प्रदेश के युवाओं के तकनीकी सशक्तिकरण हेतु टैबलेट/स्मार्ट फोन वितरण योजना को स्वीकृति

मंत्रिपरिषद ने प्रदेश के युवाओं के तकनीकी सशक्तिकरण हेतु टैबलेट/स्मार्ट फोन वितरण योजना को स्वीकृति प्रदान कर दी है। साथ ही, समय-समय पर भविष्य में आने वाली व्यावहारिक कठिनाइयों के निराकरण हेतु योजना के अन्तर्गत किसी भी संशोधन हेतु मुख्यमंत्री जी को अधिकृत किया गया है।
कोरोना काल में विभिन्न शैक्षणिक संस्थाओं द्वारा ऑनलाइन माध्यमों से ही अपनी शैक्षिक गतिविधियों को जारी रखा जाना सम्भव हो सका है, जिससे छात्र-छात्राओं एवं युवाओं के डिजिटल सशक्तिकरण की अपरिहार्य आवश्यकता हर स्तर पर अनुभव की गई है। युवाओं को विभिन्न सरकारी एवं गैर सरकारी नौकरियों में आवेदन करना, उनके लिए कोचिंग/प्रशिक्षण प्राप्त करना अथवा किसी अन्य रोजगार में आवेदन करने आदि के लिए भी डिजिटल माध्यमों का अधिकाधिक प्रयोग किया जा रहा है।
तकनीकी एवं शैक्षणिक संस्थाओं द्वारा भी अपने अध्ययनरत छात्रों को शिक्षण सामग्री, ट्यूटोरियल लेक्चर इत्यादि का वितरण एवं प्रसारण भी ऑनलाइन माध्यमों से ही किया जा रहा है। इण्टरनेट कनेक्टिविटी के माध्यम से डेटा एक्सेस की सुविधा को भी सस्ती दरों पर प्राप्त किया जा सकता है। अतः प्रदेश के नगरीय एवं ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं को शिक्षित, प्रशिक्षित एवं स्वावलम्बी बनाए जाने के लिए उन्हें स्मार्ट फोन/टैबलेट निःशुल्क प्रदान करते हुए सशक्त एवं समर्थ बनाए जाने के लिए उपलब्ध कराये जाने का प्रस्ताव है। इस निर्णय से राज्य सरकार पर प्राथमिक रूप से 3000 करोड़ रुपए का व्यय भार सम्भावित है।
प्रदेश के अन्तर्गत स्नातक, स्नातकोत्तर, डिप्लोमा, कौशल विकास, पैरामेडिकल तथा नर्सिंग आदि विभिन्न शिक्षण/प्रशिक्षण कार्यक्रमों के अन्तर्गत लाभार्थी युवा वर्ग को स्मार्ट फोन/टैबलेट निःशुल्क प्रदान करने से न केवल वह अपने शैक्षिक पाठ्यक्रमों को सफलतापूर्वक पूर्ण कर सकेंगे, बल्कि उसके उपरान्त विभिन्न शासकीय/गैर शासकीय तथा स्वावलम्बन की योजनाओं में भी वे इसका सदुपयोग कर सेवारत/व्यवसायरत हो सकेंगे। प्रदेश के युवाओं को तकनीकी रूप से सशक्त बनाया जा सकेगा।
सेवा मित्र पोर्टल कौशल विकास विभाग की एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसके माध्यम से विभिन्न कुशल कारीगरों को पंजीकृत कराकर चिन्ह्ति एजेन्सियों के माध्यम से विभिन्न नागरिक सेवाएं यथा-प्लम्बर, कारपेण्टर, नर्स, इलेक्ट्रीशियन, ए0सी0 मैकेनिक आदि जनसामान्य को प्रदान की जा रही हैं। यह प्रस्तावित है कि उन्हें भी टैबलेट/स्मार्ट फोन प्रदान करा दिए जाएं, जिससे वे नागरिकों को बेहतर सेवाएं प्रदान करते हुए अपनी जीविका भी चला सकें।
