बाद पहुंचे पुलिसकर्मियों ने भी यह कहकर मामले को रफा दफा कर दिया कि जब कोई उसे नहीं ले रहा है तो यह कैसे लेंगे। इन सबके बीच धर्मेंद्र की ट्रेन छूट गई और उन्हें यात्रा स्थगित करनी पड़ी। यहीं नहीं उन्हें अपमानित भी होना पड़ा। बताते चलें कि एक रुपए के छोटे सिक्के कोई भी दुकानदार नहीं ले रहा है और ना ही कोई बैंक ही उसे स्वीकार कर रहा है। नोटबंदीके दौरान लगभग सभी बैंकों द्वारा लोगों को सिक्के ही उपलब्ध कराए गए थे।

अरबों रुपए के सिक्के लोगों के बीच आये जो आज भी उनके लिए सिरदर्द बने हुए हैं। ऐसे में सवाल यह उठता है कि आखिर किस शासनादेश से एक रुपए के सिक्के को लेने से चाहे व्यापारी हो,व्यवसायी हो, बैंक हो या रेल कर्मचारी ही क्यों ना हो, क्यों मना कर रहा है। किसके आदेश पर यह सिक्के नहीं लिए जा रहे हैं। क्या एक रुपए के छोटे सिक्के भारतीय मुद्रा में चलन में नहीं हैं। अगर हैं तो सिक्का नहीं लेने वालों के विरुद्ध कार्रवायी कौन करेगा।यह यक्ष प्रश्न है। अगर इन सिक्कों को नहीं लिया गया तो क्या फिर एकबार भारतीय अर्थव्यवस्था में संकट की स्थिति नहीं खड़ी होगी। आखिर क्या होगा उन सिक्कों का।

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