योगी की इस पहल से बदल जायेगी यूपी की तकदीर और तस्‍वीर 

Lockdown 2.O

अनिल सिंह

  • माफिया के चंगुल से निकलने को बेताब है फिल्‍म इंडस्‍ट्री
  • दाऊद के नेक्‍सस ने नशेड़ी बना डाला है बॉलीवुड को

लखनऊ : उत्‍तर प्रदेश के मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ ने जब राज्‍य में फिल्‍म सिटी बनाने की घोषणा की तो तमाम फिल्‍मी हस्तियों ने बेहद उत्‍साह दिखाया। उत्‍तर भारत की बड़ी आबादी की उम्‍मीद योगी आदित्‍यनाथ से जुड़ गई है। इंटरटेनमेंट इंडस्‍ट्री से जुड़े कई लोगों ने बाकायदा वीडियो जारी कर योगी आदित्‍यनाथ का आभार जताया, और ऐसा इसलिये हुआ क्‍योंकि बॉलीवुड की एक बड़ी आबादी अंडरवर्ल्‍ड और ड्रग माफिया की घुसपैठ से तबाही एवं दहशत की आगोश में है।

अब उसे भी एक ऐसे विकल्‍प की तलाश है, जहां माफिया और दशहत की गुंजाइश कम से कम हो। बीते तीन साल में योगी ने उत्‍तर प्रदेश के संगठित अपराध को जिस तरीके से खत्‍म किया है, उसने बॉलीवुड को भी भरोसा दिया है कि उत्‍तर प्रदेश उनके लिये सुरक्षित वर्क प्‍लेस बन सकता है।

बीते तीन दशक में यूपी में राजनीतिक दलों के आंखों के तारे बनकर अपराध के जरिये अरबों का अवैध साम्राज्‍य खड़ा करने वाले मुख्‍तार अंसारी, अतीक अहमद समेत तमाम अपराधियों का काली कमाई का किला जिस तरीके से ढहाया जा रहा है, वैसा योगी आदित्‍यनाथ के सीएम बनने से पहले सपने में भी नहीं सोचा जा सकता था। पिछले तीन साल में यूपी की छवि में जो सुधार दिखा है, उसका उदाहरण है कि ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में यूपी दूसरे पायदान पर खड़ा हो गया है।

इस तथ्‍य से शायद ही कोई अंजान हो कि आतंकी दाऊद इब्राहिम समेत अंडरवर्ल्‍ड के कई नामचीन माफियाओं का कालाधन बॉलीवुड में लगा हुआ है। आफगानी अब्‍दुल करीम शेर खान उर्फ करीम लाला से शुरू हुआ यह सफर अब दाऊद इब्राहिम के चंगुल में है, जिससे बाहर निकलने की छटपटाहट निर्माता-निर्देशकों को आतंकमुक्‍त यूपी में खींच सकती है।

आजादी के बाद के दशक में हेलन के पैसे लेकर भागने वाले पीएन अरोड़ा से पैसे दिलाने के नाम पर तस्‍कर करीम लाला बॉलीवुड के संपर्क में आया फिर, यहीं से शुरू हुई बॉलीवुड में माफिया की घुसपैठ। करीम लाला दिलीप कुमार का भी करीबी बन गया। उसने फिल्‍मों में पैसा लगाना शुरू किया, लेकिन यह असंगठित था। करीम लाला को तब इतनी समझ भी नहीं थी कि वह अपने काले धन को फिल्‍मों के जरिये सफेद कर सकता है।

अंडरवर्ल्‍ड और बॉलीवुड के नेक्‍सस को संगठित तरीके से तैयार करने का काम हाजी मस्‍तान ने किया। अपराध से आये धन को सफेद करने के लिये उसने फिल्‍मों में पैसे लगाने शुरू किये। अभिनेत्री सोना के प्‍यार में वह बॉलीवुड के और अधिक नजदीक आ गया। हाजी मस्‍तान से तमाम फिल्‍मी सितारों के दोस्‍ती की चर्चा आम लोगों के जुबान पर थी।

फिल्‍म उद्योग को भी समझ में आ गया कि सिनेमा बनाने के लिये अंडरवर्ल्‍ड से मनचाहा पैसा मिल सकता है, माफिया भी समझ गये कि उनका काला धन फिल्‍मों के जरिये सफेद हो सकता है। दोनों की जरूरतें इन्‍हें साथ ले आईं और इस तरह शुरू हो गया अंडरवर्ल्‍ड का बॉलीवुड में हस्‍तक्षेप। इस नेक्‍सस ने फिल्‍म उद्योग को पैसा तो मिला लेकिन उन पर माफिया हावी हो गये।

दाऊद इब्राहिम के उभरने के बाद तो माफिया का असर केवल पैसों तक ही सीमित नहीं रह गया। दाऊद ने अपना हस्‍तक्षेप फिल्‍मी स्‍क्रिप्‍ट से लगायत कलाकार के चयन तक बढ़ा दिया। फिल्‍मों के जरिये अपराधियों एवं एक खास वर्ग का महिमामंडन तक किया जाने लगा। सोची समझी रणनीति के तहत भारतीय संस्‍कृति पर भी सिनेमा के माध्‍यम से हमले किये जाने लगे।

दाऊद ने अपना नेटवर्क इतना संगठित कर लिया कि उसके निर्देश के बिना फिल्‍म उद्योग में एक पत्‍ता तक नहीं हिल सकता था। पिछले दरवाजे से फिल्‍म वितरण पर भी उसने एकाधिकार कर लिया। इसी का परिणाम है कि कई सितारे गाहे बगाहे देश विरोधी बातें करते रहते हैं। कई फिल्‍मी हस्‍तियां उसके एक इशारे पर उसके दरबार में हाजिरी लगाने पहुंचती रहीं।