योजना के अन्तर्गत प्रस्तावित लाभार्थी वर्ग में अन्य वर्ग के युवाओं को भी समय-समय पर मुख्यमंत्री जी के अनुमोदन से सम्मिलित किया सकेगा। किस लाभार्थी वर्ग को टैबलेट प्रदान किया जाना है तथा किसे स्मार्ट फोन्स प्रदान किए जाने हैं, इसका निर्णय यथासमय मुख्यमंत्री जी के स्तर से लिया जाएगा। टैबलेट/स्मार्ट फोन के वितरण हेतु लाभार्थी वर्ग की प्राथमिकता का निर्धारण तथा चरणबद्ध क्रय के सम्बन्ध में भी निर्णय यथासमय मुख्यमंत्री जी के स्तर से लिया जाएगा।
मंत्रिपरिषद द्वारा प्रस्ताव पर अनुमोदन से प्रदेश के उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, स्वास्थ्य शिक्षा, कौशल विकास प्रशिक्षण एवं आई0टी0आई0 तथा सेवामित्र पोर्टल पर पंजीकृत कुशल युवा वर्ग तकनीकी रूप से सशक्त बनेंगे। प्रदेश के युवाओं को तकनीकी रूप से सशक्त बनाए जाने हेतु टैबलेट/स्मार्ट फोन वितरित किए जाने की यह एक अभिनव योजना है। प्रदेश के युवा वर्ग के तकनीकी रूप से सक्षम होने के उपरान्त युवा वर्ग को रोजगार का सृजन एवं सेवायोजन में सहायता होगी।

इन्टीग्रेटेड टाउनशिप नीति-2014 (लाइसेन्स आधारित प्रणाली)
के प्रस्तर-14.8 में संशोधन का प्रस्ताव अनुमोदित

मंत्रिपरिषद ने इन्टीग्रेटेड टाउनशिप नीति-2014 (लाइसेन्स आधारित प्रणाली) के प्रस्तर-14.8 में संशोधन के प्रस्ताव को अनुमोदित कर दिया है।
प्रदेश के नगरीय क्षेत्रों में निजी पूंजी निवेश के माध्यम से आवासीय योजनाओं के लिये उ0प्र0 आवास एवं विकास परिषद तथा समस्त विकास प्राधिकरणों हेतु इन्टीग्रेटेड टाउनशिप नीति-2014 (लाइसेन्स आधारित प्रणाली) निर्गत की गयी है। इस नीति के अन्तर्गत इन्टीग्रेटेड टाउनशिप का न्यूनतम क्षेत्रफल 25 एकड़ एवं विस्तार सहित अधिकतम क्षेत्रफल 500 एकड़ होना चाहिए। इन्टीग्रेटेड टाउनशिप नीति के अनुसार परियोजना की स्वीकृत डी0पी0आर0 के अन्तर्गत चरणबद्ध रूप से ले-आउट प्लान की स्वीकृति और सम्बन्धित अभिकरण के साथ विकास अनुबन्ध की कार्यवाही की जाएगी।
इन्टीग्रेटेड टाउनशिप नीति के प्रस्तर 14.8 के अनुसार विकासकर्ता द्वारा परियोजना की डी0पी0आर0 स्वीकृति के समय नगरीय विकास शुल्क देय होगा। नगर नियोजन एवं विकास अधिनियम-1973 एवं नगरीय विकास प्रभार नियमावली, 2014 में भी विकास परमिट प्राप्त किए जाने हेतु आवेदन प्रस्तुत किए जाने पर ही नगरीय विकास प्रभार उद्ग्रहीत किए जाने का प्राविधान है।
उ0प्र0 नगर नियोजन और विकास अधिनियम, 1973 एवं नगरीय विकास प्रभार नियमावली, 2014 इन्टीग्रेटेड टाउनशिप नीति, 2014 पर अध्यारोही प्रभाव रखते हैं। अतः किसी इन्टीग्रेटेड टाउनशिप के प्रकरण में नगरीय विकास प्रभार की वसूली डी0पी0आर0 के स्थान पर ले-आउट प्लान के आधार पर किये जाने हेतु इन्टीग्रेटेड टाउनशिप नीति-2014 के प्रस्तर-14.8 में नगर योजना और विकास अधिनियम-1973 एवं नगरीय विकास प्रभार नियमावली, 2014 के प्राविधानों के अनुरूप संशोधन का प्रस्ताव है।
इस संशोधन से रियल स्टेट क्षेत्र में विकासकर्ताओं को सहूलियत प्राप्त होगी। लम्बित इन्टीग्रेटेड टाउनशिप परियोजनाएं शीघ्रता से पूर्ण हो सकेंगी। रियल स्टेट क्षेत्र में निवेश हेतु विकासकर्ताओं को प्रोत्साहन प्राप्त होगा तथा नियोजित विकास एवं रोजगार सृजन को बढ़ावा मिलेगा।
