वकील परिवार ने फर्जीवाड़ा कर व्‍यवसायी को लगाया साढ़े दस करोड़ का चूना

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श्वेता रश्मी

: पॉवर ऑफ अटार्नी का किया दुरुपयोग : आरोपियों के खिलाफ कनार्टक में दर्ज हुआ मामला :  दिल्‍ली : कानून और न्‍यायालय लोगों की उम्मीद माना जाता है। न्‍याय का मंदिर माना जाता है, लेकिन जब कोई न्‍याय का जानकार ही कानून का सहारा लेकर धोखाधड़ी और फ्रॉड करें तो तो न्याय की लड़ाई लम्बी हो जाती है।  कुछ ऐसा ही मामला सामने आया है, जिसमें एक अधिवक्‍ता ने ही फ्राड को अंजाम देते हुए करोड़ों की ठगी कर डाली। पीडि़त ने मामला पुलिस में दर्ज कराया है, लेकिन न्‍याय मिलना टेढ़ी खीर साबित हो सकता है।

इस कहानी की शुरुआत होती है वाराणसी से, जिसमें फ़िल्मी अंदाज़ में छोटे लाल पांडेय और दीपेश शर्मा नाम के दो मास्टरमाइंड ने खुद वकील होने का नाजायज़ फायदा उठाते हुये गुजरात के हितेंद्र जोशी के साथ 10.5 करोड़ रुपये का फ्रॉड कर डाला। वाराणसी के एक आश्रम में हितेंद्र जोशी की मुलाकात वहाँ के  आश्रम में अपने किसी परिचित के जरिये छोटे लाल पांडेय एवं उनके दामाद दीपेश शर्मा से हुई। दोनों ने खुद को वकील बताया, जिससे कर्नाटक में ग्रेनाइट का व्‍यवासाय करने वाले हिंतेद्र खासा प्रभावित हो गये।

हितेंद्र की ग्रेनाइट की एक खदान कर्नाटक की चामराजनगर में स्थित है। हितेंद्र को छोटे लाल पांडेय और उसके दामाद ने अपनी चिकनी चुपड़ी बातों से  प्रभावित करके उनसे नजदीकी गांठ ली। साथ ही उन्हें यह विश्वास दिलाने में कामयाब हो गए कि दीपेश शर्मा अपने संपर्कों के जरिये हितेंद्र जोशी के व्यवसाय को संभालने और आगे बढ़ाने में मदद करेगा, जिसे अपनी व्‍यस्‍तता के चलते हितेंद्र ठीक से देख नहीं पा रहे थे। हितेंद्र ने छोटे लाल पांडेय,  दीपेश और अनन्या शर्मा की बातों पर  भरोसा करके अपने ग्रेनाईट खदान की पॉवर ऑफ अटॉर्नी दीपेश को ट्रांसफर कर दी, जिसे खुद दीपेश और उसकी वकील पत्नी अनन्या शर्मा और ससुर छोटे लाल पांडेय ने तैयार किया था।

इस पूरे फ्रॉड में दीपेश और उसकी पत्नी अनन्‍या शर्मा के साथ पूरे परिवार की मिली भगत शामिल है। 26 मई 2017 को ये पॉवर ऑफ अटॉर्नी दिल्ली में रजिस्टर्ड हुई।  इसके बाद लगभग 10 महीने तक जब दीपेश शर्मा की तरफ से कोई प्रॉफिट या कागज़ात हितेंद्र को नहीं मिले तो उन्‍हें शक हुआ। शक के आधार पर जब उन्‍होंने छानबीन की तो पता चला कि हितेंद्र जोशी के इजाजत और जानकारी के बिना ही दीपेश खादान का दुरुपयोग करते अपने व्यवसाय को बढ़ा रहा है। मामला यही नहीं रुका बल्कि दीपेश ने हितेंद्र जोशी के फर्म के नाम से ही दूसरा डूप्‍लीकेट एकाउंट दिल्ली के एक्सेस बैंक में खुलवाया लिया था तथा गैरकानूनी तरीके से धोखाधड़ी करते हुये कागज़ात में उसने खुद को कंपनी का मालिक और मैनेजिंग पार्टनर भी घोषित कर दिया था।

इसके बाद 30 नवंबर 2018 को नंदनी स्टोन इम्पेक्स को इलाहाबाद निवासी अपने ससुर छोटे लाल और सास सुमन पांडेय को बेच भी दिया। जब से दीपेश खादान का काम संभाल रहा था तब से कर्नाटक पुलिस ने उसे तीन बार अवैध तरीके से ग्रेनाइट ले जाते हुये पकड़ा तथा उसके खिलाफ FIR भी दर्ज की। दीपेश के इस गोरखधंधे की जानकारी जब हितेंद्र  को हुई तो उसने पॉवर ऑफ अटॉर्नी को कैंसिल कर दिया। इससे नाराज होकर उल्टे अनन्या शर्मा और दीपेश और छोटे लाल पांडेय ने हितेंद्र जोशी पर अलग-अलग जगहों पर झूठा केस दर्ज करवाया, जिसके कारण हितेंद्र जोशी और उनके नजदीकी मित्र डॉ. कमलेश पटेल को अंतरिम जमानत लेने की नौबत आ गई।

दीपेश के अलावा इस पूरे मामले में 4 लोगों की मिलीभगत है, जिन पर विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज है।  सबसे ज्यादा गंभीर आरोप दीपेश शर्मा और छोटे लाल पांडेय पर है, जिन्होंने कानून का जामा पहनाकर इस घटना को अंजाम दिया। दीपेश शर्मा के खिलाफ दिल्ली बार काउंसिल में 165/2018 के तहत शिकायत भी की गई पर कोई कारवाई अभी तक नहीं हुई है। अब देखना है कि हितेंद्र को पुलिस और कानून से कितनी मदद मिलती है।