स्वामी विवेकानंद ने कहा था जो मन से युवा है वही युवा : विश्वात्मानन्द

वाराणसी। अपने आध्यात्मिक ज्ञान का पूरी दुनिया में लोहा मनवाने वाले स्वामी विवेकानंद की जयंती शुक्रवार वाराणसी में धूमधाम से मनाई गई। स्वामी विवेकानंद की जंयती पर बीएचयू की तरफ से राष्ट्रीय युवा यात्रा का आयोजन किया गया।यात्रा विश्वविद्यालय परिसर के एग्रीकल्चर ग्राउंड से निकल कर आईपी विजया होते हुए अस्सी घाट पर जाकर समाप्त हुई।

यात्रा के दौरान लोगों में काफी जोश देखने को मिला। ढोल-नगाड़ों के साथ यात्रा में सामिल लोग आगे बढ़ रहे थे। राष्ट्रीय युवा यात्रा में स्वामी विवेकानंद की झांकियां सजाई गई थी। यात्रा में काफी संख्या में छात्र व छात्राएं शामिल हुए। पिछली बार झांकी निकालने की अनुमति नहीं दी गई थी। इस बार यात्रा कार्यक्रम को मंजूरी मिल गई लेकिन बीएचयू में गत दिनों हुए बवाल को देखते हुए कई थानों की पुलिस फोर्स के साथ पीएसी के जवान यात्रा पर नजर बनाए रहे।

शहर में स्वामी विवेकानंद की जयंती के उपलक्ष्य कई स्थानों पर गोष्ठी का आयोजन का आयोजन हुआ। जिसमें वक्ताओं ने कहा कि स्वामी जी ने शिकागो धर्म सम्मेलन में जहां भारत के गौरव के बारे में पूरी दुनिया को बताया वही नौजवानों को भारतीय, भारतीयता और अपनी वेदांत संस्कृति का संबंध बताकर पूरी दुनिया को भारत के बारे में सोचने को मजबूर कर दिया।स्वामी जी ने ऐसे समय देश को जागृत किय, जब यहां का युवा पश्चिमी धर्म और संस्कृति का अनुकरण करने अपना गर्व समझता था।

इसी का फायदा उठाकर ईसाई मिशनरियाँ लोगों का धर्मांतरण भी तेजी से कर रही थी। उन्होंने युवाओं को बताया कि हमे पश्चिम से धर्म नहीं विज्ञान ग्रहण करने की जरूरत है। इसी तरह अन्य वक्ताओं ने युवाओं को स्वामी विवेकानंद के आदर्शों व सिध्दांतों से प्रेरणा लेने की बात कही। इसके साथ ही काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के मालवीय भवन सभागार में स्वामी विवेकानन्द जयंती ‘राष्ट्रीय युवा दिवस’ के अवसर पर मालवीय मूल्य अनुशीलन केन्द्र एवं छात्र अधिष्ठाता कार्यालय के संयुक्त तत्वाधान में ’युवाओं के लिए स्वामी विवेकानन्द का संदेश’ विषयक विशिष्ट व्याख्यान का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रामकृष्ण अद्वैत आश्रम के स्वामी विश्वात्मानन्द जी महाराज, एवं अध्यक्ष प्रो. अवधेश प्रधान थे। लोगों को अपने संबोधन में मुख्य अतिथि स्वामी विश्वात्मानन्द जी महाराज ने कहा कि ’’स्वामी विवेकानन्द एक ऐसे संदेश वाहक हैं जो एक सम्यक जीवन दर्शन लेकर हमारे बीच अवतरित हुए थे। वे ऐसे अवतार थे जिन्होंने लोगों को एक समग्र जीवन दृष्टि दी। उनका मानना था कि यदि शिक्षा के द्वारा चरित्र का निर्माण न हो तो उस शिक्षा का कोई मतलब नहीं है। स्वामी विवेकानन्द का युवाओं के लिए बस एक ही संदेश है, भारत से प्रेम करो। युवा एक बहती हुई नदी है। जो मन से युवा है वही युवा है। जो अपनी अंहकार से उपर उठकर आगे जाने के लिए तैयार है,  जिसमें डर से आगे निकलकर आगे जाने का साहस है वह युवा है।’’

अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रो. अवधेश प्रधान ने कहा कि स्वामी विवेकानन्द का संदेश अनन्त कि शक्ति से आता है अतः वह कभी पुराना नहीं पड़ता है। स्वामी विवेकानन्द जी के सिध्दांत हमें सदैव प्रेरणा देते रहेगें। स्वामी जी का कहना है कि मनुष्य स्वरुपतः ब्रह्म है, शक्ति स्वरुप है, उसे हम सभी को समझना होगा।

सभागार में उपस्थित समस्त लोगों को धन्यवाद ज्ञापन छात्र अधिष्ठाता प्रो.महेन्द्र कुमार सिंह ने किया। कार्यक्रम संचालन डाॅ. धर्मजंग ने किया। कार्यक्रम में डाॅ. राजीव कुमार वर्मा, प्रो. उपेन्द्र पाण्डेय, प्रो. वी. के. शुक्ला, डाॅ. श्याम बाबू पटेल, डाॅ. एम. आर. पाठक, प्रो. अरुण अग्रवाल, डाॅ. आरती निर्मल, प्रो. एम. के. पाण्डेय, डाॅ. बाला लखेन्द्र, प्रो. अंशुमान खन्ना सहित बड़ी संख्या में विद्यार्थी एवं शिक्षक उपस्थित रहे।

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