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जनपद कानपुर नगर स्थित सर्किट हाउस में ‘भारत रत्न’ श्री
अटल बिहारी वाजपेयी जी की मूर्ति की स्थापना के सम्बन्ध में

मंत्रिपरिषद ने जनपद कानपुर नगर स्थित सर्किट हाउस में ‘भारत रत्न’ श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी की मूर्ति की स्थापना के कार्य हेतु प्रस्तावित कुल लागत 37.35 लाख रुपए को स्वीकृति प्रदान कर दी है।
इसके अन्तर्गत मूर्ति की स्थापना का कार्य, मूर्ति स्थापना के लिए प्लेटफॉर्म के निर्माण का कार्य, एस0एस0 रेलिंग आदि का कार्य तथा अन्य विविध कार्य सम्मिलित हैं। प्रश्नगत निर्माण कार्यों में लागत 22.05 लाख रुपए के (मूर्ति की आपूर्ति, स्थापना, सिल्वर मैटेलिक क्लैडिंग एवं एम0एस0 लैडर इत्यादि) उच्च विशिष्टियों के कार्यों को सम्मिलित करते हुए प्रश्नगत कार्य हेतु कुल 37.35 लाख रुपए की स्वीकृति प्रदान की गई है।
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जनपद वाराणसी में मोहनसराय दीनदयाल उपाध्याय नगर चकिया मार्ग के चैनेज 0.000 से 10.200 के मध्य सर्विस लेन के साथ 6-लेन तथा चैनेज 10.200 से 11.180 के मध्य 4-लेन में चौड़ीकरण एवं सुदृढ़ीकरण कार्य की व्यय वित्त समिति द्वारा अनुमोदित लागत के व्यय का प्रस्ताव स्वीकृत

मंत्रिपरिषद ने जनपद वाराणसी में मोहनसराय दीनदयाल उपाध्याय नगर चकिया मार्ग (राज्य मार्ग सं0-120) के चैनेज 0.000 से 10.200 के मध्य सर्विस लेन के साथ 6-लेन तथा चैनेज 10.200 से 11.180 के मध्य 4-लेन में चौड़ीकरण एवं
सुदृढ़ीकरण (लम्बाई 11.180 कि0मी0) कार्य की व्यय वित्त समिति द्वारा अनुमोदित लागत 41253.32 लाख रुपए के व्यय के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान कर दी है।
यह मार्ग जनपद वाराणसी के बी0एच0यू0, डी0एल0डब्ल्यू0, वाराणसी कैण्ट रेलवे एवं बस स्टेशन, सारनाथ, चन्दौली, आजमगढ़, गाजीपुर, गोरखपुर को जोड़ने वाला प्रमुख मार्ग है। जनपद वाराणसी में विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल सारनाथ व बाबा काशी विश्वनाथ मन्दिर होने के कारण अतिविशिष्ट महानुभावों, विभिन्न देशों के राष्ट्राध्यक्ष तथा देश-विदेश से पर्यटकों एवं श्रद्धालुओं का आवागमन जनपद में बना रहता है। मार्ग पर यातायात घनत्व अत्यधिक होने के कारण प्रायः जाम की समस्या बनी रहती है। मार्ग का चौड़ीकरण एवं सुदृढ़ीकरण हो जाने से यातायात सुगम हो जाएगा तथा जाम की समस्या से निजात मिलेगी।
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जनपद वाराणसी में वाराणसी-भदोही-गोपीगंज मार्ग के चैनेज 4.310 से 12.910 तक 4-लेन चौड़ीकरण एवं सुदृढ़ीकरण (लम्बाई 8.600 कि0मी0) कार्य की व्यय वित्त समिति द्वारा अनुमोदित लागत के व्यय का प्रस्ताव स्वीकृत