दाऊद का नाम मंदाकिनी और अनिता अयूब से भी जुड़ा। मुंबई बम धमाकों के बाद देश छोड़कर भागने को मजबूर हुए दाऊद की पकड़ इसके बाद भी बॉलीबुड पर कमजोर नहीं पड़ी। उसने बॉलीवुड नेटवर्क संभालने का काम अबू सलेम, छोटा शकील जैसे गैंग अन्‍य सदस्‍यों को सौंप कर, खुद ड्रग्‍स, असलहों और रीयल इस्‍टेट के धंधे में व्‍यस्‍त हो गया।

बॉलीवुड पर अंडरवर्ल्‍ड के दशहत के बीच कई अभिनेत्रियों के नाम भी अपराधियों से जुड़े। मोनिका बेदी पुर्तगाल में अबू सलेम के साथ पकड़ी गई तो ममता कुलकर्णी काम नाम ड्रग्‍स माफिया विक्रम गोसवई उर्फ विक्‍की गोस्‍वामी से जुड़ा।

एक दौर के बाद बॉलीवुड अंडरवर्ल्‍ड के चंगुल से निपटने के लिये छटपटाने लगा। टी सीरीज के गुलशन कुमार भी इसी प्रयास के तहत नोएडा में फिल्‍म सिटी स्‍थापित करने की योजना बनाई, लेकिन 1997 में उनकी निर्मम हत्‍या ने उनके सपनों को खत्‍म करने के साथ ही फिल्‍म जगत को हिलाकर रख दिया।

इस हत्‍याकांड से फिल्‍म उद्योग उरबने का प्रयास कर ही रहा था कि 21 जनवरी 2000 को राकेश रोशन पर हुए हमले ने बुरी तरह झकझोर दिया। दो गोलियां लगने के बावजूद राकेश रोशन बच गये, लेकिन सिनेमा उद्योग बुरी तरह दहशत में आ गया। ऐसे ही एक जांच में सामने आया था कि क्‍लैप ब्वॉय का काम करने वाले नाजिम रिजवी ने 12 करोड़ की लागत से सलमान खान और प्रीति जिंटा के साथ चोरी चोरी चुपके चुपके फिल्‍म बनाई थी, जिसमें दाऊद के सहयोगी छोटा शकील का पैसा लगा है।

ऐसे तमाम उदाहरण हैं, जो फिल्‍मी चकाचौंध और चमक के पीछे की कलई खोलते हैं। देश के बाहर रहकर भी ये माफिया मुंबई के फिल्‍म उद्योग को संचालित कर रहे हैं, और कोई सरकार इनके नेटवर्क को खत्‍म करने का साहस नहीं दिखा पा रही है, क्‍योंकि इस खेल में कई राजनीतिक दल और राजनेताओं की गोटियां भी बिछी हुई हैं।

सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद जब नामचीन कलाकारों का ड्रग्‍स का कनेक्‍शन सामने आने लगा है, तब बॉलीवुड की एक भयानक तस्‍वीर उभरती दिखती है। मायानगरी में दाऊद के हस्‍तक्षेप का अंदाजा इसी बात से लगता है कि अनुपम खेर को 2016 में कहना पड़ा कि उन्‍हें राष्‍ट्रवाद की बात करने पर इंडस्‍ट्री में भेदभाव का शिकार होना पड़ रहा है। वह राष्‍ट्रवाद का तमगा लगने के बाद एक तरह से जॉबलेस हो गये हैं।

जाहिर है कि देश विरोधी आतंकी की पकड़ इतनी मजबूत है कि वह पाकिस्‍तान और दुबई में बैठकर भारत की फिल्‍म इंडस्‍ट्री को अपने तरीके से संचालित कर रहा है। अंडरवर्ल्‍ड और ड्रग्‍स माफिया के चंगुल में फंसे इस फिल्‍म उद्योग को भी शायद यही लगने लगा है कि इसे कॉकस और अंडरवर्ल्‍ड से यूपी ही उबार सकता है, तभी फिल्‍मी जगत की बड़ी हस्‍तियों ने योगी की घोषणा के बाद उत्‍साह दिखाया है।

योगी ने उत्‍तर प्रदेश में संगठित अपराध की बुनियाद उखाड़कर इस भरोसे को कायम भी किया है। उत्‍तर प्रदेश कई नजरिये से फिल्‍म उद्योग के लिये बेहतरीन डेस्टिनेशन साबित हो सकता है। एक लाख करोड़ के आसपास टर्नओवर वाले हिंदी इंटरटेनमेंट इंडस्‍ट्री को यूपी के नोएडा और यमुना एक्‍सप्रेस वे के पास से वो सारी सुविधाएं मिल सकती हैं, जो फिल्‍म उद्योग की बुनियादी जरूरत है।

जेवर इंटनेशनल एयरपोर्ट बनने के बाद कनेक्टिविटी और प्रासंगिता भी बढ़ जायेगी। यहां से उत्‍तराखंड, मध्‍य प्रदेश, छत्‍तीसगढ़, बिहार के शानदार प्राकृतिक लोकेशन महज कुछ घंटों की दूरी पर मौजूद हैं। सड़क एवं रेल कनेक्टिविटी भी सुगम है। और इन सबसे बड़ी बात हो है, वह है यूपी के सीएम योगी आदित्‍यनाथ की इच्‍छाशक्ति, जिसे उन्‍होंने अपने तीन साल के कार्यकाल में बखूबी कर के दिखाया है। उनका यह कदम उत्‍तर प्रदेश की तकदीर और तस्‍वीर बदलने में मील का पत्‍थर साबित होगा।