कटियार ने बदल दी प्रदेश के ग्रामीण सड़कों की सूरत, बनाया मिसाल

नवीनीकरण

मनोज श्रीवास्‍तव

: मेहनत और लगन से प्रदेश की सड़कें की गड्ढामुक्‍त : लखनऊ। प्रदेश में नई सरकार के गठन के समय उसे विरासत में जर्जर सड़कें, टूटे पुल-पुलिया एवं ध्वस्त ग्रामीण सड़कें मिली थीं। सरकार के समक्ष इनफ्रास्ट्रक्चर को पटरी पर लाने की एक बहुत बड़ी चुनौती मुंह बाये खड़ी थी। ऊपर से पिछली सरकारों ने खजाना खाली कर हजारों-करोड़ों की देनदारियां सृजित कर ‘‘कांटों का ताज‘‘ वर्तमान सरकार को सौंपा था।

ऐसी स्थिति में सरकार द्वारा बड़ा निर्णय लिया गया कि प्रदेश के सभी मार्गों को यथाशीघ्र गड्ढामुक्त कर जनता की दुश्‍वारियों को कम किया जाए। इसके लिए लोक निर्माण विभाग की लगभग 2 लाख 25 हजार किमी सड़कें गड्ढामुक्त करने के लिए विभाग के अत्यन्त कर्मठ, कर्तव्यनिष्ठ, तकनीकी रूप से पारंगत एवं अनुभवी अभियन्ता पीके कटियार को नोडल अधिकारी के रूप में इस महत्वपूर्ण कार्य को अंजाम देने के लिए तैनात किया गया।

प्रदेश की सभी विभागों की 3 लाख 58 हजार किलोमीटर सड़कें, जिसमें से 2 लाख 25 हजार किलोमीटर सड़कें लोक निर्माण विभाग की हैं, में से 85 हजार किलोमीटर की सड़कों को गड्ढामुक्त करने का लक्ष्य रखा गया। बड़े पैमाने पर टूटी सड़कों को गड्ढामुक्त करने तथा अत्यन्त कम समय को देखते हुए इस कठिन लक्ष्य को सभी के द्वारा प्रारम्भ में ही असम्भव माना गया था।

नई सरकार के गठन के पश्‍चात ओवरलोडिंग को बन्द करने, अवैध खदानों को बन्द करने का तथा नई ई-प्रोक्योरमेंट प्रणाली लागू करने का निर्णय राजकीय हित में लिया गया। जिसमें सामग्री की सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हो चुकी थी। इन कठिन परिस्थितियों एवं समय के अभाव के बावजूद पीके कटियार, अधीक्षण अभियन्ता के द्वारा नोडल अधिकारी के रूप में प्रतिदिन 14-15 घण्टे कार्य कर जनपद स्तरीय सभी अधिकारियों से प्रतिदिन की प्रगति प्राप्त कर कमाण्ड सेन्टर के माध्यम से मानीटरिंग की गई।

बेहतर

इस दौरान सभी अधिकारियों की समस्याओं का समाधान भी किया। एक जिले को अपनी स्वयं की देखरेख में 15 जून से पूर्व ही कार्य पूर्ण कराकर प्रदेश के अन्य जनपदों के लिए उदाहरण सेट किया तथा उन्‍हें मोटिवेट भी किया। विभिन्न स्तरों से सभी स्वीकृतियां कराई, जिसके फलस्वरूप 15 जून तक असम्भव समझे जाने वाले लक्ष्य का 85 प्रतिषत पूर्ण कर सभी को हैरान कर दिया। विभिन्न कठिनाईयों एवं कम समय के बावजूद 85 प्रतिशत निर्धारित लक्ष्य को पूरा करने की इस प्रगति की पूरे प्रदेश में प्रशंसा मिली।

37 हजार किलोमीटर मार्गों का नवीनीकरण अर्थात पूरी सतह पर ब्लैक टाप करने का कार्य भी इसी अभियान के अन्तर्गत वर्ष 2017-18 में कराया गया। प्रगति को जनसामान्य के जांच हेतु आनलाइन भी किया गया। पीके कटियार के इस महत्वाकांक्षी अभियान का असर पूरे प्रदेश में यहां तक कि दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्रों तक भी महसूस किया गया। उत्तर प्रदेष सरकार द्वारा चलाए गए इस महाभियान को जनप्रतिनिधियों द्वारा बड़े गर्व के साथ जनता के समक्ष पेश किया जा रहा है। यह अभियान लगातार इसी प्रकार चलाते रहने का बीड़ा भी श्री कटियार ने उठाया है।