मंत्रिपरिषद ने जनपद वाराणसी में वाराणसी-भदोही-गोपीगंज मार्ग (एस0एच0-87) के चैनेज 4.310 से 12.910 तक 4-लेन चौड़ीकरण एवं सुदृढ़ीकरण (राज्य मार्ग संख्या-87) (लम्बाई 8.600 कि0मी0) कार्य की व्यय वित्त समिति द्वारा अनुमोदित लागत 26910.60 लाख रुपए के व्यय के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान कर दी है।
जनपद वाराणसी में वाराणसी-भदोही-गोपीगंज मार्ग (एस0एच0-87) के चैनेज 0.00 से 4.310 तक का भाग सघन शहरी भाग है। प्रश्नगत मार्ग का चैनेज 4.310 मोहनसराय दीनदयाल उपाध्याय नगर चकिया मार्ग से चांदपुर चौराहा (कलेक्ट्री फार्म) पर स्थित है। मार्ग के चैनेज 4.310 से 12.910 तक का भाग चांदपुर चौराहा (कलेक्ट्री फार्म) से वाराणसी रिंग रोड फेज-2 को जोड़ता है। मार्ग का यह भाग रिंग रोड एवं विश्वविख्यात कालीन निर्माण केन्द्र भदोही से वाराणसी शहर का प्रवेश मार्ग है।
इस मार्ग पर इण्डस्ट्रीयल एरिया चांदपुर, लोहता, भट्ठी कोरौता, अकेलवां परमपुर इत्यादि घने आबादी वाले बाजार स्थित हैं, जिसके कारण प्रायः जाम की स्थिति उत्पन्न हो जाती है एवं मार्ग से आने-जाने वाले यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। मार्ग के 4-लेन चौड़ीकरण एवं सुदृढ़ीकरण हो जाने से वाराणसी शहर होने वाले भारी जाम से आम जनता को निजात मिलेगी तथा जनपद का सर्वांगीण विकास होगा।
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उ0प्र0 राज्य सड़क परिवहन निगम के 23 बस स्टेशनों को पी0पी0पी0 पद्धति पर विकसित किए जाने की श्रेणी में प्रथम चरण में 17 बस अड्डों को डिजाइन बिल्ड फाइनेन्स ऑपरेट एण्ड ट्रांसफर मॉडल पर विकसित किए जाने हेतु अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास विभाग द्वारा निर्गत पी0पी0पी0 गाइडलाइंस-2016 द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के अन्तर्गत अनुमोदित बिड डाक्यूमेण्ट के कतिपय प्राविधानों में संशोधन का प्रस्ताव अनुमोदित

मंत्रिपरिषद ने उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम के 23 बस स्टेशनों को निजी सार्वजनिक सहभागिता (पी0पी0पी0) पद्धति पर विकसित किए जाने की श्रेणी में प्रथम चरण में 17 बस अड्डों को डिजाइन बिल्ड फाइनेन्स ऑपरेट एण्ड ट्रांसफर मॉडल पर विकसित किए जाने हेतु अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास विभाग द्वारा निर्गत निजी सार्वजनिक सहभागिता (पी0पी0पी0) गाइडलाइंस-2016 (“Guidelines for Selection of Consultants & Developers for PPP Projects in Uttar Pradesh 2016”) द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के अन्तर्गत अनुमोदित बिड डाक्यूमेण्ट यथा-रिक्वेस्ट फॉर क्वालिफिकेशन (आर0एफ0क्यू0), रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (आर0एफ0पी0) तथा कन्सेशन एग्रीमेण्ट्स, के कतिपय प्राविधानों/9 क्लाजों में अपेक्षित संशोधन के प्रस्ताव पर अनुमोदन प्रदान कर दिया है।
प्राप्त अनुमोदन के क्रम में बिड डॉक्यूमेण्ट्स का अपलोड सम्बन्धित वेबसाइट पर किया जाएगा तथा बिडर के चयन की कार्यवाही निजी सार्वजनिक सहभागिता (पी0पी0पी0) गाइडलाइंस-2016 में विहित व्यवस्थानुसार नियमानुसार की जाएगी।
