सियासी समीकरण साधने में जुटे पूर्वांचल के बाहुबली, बनारस होगा केंद्र  

माफिया

मदन चौरसिया

: माननीय बनने की मंशा से गैंगवार में आई कमी : लखनऊ : कभी पूर्वांचल की धरती को गैंगवार और गोलियों की तड़तड़ाहट से दहलाने वाले बाहुबली माफिया एक बा‍र फिर सक्रिय हो गए हैं। हां, लेकिन इस बार उनकी सक्रियता का कारण गैंगवार नहीं बल्कि सियासत में मजबूती से पांव जमाने की कोशिश है। 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले बाहुबलियों ने अपनी राजनीतिक गोटियां सेट करनी शुरू कर दी है। राजनीतिक समीकरण सेट करने के लिए माफियागिरी के समीकरण भी बदलने की कवायद चल रही है।  

पूर्वांचल के माफियाओं की बात की जाए तो बृजेश सिंह, धनंजय सिंह, मुख्‍तार अंसारी, विनीत सिंह, प्रेमप्रकाश सिंह उर्फ मुन्‍ना बजरंगी, विजय मिश्रा, सुशील सिंह अलग-अलग गुटों में एक दूसरे के दुश्‍मन रहे हैं। इसमें मुन्‍ना बजरंगी को छोड़ दें तो शेष सभी वर्तमान में माननीय हैं या रह चुके हैं। बाहुबलियों की बात की जाए तो बृजेश सिंह का पूर्वांचल में बड़ा नाम है। मुख्‍तार से बृजेश की अदावत जगजाहिर है। बृजेश फिलहाल एमएलसी और मुख्‍तार विधायक हैं।

संभावना जताई जा रही है कि यह दोनों 2019 में लोकसभा चुनाव में खुद उतर सकते हैं या फिर अपने किसी नजदीकी को उतार सकते हैं। बृजेश के भतीजे सुशील सिंह चंदौली जिले के सैयदराजा सीट से भाजपा विधायक हैं। जौनपुर से सांसद और रारी से विधायक रह चुके धनंजय सिंह इस समय पैदल हैं। बसपा से निकाले जा चुके धनंजय भाजपा में एंट्री के प्रयास में लगे हुए हैं, लेकिन उधर से हरी झंडी नहीं मिल पा रही है।

बाहुबली धनंजय सिंह जौनपुर के कई विधानसभा सीटों पर अपना प्रभाव रखते हैं। धनंजय ने जितना नाम जरायम की दुनिया में कमाया उससे कहीं ज्‍यादा धमक वह सियासत में बना चुके हैं। बसपा से निकलने के बाद वह फिलहाल निषाद पार्टी में शामिल हैं। निषाद पार्टी के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष संजय निषाद ने धनंजय सिंह को जौनपुर से सांसदी लड़ने की हरी झंडी दे दी है, लेकिन गोरखपुर और फुलपुर उपचुनाव में निषाद पार्टी ने गठबंधन को समर्थन दिया था।

इसको देखते हुए गठबंधन और उसके स्‍वरूप को लेकर अभी से कयास लगने शुरू हो गए हैं। गठबंधन के भविष्‍य पर भी सवाल उठने लगे हैं। खैर, माफिया से माननीय बने विनीत सिंह की बात करें तो वह इस समय पैदल हैं। बसपा की टिकट पर चंदौली की सैयदराजा सीट से विधानसभा चुनाव में उतरे थे, लेकिन बृजेश सिंह के भतीजे सुशील सिंह से हार गए। मिर्जापुर-भदोही से एमएलसी रहे विनीत 2019 में बसपा के टिकट पर चंदौली संसदीय सीट से भाग्‍य आजमाने की तैयारी कर रहे हैं।

