डेढ़ साल बाद शुरु हुआ पीजीआई का एपैक्स ट्रामा सेंटर

लखनऊ के SGPGI के एपैक्स ट्रॉमा सेंटर की करीब डेढ़ साल बाद फिर से शुरुआत हो गई। ऐसे में घायलों को इलाज में बड़ी राहत की आस मिली है। बीते डेढ़ साल से यह केंद्र कोविड अस्पताल के तौर पर रिजर्व था। ऐसे में ट्रॉमा के मरीजों को इलाज के लिए KGMU जाना पड़ता था। बता दे कि फिलहाल प्रदेश में तीन एपेक्स ट्रॉमा सेंटर हैं। इसमें एक लखनऊ का केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर, दूसरा बीएचयू ट्रॉमा सेंटर और तीसरा यह SGPGI का ट्रॉमा सेंटर है। निदेशक डॉ आरके धीमन ने सोमवार को ट्रॉमा सेवाओं की शुरुआत कर दी।फिलहाल यहां अभी 36 बेड पर भर्ती की व्यवस्था की गई है। कुछ ही दिनों में सभी बेडों पर इलाज मिल सकेगा।
31 जुलाई 2018 को हुई थी स्थापना

वृंदावन कॉलोनी स्थित SGPGI के ट्रॉमा सेंटर की स्थापना 31 जुलाई 2018 को हुई थी। बाद में मार्च 2020 से इसे कोविड अस्पताल में तब्दील कर दिया गया था। इसे लेवल-थ्री का कोविड अस्पताल बनाया गया था। निदेशक डॉ आरके धीमन ने सोमवार को ट्रॉमा सेवाओं की शुरुआत कर दी। फिलहाल अभी 36 बेड पर भर्ती की व्यवस्था की गई है। कुछ ही दिनों में सभी बेडों पर इलाज मिल सकेगा।
का ट्रॉमा सेंटर अब अपग्रेड हो गया है। पहले यहां सिर्फ 20 बेड का आईसीयू था। वहीं कुल 180 बेड थे। कोविड अस्पताल बनने के बाद संसाधन बढ़ा दिए गए हैं। ऐसे में कुल 240 बेड हो गए हैं। यह सभी ऑक्सीजन सपोर्टेड हैं। साथ ही करीब 100 बेड पर वेंटीलेटर की सुविधा है। ऐसे में गंभीर मरीजों को इलाज के लिए भटकना नहीं होगा।
एक्सीडेंटल मरीज व हेड इंजरी को मिलेगी बड़ी राहत

एसजीपीजीआई का ट्रॉमा सेंटर शुरू होने से हेडइंजरी, मल्टीपल फ्रैक्चर, स्ट्रोक व एक्सीडेंटल केस के गंभीर मरीजों को राहत मिलेगी। अभी तक शहर में हेड इंजरी के मरीजों के 24 घंटे सरकारी इलाज की सुविधा सिर्फ KGMU के ट्रॉमा सेंटर में है। लोहिया संस्थान में भी हेड इंजरी के मरीजों का इमरजेंसी में इलाज मुमकिन नहीं है। ऐसे में केजीएमयू में बेड न मिलने पर मरीजों को भटकना पड़ता है।