बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना

राकेश श्रीवास्तव

: आपस में ही सिर फुटौव्‍वल में जुटे कांग्रेसी : लखनऊ। ‘‘न सूत, न कपास, जुलाहों में लट्ठम-लट्ठा’’ यूपी कांग्रेस का हाल कुछ ऐसा ही है। न जनमत न जनाधार और न ही पार्टी में कोई चर्चित चेहरा। राजनीति के अकुशल खिलाड़ी और प्रदेश अध्यक्ष राज बब्बर को यदि नजरअंदाज कर दिया जाए तो शायद ही कोई ऐसा चेहरा नजर आयेगा जो पार्टी के जनाधार को बढ़ाने की कला रखता हो।

हालांकि राज बब्बर स्वयं पार्टी का जनाधार बढ़ाने की क्षमता नहीं रखते फिर भी कांग्रेस ने उन्हें किसी तरह से ढो रखा है। कहने में कतई गुरेज नहीं है कि यूपी कांग्रेस के तरकस में ऐसा कोई तीर नहीं है जो चुनावी महाभारत में विरोधियों के बीच हलचल भी पैदा कर सके। यूपी कांग्रेस में एकमात्र पुराना चेहरा प्रमोद तिवारी के रूप में मौजूद तो जरूर है, लेकिन पार्टी उन्हें भरोसेमन्द नहीं समझती, दूसरी ओर प्रमोद तिवारी को भी पार्टी की इस सोंच से कोई एतराज नहीं।

कहना गलत नहीं होगा कि प्रमोद तिवारी तो अब जैसे-तैसे कांग्रेस के बैनर तले राजनीति में अपना अंतिम समय गुजार रहे हैं। अब मौजूदा स्थिति यह है कि आगामी लोकसभा चुनाव में लगभग आठ माह का समय शेष रह गया है फिर भी यूपी कांग्रेस कुछ छुटभैये नेताओं और कार्यकर्ताओं के सहारे सिर्फ उछल-कूद में ही व्यस्त है, जबकि यूपी में उसे इस वक्त एक ऐसे बड़े नेता की आवश्यकता है, जिसका चेहरा यूपी की जनता के बीच तो चर्चित रहा ही हो साथ ही वह जनता के बीच कांग्रेस को पुनर्जीवित करने की क्षमता भी रखता हो।

इन अपेक्षाओं के विपरीत स्थिति यह है कि पार्टी के अधिकतर पुराने कार्यकर्ता व पदाधिकारी आपसी सिर-फुटौव्वल के चलते कांग्रेस को अलविदा कह चुके हैं तो कुछ वरिष्ठों को पार्टी के भीतर चल रही राजनीति ने बाहर का रास्ता दिखा दिया। मौजूदा समय में भी स्थिति यह है कि जहां एक ओर यूपी के प्रमुख राजनीतिक दल आगामी लोकसभा चुनाव के मद्देनजर तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटे हैं, वहीं दूसरी ओर यूपी कांग्रेस में पार्टी पदाधिकारी से लेकर कार्यकर्ता तक आपस में ही एक-दूसरे को बाहर का रास्ता दिखाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं।

कार्यकर्ता और पदाधिकारी अपने ही लोगों की जड़ों में मट्ठा डालने के लिए दिल्ली में बैठे पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी तक के चक्कर लगा रहे हैं। रही बात प्रदेश अध्यक्ष राज बब्बर के हस्तक्षेप की तो उनकी गतिविधियां सिर्फ खानापूर्ति करती ही प्रतीत हो रही हैं। ऐसे समय में पार्टी के पदाधिकारी चाहते हैं कि राहुल गांधी के स्थान पर स्वयं सोनिया गांधी या फिर प्रियंका गांधी सीधे हस्तक्षेप करें तो बात बने, लेकिन यूपी में सिर फुटौव्वल की जानकारी के बावजूद उनका लापरवाह रवैया बताता है कि कांग्रेस हाई कमान के एजेण्डे में यूपी कांग्रेस कहीं पर नहीं है, या फिर कांग्रेस यह मान बैठी है कि यूपी से वह कुछ भी हासिल नहीं कर पायेगी।

प्रहारलाइव के प्रधान संपादक राकेश श्रीवास्‍तव की रिपोर्ट. राकेशजी राष्‍ट्रीय सहारा, स्‍वतंत्र भारत, नवभारत टाइम्‍स, सांध्‍य दैनिक डेटलाइन, साप्‍ताहिक न्‍यूज पेपर द संडे पोस्‍ट समेत कई संस्‍थानों में काम कर चुके हैं. संप्रत्ति दृष्‍टांत पत्रिका में कार्यकारी संपादक के पद पर कार्यरत हैं.