सरकार

गड्ढामुक्त करने के कार्यक्रम की गहन समीक्षा कर केवल लोक निर्माण विभाग ही नहीं बल्कि अन्य विभागों की सडकों के सुधार की भी प्रक्रिया चलाई गई। इस हेतु एक-एक सड़क एवं उनकी हालत का हिसाब नोडल अधिकारी द्वारा पूरे प्रदेश के समस्त ग्रामों तक से एकत्र किया गया है। पीके कटियार जैसे कर्मठ एवं अपनी तकनीकी रूप से पारंगत अधिकारी उत्तर प्रदेश सरकार के लिए एसेट साबित हो रहे हैं। तुलनात्मक दृष्टि पर कम ऊंचे ओहदे पर रहते हुए भी कठिन कार्य में सफलता प्राप्त करने वाले इस अधिकारी ने दूसरे विभागों के लिए भी बेहतर करने की चुनौती पेश की है।

काम की बजाय सोर्स-सिफारिश के माध्यम से लोग ऊंचा पद प्राप्त करने की होड़ में लगे रहने वाले अधिकारियों के पीके कटियार मिसाल हैं, जो अपने काम से कम महत्‍वपूर्ण पद पर होते हुए भी बेहतर करके बड़ी लकीर खींची है। सरकार को ऐसे अधिकारियों की ओर ध्यान देना चाहिए। यही नहीं दिसम्बर, 2017 में लोक निर्माण विभाग द्वारा अन्तर्राष्ट्रीय स्तर की दो दिन की एक बड़ी कार्यशाला आयोजित की गई, जिसमें केन्द्रीय सड़क परिवहन राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी समेत कई राज्यों के लोक निर्माण विभाग के मंत्रियों, प्रधान सचिवों एवं आईआईटी समेत विदेशों से आये हुए विशेषज्ञों द्वारा भाग लिया गया था।

इस पूरे कार्यक्रम के मुख्य आयोजक के रूप में पीके कटियार, अधीक्षण अभियन्ता ने खुद कमान संभाली तथा इसे सफलतापूर्वक सम्‍पन्‍न कराया। इसकी सफलता की गूंज प्रदेश सरकार में ही नहीं बल्कि भारत सरकार में भी पहुंची थी। केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी द्वारा इस कार्यशाला की भूरि-भूरि प्रशंसा की गई। इस आयोजन के माध्यम से कम लागत से मजबूत सड़क निर्माण की इकोफ्रेन्डली तकनीक को नया आयाम एवं गति मिली।

गुणवत्ता

उल्‍लेखीनय है कि विभाग में जब कोई कार्य असफल या मुश्किल होने की स्थिति में आता है तो इसकी जिम्‍मेदारी पीके कटियार को थमा दी जाती है। श्री कटियार कठिन परिस्थितियों में भी 100 प्रतिशत मेहनत से कार्य को सफल बनाते रहे हैं। इनके द्वारा किए गए मार्गों के कार्य से गुणवत्ता के नए मापदण्ड निर्धारित हुए। इनकी देख-रेख में निर्मित सड़कों पर अत्यधिक भारी ट्रकों के चलने के बावजूद भी एक दाग नहीं बना। अन्य विभागों में भी इनके कराए हुए कार्य अभी तक कीर्तिमान के रूप में देखे जाते हैं।

विश्‍व बैंक द्वारा संचालित मेडिकल विभाग की योजना इसका एक उदाहरण है। नई सरकार की मंशा के अनुसार श्री कटियार द्वारा लोक निर्माण विभाग में सख्त अनुशासन लागू कर सभी पत्रावलियों का निस्तारण, स्वीकृतियां एवं सेवानिवृत्त अधिकारियों के मामलों के निपटारे त्वरित व तत्काल किए जा रहे हैं। भ्रष्ट व निकम्मे कर्मचारियों पर सख्ती से कार्रवाई की गई, जिससे अधीनस्थों में हड़कम्प है तथा अनर्गल आलोचना भी की जा रही हैं, परन्तु उन सबसे बेअसर श्री कटियार अपना कार्य लगातार जनहित में सरकार की मंशा के अनुरूप कर रहे हैं।

श्री कटियार द्वारा सरकार की सभी योजनाएं जैसे-हाईस्कूल एवं इण्टरमीडिएट टापर्स के गांवों को सम्पर्क मार्ग से जोड़ने की योजना, तहसील मुख्यालय, ब्लाक मुख्यालय, अनजुड़ी बसावट,  दीनदयाल जी की जन्मसदी एवं सांसद आदर्श ग्राम योजना आदि में भरपूर सहयोग देकर कड़ी मेहनत कर आगे बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।

वरिष्‍ठ पत्रकार मनोज श्रीवास्‍तव की रिपोर्ट.