वैश्वीकरण के परिप्रेक्ष्य में परिवहन निगम के बस स्टेशनों पर नवीनतम् सुविधायुक्त व्यवस्थाएं वर्तमान में उपलब्ध न होने के दृष्टिगत नवीन पहल के तहत निगम के 23 महत्वपूर्ण बस स्टेशनों को निजी सार्वजनिक सहभागिता (पी0पी0पी0) पद्धति पर विकसित किए जाने की श्रेणी में 17 बस अड्डों को विकसित किए जाने की महत्वाकांक्षी परियोजना प्रस्तावित की गयी।
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उ0प्र0 मोटरयान कराधान अधिनियम, 1997
की धारा-10 की उपधारा (3) में संशोधन के सम्बन्ध में

मंत्रिपरिषद ने जनहित में उत्तर प्रदेश एवं मध्य प्रदेश राज्यों के मध्य हुए करार के अन्तर्गत दोनों प्रदेशों के वाहनों के एक दूसरे के राज्य में निर्बाध आवागमन हेतु जनपद चित्रकूट में उत्तर प्रदेश व मध्य प्रदेश की सीमा पर स्थित कुछ क्षेत्रों को फ्री-जोन घोषित करने के लिए वाहनों को कर से छूट दिए जाने के लिए उत्तर प्रदेश मोटरयान कराधान अधिनियम, 1997 की धारा-10 की उपधारा (3) के द्वितीय परन्तुक के पश्चात अध्यादेश द्वारा परन्तुक बढ़ाये जाने का निर्णय लिया है।
इस निर्णय के अनुसार ‘परन्तु यह भी कि जहां यान-संचालन, अनन्य रूप से उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश राज्य के मध्य पारस्परिक करार में घोषित मुक्त परिक्षेत्र में अनुज्ञात हो, जिसमें कर छूट भी अनुज्ञात हो, वहां इस धारा के अधीन संदेय कर, चित्रकूट स्थानीय क्षेत्र में उक्त करार के अनुसार पूर्णतः या आंशिक रूप से छूट प्राप्त होगी।’
वर्तमान में विधान मण्डल सत्र के अवसान होने के दृष्टिगत नियमानुसार विधेयक प्रस्तुत होने तक अध्यादेश के माध्यम से अधिनियम में संशोधन का निर्णय लिया गया है।
उत्तर प्रदेश एवं मध्य प्रदेश राज्य सरकारों के मध्य सम्पन्न पारस्परिक करार दिनांक 21 नवम्बर, 2006 के अनुच्छेद-6 में मुक्त जोन का प्राविधान है, जिसके अनुसार यदि मुक्त जोन उत्तर प्रदेश में आता है तो उत्तर प्रदेश के मोटर यान कर, अतिरिक्त कर तथा टोल्स (पथकर) के संदाय से तथा यदि मुक्त जोन मध्य प्रदेश राज्य क्षेत्र में आता है तो मध्य प्रदेश के मोटर यान कर और टोल्स (पथकर) के संदाय से अन्य राज्य में छूट प्राप्त होगी।
इस निर्णय से जन सामान्य को आवागमन के लिए कर देय नहीं होने से उन्हें प्रत्यक्ष रूप से आर्थिक लाभ प्राप्त होगा। जन सामान्य को दोनों राज्यों में स्थित पर्यटन स्थलों में आवागमन में कोई व्यवधान नहीं होगा और इससे पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही, उस क्षेत्र में स्थानीय निवासियों को नवीन रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे।
