सिद्धार्थनाथ सिंह बंगला नहीं, आप खुद छोटे ही नहीं सूक्ष्म हो

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राज बहादुर सिंह

: दस प्रतिशत विभाग पर ध्‍यान होता तो जनता को राहत मिलती : लखनऊ : सिद्धार्थनाथ सिंह। आप का बंगला तो छोटा नहीं है, लेकिन आप अवश्य छोटे हैं। काम से, विचार से, आचरण से और राजनैतिक मर्यादा से। छोटे नहीं बल्कि आप तो सूक्ष्म हैं और आपकी सूक्ष्मता रह रह कर प्रकट होती रहती है। कभी लैपटॉप की फरमाइश, कभी स्मार्ट टीवी की जरूरत और अब विशाल बंग्ला चाहिए।

क्यों चाहिए आपको विशाल बंगला। पोलो खेलना है? गोल्फ कोर्स बनाना है? रिसोर्ट बनाना है? गौतमपल्ली के बंगलों में न जाने कितने कैबिनेट मंत्री रहते आए हैं, लेकिन किसी ने इन्हें अपर्याप्त या छोटा नहीं कहा। पता नहीं कितने सदस्य रहते हैं मंत्री महोदय के साथ। इन्हें यह भी समझ नहीं कि मुलायम या अखिलेश के आवास एक्स सीएम के नाते उन्हें मिले थे और अभी पूर्व मंत्री को आवास देने की बाध्यता नहीं है सरकार के सामने और न ही कोई नियम है।

जितना ध्यान, लैपटॉप, स्मार्ट फोन या बंगले पर है उसका दस प्रतिशत अपने विभाग पर होता तो शायद जनता को भी कुछ राहत मिलती। सरकारी अस्पतालों की हालत किसी से छुपी नहीं है। कितने अस्पतालों का दौरा करते हैं मंत्री? पूरा प्रदेश बदहाल है स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर। सरकारें बदलती हैं, लेकिन सरकारी चिकित्सा सेवाएं अपाहिज ही बनीं रहती हैं। काश बड़ा बंगला मांगने के बजाय ज्यादा से ज्यादा अस्पतालों का स्थलीय निरीक्षण करते। हालात से रूबरू होते और कुछ उम्मीद जगती।

खैर आपकी मनोकामना पूरी हो। बड़ा बंगला मिले और आप उसमें दौड़-दौड़ के अपना स्वास्थ्य बनाएं। जनता का स्वास्थ्य तो जैसा है वैसा रहेगा ही। और एक अनुरोध यह है कि इस बात का प्रचार कतई न करें कि आप किसी महामानव के वंशज है। कदाचित आपकी बंगले की चाह से उनकी आत्मा को कष्ट ही होगा और उनको चाहने वाले बेशुमार लोग भी दुखी होंगे।rbs

राज बहादुर सिंह उत्तर प्रदेश के जाने माने पत्रकार हैं. हिंदी-अंग्रेजी पर समान पकड़ रखते हैं. दैनिक जागरण समेत कई बड़े संस्थानों में वरिष्ठ पदों पर रहे हैं. सियासतफिल्म और खेल पर जबरदस्त पकड़ रखने वाले श्री सिंह फिलहाल पायनियर में वरिष्ठ पद पर कार्यरत हैं. उनका लिखा फेसबुक से साभार लेकर प्रकाशित किया गया है.