इस अधिकारी ने लिखा – नंगे पांव गरीबी चली, बदनसीबों के घर बदनसीबी चली

0
6198
police

मदन चौरसिया

: कविता लिखकर एएसपी प्रेमचंद ने मजदूरों का दर्द उजागर किया : चन्दौली। पुलिस की नौकरी और संवेदना के बीच वैसा ही संबंध होता है, जैसा चुंबक के नार्थ और साऊथ पोल का, लेकिन चंदौली जनपद में एक पुलिस अधिकारी ऐसे भी हैं, जिन्‍होंने अपनी संवेदनशील छवि से इस संबंध को गलत साबित किया है।

चंदौली की जनता भी उनकी इस खूबी के चलते उन्‍हें प्‍यार करती है। लॉकडाउन के दौरान आमजन को जागरूक करने का मामला हो या फिर लॉकडाउन के बाद श्रमिक ट्रेकों से आने वाले प्रवासियों को उनके घर पहुंचाने की जिम्‍मेदारी, अपर पुलिस अधीक्षक प्रेमचंद ने बखूबी निभाई है। दिन भर दीनदयाल उपाध्‍याय रेलवे स्‍टेशन पर डेरा डालकर उन्‍होंने व्‍यवस्‍था करवाई।

संवेदनशील व्‍यक्ति पुलिस की नौकरी में हो तो जनता को न्‍याय मिलने की उम्‍मीद बनी रहती है। पुलिस की नौकरी में संवेदना को जिंदा रखना ऐतिहासिक घटना मानी जाती है, प्रेमचंद ने भी अपनी संवेदना से लोगों का दिल जीता है। चाहे वह गरीब एवं पीडित लोगों की बात सुनकर उनकी परेशानियों को हल कराने का मामला हो या फिर कविता लिखने का।

कोरोना काल में जब सब कुछ ठहर गया था, तब एएसपी प्रेमचंद जनपद की समूची कानून-व्‍यवस्‍था को देखने के साथ ही अपनी कविता के माध्‍यम से भी लोगों को जागरूक करते रहे। उन्‍होंने कविता के माध्‍यम से कोरोना की भवाहवता से अवगत कराने के लिये लगातार कलम चलाते रहे। उनकी कविताओं से तमाम लोग जागरूक हुए।

प्रवासी मजदूर जब पैदल ही अपने राज्‍यों की तरफ बिना किसी सहारे के चल पड़े, तब फिर पुलिस अधिकारी के भीतर का संवेदनशील इंसान जग गया। वह सरकारी स्‍तर पर जितनी मदद कर सकते थे किया, साथ ही व्‍यक्तिगत रूप से भी तमाम लोगों की हेल्‍प की। इससे भी मन नहीं भरा तो उन्‍होंने कोरोना काल में प्रवासी मजदूरों की वेदना पर एक कविता लिख डाली।

अपर पुलिस अधीक्षक चंदौली प्रेमचंद द्वारा रचित कविता


police