उत्तर प्रदेश में स्थित जनपद चित्रकूट की भौगोलिक स्थिति इस प्रकार है कि जिसमें कुछ दूरी उत्तर प्रदेश, पुनः मध्य प्रदेश और फिर उत्तर प्रदेश की सीमा में पड़ती है। उत्तर प्रदेश एवं मध्य प्रदेश की वाहनों का आवागमन जनपद चित्रकूट में अधिकतर होता है। चूंकि जनपद चित्रकूट एक प्रमुख धार्मिक स्थल है। अतः जनपद चित्रकूट में धार्मिक आस्था वाले यात्रियों का आवागमन अत्यधिक संख्या में होने के कारण वाहनों का आवागमन अधिक होता है।
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निजी विकासकर्ताओं द्वारा शासनादेश दिनांक 05 दिसम्बर, 2013 की व्यवस्था के अन्तर्गत विकसित की जाने वाली आवासीय परियोजनाओं में निर्मित किए जाने वाले ई0डब्ल्यू0एस0 इकाइयों के पंजीयन हेतु 500 रुपये से अधिक के स्टाम्प शुल्क में छूट प्रदान किए जाने निर्णय

मंत्रिपरिषद ने शासनादेश संख्या-3188/आठ-1-13-80विविध/2010, दिनांक 05 दिसम्बर, 2013 की शर्तों के अधीन निजी विकासकर्ता द्वारा निर्मित दुर्बल आय वर्ग (ई0डब्ल्यू0एस0) भवन के अंतरण हेतु विकासकर्ता द्वारा लाभार्थी के पक्ष में निष्पादित लिखत पर 500 रुपये से अधिक के स्टाम्प शुल्क में छूट दिए जाने सम्बन्धी प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान कर दी है।
यह छूट तभी अनुमन्य होगी यदि आवास आयुक्त, आवास एवं विकास परिषद उ0प्र0/उपाध्यक्ष, विकास प्राधिकरण/मुख्य कार्यपालक अधिकारी, विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण/विहित प्राधिकारी, विनियमित क्षेत्र, उ0प्र0 द्वारा नामनिर्दिष्ट अधिकारी ऐसे लिखत पर इस तथ्य की पुष्टि करने के प्रायोजन हेतु साक्षी के रूप में हस्ताक्षर करेंगे कि शासनादेश संख्या-3188/आठ-1-13-80विविध/2010, दिनांक 05 दिसम्बर, 2013 के अधीन निर्मित दुर्बल आय वर्ग भवन के अंतरण का निष्पादन किया जा रहा है।
कर एवं निबंधन अनुभाग-5 की अधिसूचना दिनांक 04 अगस्त, 2001 द्वारा आवास एवं शहरी नियोजन विभाग के नियंत्रणाधीन विकास प्राधिकरणों एवं उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद द्वारा कार्यान्वित दुर्बल आय वर्ग आवासीय योजना के अधीन निष्पादित किए जाने वाले विक्रय या पट्टे के लिखतों पर 500 रुपये से अधिक के स्टाम्प शुल्क से छूट प्रदान की गयी है।
इसी प्रकार स्टाम्प एवं रजिस्ट्रेशन अनुभाग-2 की अधिसूचना दिनांक 25 सितम्बर, 2019 द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) मिशन के अधीन विकासकर्ता द्वारा निर्मित दुर्बल आय वर्ग (ई0डब्ल्यू0एस0) भवन के अंतरण हेतु विकासकर्ता द्वारा लाभार्थी के पक्ष में निष्पादित लिखत पर 500 रुपये से अधिक के स्टाम्प शुल्क में छूट प्रदान की गयी है।
उपरोक्त व्यवस्था के अनुरूप निजी विकासकर्ताओं द्वारा शासनादेश दिनांक 05 दिसम्बर, 2013 की व्यवस्था के अन्तर्गत विकसित की जाने वाली आवासीय परियोजनाओं में निर्मित किए जाने वाले ई0डब्ल्यू0एस0 इकाइयों के पंजीयन हेतु 500 रुपये से अधिक के स्टाम्प शुल्क में छूट प्रदान किए जाने का निर्णय लिया गया है।
इस निर्णय से दुर्बल आय वर्ग के व्यक्तियों को 500 रुपये से अधिक के स्टाम्प शुल्क में छूट का लाभ प्राप्त होगा।