हामिद अंसारी की क्या हैसियत? ईमान पर आयेंगे तो इल्मुद्दीन ही हो जाएंगे

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संजय तिवारी

: अल्‍लामा इकबाल ने भी मुसलमानों के लिए अलग राज्‍य मांगना शुरू कर दिया : नई दिल्‍ली : वही अल्लामा इकबाल थे, जो सारे जहां से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा लिख रहे थे। राम को इमाम-ए-हिन्द बता रहे थे। लेकिन ऐसा क्या हुआ कि ब्रिटिश हुकूमत से उन्होंने मुसलमानों के लिए अलग ‘राज्य’ मांगना शुरू कर दिया। बड़ी छोटी सी घटना थी। एक अनपढ़ नौजवान था इल्मुद्दीन। उसने लाहौर में राजपाल की हत्या कर दी थी।

राजपाल ने एक किताब प्रकाशित की थी, रंगीला रसूल। इल्मुद्दीन ने किसी से सुना कि उस प्रकाशक ने पैगंबर की तौहीन कर दिया है। इल्मुद्दीन खुद पढ़ा-लिखा नहीं था। अल्लिफ बे नहीं पढ़ सकता था, लेकिन पैगंबर की तौहीन की खबर सुनी तो राजपाल की दुकान पर जाकर उनकी हत्या कर दी।

इल्मुद्दीन गिरफ्तार हुआ और उसे फांसी हुई। इस फांसी ने इकबाल को झकझोर कर रख दिया। जब इल्मुद्दीन की नमाज-ए-जनाजा हुई तो इकबाल से कहा गया कि आप ही इस “महान” मुजाहिद की नमाज-ए-जनाजा पढ़वाइये। इकबाल ने मना कर दिया। जानते हैं इकबाल ने क्या कहा? इकबाल ने कहा कि इल्मुद्दीन इतनी बड़ी शख्सियत हैं कि उनकी हैसियत नहीं है कि वो उसकी नमाज-ए-जनाजा पढ़वा सकें।

इकबाल जैसा शायर और जहीन दिमाग भी एक अनपढ़ जाहिल गंवार लोहार के सामने अपने आप को बौना पाने लगा, क्योंकि उसने इस्लाम के नाम पर, पैगंबर की इज्जत के लिए हत्या कर दी। इकबाल यहीं से बदल गये और इतना बदले कि मुस्लिम लीग के इलाहाबाद वाले सम्मेलन में अलग मुस्लिम राज्य मांग बैठे। जब इकबाल जैसा जहीन शायर किसी अनपढ़ इल्मुद्दीन के सामने बौना हो सकता है तो फिर हामिद अंसारी की क्या हैसियत? रहे होंगे वो वाइस चांसलर, शिक्षाविद, उपराष्ट्रपति। जब ईमान पर आयेंगे तो इल्मुद्दीन ही हो जाएंगे।st

संजय तिवारी के एफबी वॉल से साभार. श्री तिवारी वरिष्‍ठ पत्रकार हैं. वे विस्‍फोट के संचालन के साथ समसामयिक विषयों पर सारगर्भित लेखन करते रहते हैं.