भाजपा के इस विधायक ने SC-ST एक्‍ट को बताया काला कानून, दूसरों के मुंह बंद

संजीव कुमार बाबा

: दलित प्रतिनिधियों ने एक्‍ट लागू कराने के हिला दी थी सरकार : अन्‍य किसी सवर्ण जनप्रतिनिधि ने सवर्णों के पक्ष में नहीं उठाई आवाज : बलिया : एससी-एसटी एक्‍ट पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद भाजपा और एनडीए से जुड़े दलित सांसदों ने मोर्चा खोल दिया था। उदित राज हों या फिर राम विलास पासवान और रामदास अठावले, सबने भाजपा की नरेंद्र मोदी सरकार पर इतना दबाव बना दिया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को घुटने टेक कर संसद में इसके एक्‍ट को पुराने रूप में लागू करने के लिए अध्‍यादेश लाना पड़ा।

इस एक्‍ट के लागू होने के बाद पिछड़ी जाति से ताल्‍लुक रखने वाले उत्‍तर प्रदेश के डिप्‍टी सीएम केशव मौर्य ने एक्‍ट का विरोध तो नहीं किया लेकिन खुलकर कहा कि अगर किसी दलित ने एससी-एसटी एक्‍ट के जरिए ओबीसी लोगों को परेशान किया तो वो भी बचेगा नहीं। इसके ठीक विपरीत इस एक्‍ट में अंग्रेजकालीन निर्ममता होने के बावजूद किसी भी पार्टी के सवर्ण सांसद या विधायक ने इस कानून के खिलाफ मोर्चा नहीं खोला।

आरक्षण एवं एससी-एसटी एक्‍ट अध्‍यादेश को लेकर सवर्ण संगठनों ने 6 सितंबर को भारत बंद किया था, इस दौरान भी किसी भी दल का सवर्ण जनप्रतिनिधि ने इस एक्‍ट के खिलाफ नहीं बोले और ना समर्थन में उतरे। सवर्ण जनप्रतिनिधियों के इस रवैये से सवर्णों में खासी नाराजगी भी है। वे अपने ऐसे जनप्रतिनिधियों को सबक सिखाने को भी मानसिक रूप से तैयार हैं।

भाजपा के साथ किसी भी दल के सवर्ण प्रतिनिधि के इस एक्‍ट के पुराने स्‍वरूप के खिलाफ ना बोलने से लोग आहत हैं। सवर्णों का मानना है कि इस कानून में जो जांच और उसके बाद गिरफ्तारी का प्रावधान था, उससे किसी को दिक्‍कत नहीं थी, लेकिन किसी भी झूठी रिपोर्ट के बाद तत्‍काल गिरफ्तारी और जेल भेजे जाने की व्‍यवस्‍था जोड़े जाने से लोग नाराज हैं।

इस एक्‍ट के खिलाफ केवल एक केवल एक विधायक लगातार मोर्चा खोलकर बिना डर भय के सवर्ण समाज के पक्ष में खड़ा है। बलिया जिले के बैरिया से भाजपा विधायक सुरेंद्र सिंह ने इस एक्‍ट के खिलाफ बगावत का झंडा बुलंद करते हुए इसे काला कानून बताया तथा कहा कि अगर समाज कहेगा तो वह विधायक पद से इस्‍तीफा भी दे देंगे।