बिना सपा-कांग्रेस को साथ लिए लड़ सकती है बसपा!

मनोज श्रीवास्तव

: गठबंधन की नई रणनीति बनाने में जुटीं मायावती : लखनऊ। बसपा प्रमुख मायावती ने भाजपा और कांग्रेस सरकार के कार्यकाल को एक तराजू पर तौल कर विपक्षी दलों के महागठबंधन पर संशय बढ़ा दिया है। बताते हैं कि  सपा मुखिया अखिलेश यादव सबसे ज्यादा असहज हो गए हैं। बिना किसी को कानों-कान भनक लगे विधानसभा 2017 में कांग्रेस और सपा ने गठबंधन कर विधानसभा में बसपा को तीसरे दर्जे की पार्टी बना दिया था, इस लिए मायावती इन दोनों को भी भाजपा जैसा दुश्मन ही मानतीं हैं।

दूसरी ओर कहा जा रहा है कि जब से कांग्रेस अध्यक्ष राहुल ग़ांधी ब्राह्मण दिखने के लिए जनेऊ पहन कर मंदिरों का भ्रमण कर रहे हैं और सपा मुखिया बिष्णु मंदिर बनाने की घोषणा किया है, तब से मुसलमान वोटर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी से अनमने हो गए हैं। बसपा प्रमुख मायावती के रणनीतिकार उनको इस हकीकत से आगत करा चुके हैं।

बताया जा रहा है कि उसके बाद मायावती ने विपक्ष के महागठबंधन पर अपनी रणनीति बदल दी हैं। मायावती ने अब यूपी में मुसलमान के सहयोग से दलित-मुस्लिम गठजोड़ कर बिना-सपा, बिना कांग्रेस के गठबंधन बनाने पर काम शुरू कर दिया है। सूत्रों की मानें तो दिल्ली में  वामपंथी बुद्धजीवियों के प्रयास से मायावती जेएनयू, अलीगढ़ विश्वविद्यालय की युवा टीम के साथ मीटिंग कर चुकी हैं।

अब मायावती  दलित-मुस्लिम और शोषितों को मिला कर नया गठबंधन तैयार करने की रणनीति में जुटी हुई हैं। मायावती इसी संभावित गठबंधन के साथ लोकसभा में उतरेंगी। बंगाल, उड़ीसा, त्रिपुरा, मेघालय, असम, केरल में कम्युनिस्ट ज्यादा सीटों पर लड़ेगी। देश के अन्य प्रदेशों उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, पंजाब, बिहार, हरियाणा, उत्तराखंड, झारखंड में बहुजन समाज पार्टी स्थानीय दलों के साथ गठबंधन बनायेगी।

इस संदर्भ में यूपी की राजनीतिक गतिविधियों के जानकार वरिष्ठ पत्रकार राजकुमार ने कहा कि यदि हारने का डर न हो तो कोई राजनैतिक दल गठबंधन शायद ही करे। मायावती कोई गठबंधन तभी करेंगी जब स्टेयरिंग उनके हाथ में होगी। मायावती को बैक बेंचर बना कर उनसे कोई  मजबूत गठबंधन की कल्पना कठिन है। मायावती को जितना मैं जनता हूँ उसके आधार पर कह सकता हूँ कि विपक्ष का महागठबंधन तभी साकार होगा जब मायावती को नेतृत्व दिया जाएगा।manoj

वरिष्‍ठ पत्रकार मनोज श्रीवास्‍तव की रिपोर्ट.