एक-दूसरे के कट्टर दुश्‍मन बृजेश सिंह और मुख्‍तार अंसारी खेमा पिछले कुछ सालों से बिल्‍कुल शांत है। माननीय बनने के बाद दोनों ने सीधे अपराध से किनारा कर लिया है। अब वह उभरते माफियाओं के सिर पर हाथ रखकर अपना काम निकाल लेते हैं। मुख्‍तार ने बृजेश के पट्टीदार इंद्रदेव सिंह उर्फ बीकेडी का इस्‍तेमाल बृजेश को ही कमजोर करने में किया है। बीकेडी पर बृजेश के चचेरे भाई सतीश सिंह और उनके खास राम बिहारी चौबे की हत्‍या का आरोप है। बीकेडी ने बृजेश के खास अजय खलनायक पर भी हमला कर चुका है।

दरअसल, मुख्‍तार गैंग काफी समय पहले माननीय बनकर सत्‍ता का लाभ उठाकर बृजेश एंड कंपनी को नुकसान पहुंचाने में सफल रहा है। कृष्‍णानंद राय की हत्‍या के बाद बृजेश सिंह के पास अपने साम्राज्‍य को बचाने के लिए सियासत में आने के अलावा और कोई चारा नहीं था। भाई चुलबुल सिंह को एमएलसी बनने के बाद बृजेश ने भतीजे सुशील सिंह को भी सियासत में आने में मदद की। सुशील तीन बार विधायक चुने जा चुके हैं। इसके बाद खुद बृजेश ने 2012 के विधानसभा में सैयदराजा से भाग्‍य आजमाया लेकिन दो हजार वोटों से हार गए। फिर चंदौली से एमएलसी बनके माननीय बनने में सफल रहे।

जरायम की दुनिया में बदले समय के साथ कई और बाहुबली पैदा हुए तथा अपनी सुविधा के हिसाब से किसी एक खेमे से जुड़ गए। बाहुबली धनंजय सिंह को बीजेपी विधायक कृष्णानंद राय के बीच नजदीकी रही है। माना जाता है कि धनंजय सिंह का मुख्तार अंसारी से अदावत है। अप्रत्यक्ष रूप से बृजेश सिंह राजनितिक दोस्ती है। जबकि जौनपुर का ही मुन्‍ना बजरंगी मुख्‍तार खेमे का खास रहा है। कृष्‍णानंद राय की हत्‍या में भी बजरंगी का नाम शामिल है। इन बाहुबलियों ने अपराध के रास्‍ते अपना आर्थिक साम्राज्‍य खड़ा कर लिया है। इसके चलते अपनी तथा आर्थिक साम्राज्‍य की सुरक्षा के लिए सियासत में आना इनकी मजबूरी है।

मुन्‍ना बजरंगी की तरह ही धनंजय सिंह के खासमखास रहे बाहुबली अभय सिंह मुख्‍तार अंसारी के नजदीकी बन गए हैं। अभय और धनंजय के बीच छत्‍तीस का आंकड़ा है। अभय इस समय सपा से विधायक हैं। झांसी जेल में बंद प्रेम प्रकाश सिंह उर्फ मुन्‍ना बजरंगी भी सियासत में उतरने की तैयारी कर रहा है। विजय मिश्रा भी भदोही से विधायक हैं। वह सभी खेमे में अपनी पहुंच रखते हैं। अब देखना है कि अभी से अपनी सुविधानुसार सियासी गोटी सेट करने की रणनीति बना रहे बाहुबली 2019 में किस पार्टी तथा किस सीट से खम ठोंकते नजर आएंगे। फिलहाल बाहुबलियों के सियासत में उतर जाने के बाद जरायम के दुनिया में शांति है।madan

वरिष्‍ठ पत्रकार मदन चौरसिया की रिपोर्ट. मदन चौरसिया मायाधर्मयुगमायापुरीटर्निंग इंडियापायनियरदैनिक जागरणस्‍वतंत्र भारतआजजनसंदेश टाइम्‍स जैसे संस्‍थानों में लंबे समय तक कार्यरत रहे हैं. इनसे संपर्क 9140617918 के जरिए किया जा सकता है.