अनुभव सिखा जाते हैं हमें खास सबक : मनोज तिवारी

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मदन चौरसिया

भाजपा के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष और सांसद तथा भोजपुरी फिल्मों के मेगास्टार तथा लोकप्रिय गायक मनोज तिवारी  का बचपन तंगहाली में बीता। पिता ने दुनिया को अलविदा कहा तो परिवार को अपनी पढ़ाई के लिये संघर्ष करते देखा। वे मानते हैं कि जीवन एक पाठशाला है और अनुभव सबसे अच्छा शिक्षक । अनुभव हमारे हो या दुसरों के हमेशा उनसे सीख सकते हैं। मनोज तिवारी कहते हैं लोगों के मनोजवा से मनोज तिवारी बनाने के दौरान अनुभवी लोगों से काफी कुछ सीखा। आज मनोज तिवारी की जिंदगी समाजसेवा के जरिये दुसरों की मदद के लिये समर्पित है।  राजनीति के नियमों और औपचारिकता के बीच उनका जादू ऐसा चला कि आज वे भाजपा के स्टार प्रचारक हैं। मगर उन्होने ना अभिनय छोड़ा और ना ही गायन।

पेश है मनोज तिवारी से बातचीत के मुख्य अंश :

मनोज जी कितना कुछ है जो दिल में दबा रह गया ?

अहंकार शब्द कान में पड़ता है तो दुख होता है।  चिंतन जितना विवेक सम्मत होगा उतना वर्तमान के साथ जुड़ेगा। लोगोंने ही इस मनोजवा को मनोज तिवारी बनाया। किसी का दुख देखता हूं तो मुझे बचपन की याद आती है। ये बात हमेशा दिल में रहती है कि पिताजी आज दुनिया में रहते तो कितना अच्छा रहता। मेरे गायक बनने की कहानी बाबूजी के पेट पर लेटने से शुरू होती है। दरअसल मेरे पिताजी जब रियाज करते तो मुझे पेट पर लिटाकर थपकी देते रहते थे। बाबूजी ने एक बार मुझे सरगम सिखाने की कोशिश की थी। एक सरस्वती वंदना है। मुझे आज तक ये वंदना याद है। शायद वो बाबूजी की शिक्षा थी।

राजनीतिकी आपाधापी में संगीत के रियाज के लिये समय दे पाते हैं?

मेरी तो पहचान ही संगीत से है। रियाज भी करता हूं और संगीत से अथाह प्रेम है। संगीत से ही धैर्य रखना सीखा हूं। एक समय था जब हम लोग साइकिल की सवारी करके कार्यक्रम करने जाते थे। उस समय भोजपुरी नाजुक दौर से गुजर रही थी।

madanवरिष्‍ठ पत्रकार मदन चौरसिया की रिपोर्ट. मदन चौरसिया मायाधर्मयुगमायापुरीटर्निंग इंडियापायनियरदैनिक जागरणस्‍वतंत्र भारतआजजनसंदेश टाइम्‍स जैसे संस्‍थानों में लंबे समय तक कार्यरत रहे हैं. इनसे संपर्क 9140617918 के जरिए किया जा सकता है.