बाबा विश्‍वनाथ के दरबार में श्रद्धालुओं की गर्दन तक पहुंचा सुरक्षाकर्मियों का हाथ (देखें वीडियो)

हरेंद्र शुक्‍ला

: प्राधिकरण बनते ही हालात बिगड़े, प्रधान अर्चक संग हुआ दुर्व्‍यहार : वाराणसी : काशी विश्वनाथ मंदिर विशिष्ट क्षेत्र प्राधिकरण बनते ही सावन के प्रथम दिन ही शनिवार को मंदिर के प्रधान अर्चक पं श्रीकांत मिश्र और देश के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धा का भाव लेकर बाबा की दर्शन को आये श्रद्धालुओं के साथ बेलगाम सुरक्षाकर्मियों ने विशिष्ट सेवा शुरू कर दिया। बाबा श्री काशी विश्वनाथजी के गर्भगृह में महिला/पुरुष श्रद्धालुओं के सुगमता और सुविधाएं मुहैया कराने के उद्देश्य से आनन-फानन में प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा सरकार को खुश करने के लक्ष्य के तहत गठित प्राधिकरण के पहले निशाना प्रधान अर्चक पं. श्रीकांत मिश्र बन गये।

शनिवार की सुबह बाबा श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर के प्रधान अर्चक पं. श्रीकांत मिश्र शनिदेव मंदिर प्वाईंट के रास्ते बाबा दरबार में प्रवेश कर रहे थे, इसी बीच वहां तैनात पीएसी का जवान उन्हें रोक दिया। परिचय देने और मंदिर प्रशासन की ओर से जारी पास दिखाने के बावजूद वहां तैनात पीएसी के जवान तैस में आकर प्रधान पुजारी पर ताबड़तोड़ हाथ चला दिया। इस घटना के बाद मंदिर प्रशासन और जिला प्रशासन में हडकंप मच गया।

इस मामले की शिकायत के बाद आनन-फानन में अधिकारियों ने किसी तरह पुजारी से दोषी जवान से माफी मंगवाकर मामले को रफा-दफा कराने में सफल रहे। सवाल यह है कि जिस पीएसी का गठन यूपी में तत्कालीन मुख्यमंत्री नरायणदत तिवारी ने दंगा नियंत्रण के लिए की थी, उस पीएसी को धार्मिक स्थलों पर तैनात क्यों किया जाता है। क्या धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालु मारपीट करने जाता है?

जब मंदिर के चारो तरफ प्रवेशद्वारों पर अत्याधुनिक असलहों से लैस सुरक्षाकर्मियों की तैनाती है और कड़ी जांच के बाद ही श्रद्धालुओं को प्रवेश मिलता है तो गर्भगृह सहित मंदिर परिसर में भारी संख्या में सुरक्षाकर्मियों की तैनाती का क्या औचित्य है, जो आये दिन विवाद को जन्म देते हैं। और श्रद्धालुओं को अपमानित करने से गुरेज नहीं करते।

तीनों लोकों से न्यारी काशी में अवस्थित बाबा काशी विश्वनाथ मंदिर विश्व के करोड़ों श्रद्धालुओं के आस्था का केंद्र है। हर साल यहाँ हजारों श्रद्धालु गंगा स्नान कर बाबा के दरबार में मत्था टेकते हैं। लेकिन हिन्दू मत के अनुसार सावन के महीने में पूरे माह बाबा कैलाश छोड़कर माता पार्वती के साथ काशी में ही विराजते हैं। लेकिन सवाल है कि जिस आस्था विश्वास और मान्यताओं से सराबोर होकर श्रद्धालु वाराणसी आते हैं तो क्या यहाँ का मंदिर प्रशासन और सुरक्षा महकमा उनकी आस्था को वह सम्मान दे पाता है, जिसका वे हक़दार होते हैं।

काशी के एक जिम्मेदार नागरिक की हैसियत से हम कहेंगे कि ऐसा कत्तई नहीं है। जिस तरह से मंदिर परिसर में सुरक्षाकर्मी ड्यूटी दे रहे हैं, इसके कारण श्रद्धालु दुबारा बाबा के यहाँ आने में कई बार सोचेंगे। इसके लिये सुरक्षा महकमे से जुड़े लोगों को मानना होगा कि श्रद्धालु बाबा के दर्शन पूजन को आते हैं, किसी थाने में एफआईआर कराने नहीं आये होते है। हर हाल में बाबा दरबार में उन्हें दरोगाई मानसिकता से बाहर आना होगा। इस रपट के साथ गर्भगृह में महिला श्रद्धालुओं के साथ सुरक्षाकर्मियो की दुर्व्यवहार की तस्वीर सीसीटीवी में देखा जा सकता है।

बनारस से वरिष्‍ठ पत्रकार हरेंद्र शुक्‍ला की रिपोर्ट. श्री शुक्‍ला अमर उजाला, दैनिक जागरण, आज समेत कई अखबारों में कार्यरत रहे हैं.