किसी को बेसबब शोहरत नहीं मिलती…

HERO

राज बहादुर सिंह

: संजीव कुमार के जन्म दिन पर स्मरण व नमन : जन्म हुआ तब किसी ने न सोचा होगा कि जिंदगी इतनी कम होगी और ऊंचाई इतनी ज्यादा। केवल 47 साल की जिंदगी और इससे ज्यादा तरह के रोल। मैं कोई इंतिहाई अथॉरिटी न सही लेकिन इतना कह सकता हूं कि बाहों में बाहों डाल कर नायिका के साथ गाने गाने वाले किसी बॉलीवुड के अभिनेता के अभिनय में इतनी विविधता नहीं देखी जो संजीव कुमार में देखने को मिली।

मैं जब टीन एज में था तभी संजीव कुमार को देखा। पहली फ़िल्म उलझन देखी लेकिन मुझे कोई उलझन नहीं हुई। जया भादुड़ी के साथ नौकर फ़िल्म देखी तो संजीव कुमार का एक और रूप देखा। फिर शोले देखी और ठाकुर के किरदार ने तो गजब ढा दिया। और फिर जितना संजीव कुमार को देखा उतना उलझता गया। इस महान कलाकार के महान आयामों को देख कर।

संजीव कुमार के टैलेंट को पहचाना था एक और बेहद टेलेंटेड शख्स ने जो किसी परिचय के मोहताज नहीं है। जी हां। बात के. आसिफ की हो रही है लेकिन क़ुदरत का करिश्मा कहें या कुदरत का कहर दोनों में कोई खास कारोबारी रिश्ता नहीं बन सका। वजह वही जो संजीव कुमार के साथ थी। के आसिफ साहब खुद पचासवां बसंत देखने के पहले इस फानी दुनिया से रुख्सत हो गए।

संजीव कुमार कुछ उन रेयर कलाकारों में थे, जिन्होंने किसी भी रोल के लिए मना नहीं किया। भरी जवानी में बुजुर्ग का रोल हो या नया दिन नई रात में नौ रोल जिसमें हिजड़े से लेकर कोढ़ी जैसे बेहद चैलेंजिंग रोल शामिल थे। खिलौना के उस डिस्टर्ब आशिक को कोई भूल सकता है क्या या फिर आंधी और मौसम के किरदार क्या कभी किसी के जेहन से उतर सकते हैं?

खास बात यह भी रही कि उन्होंने बहुत उम्दा दर्जे की कमेडी भी की। किसी को खट्टे न लगते हों तो अंगूर को कोई भूल सकता है क्या? और भी कई फिल्में हैं, जिनमें संजीव कुमार ने अपने इस हुनर को बखूबी जाहिर किया। और एक बात जिसके लिए मैं उनका कायल हूं वह यह कि उन्होंने कभी किसी भी बड़े से बड़े एक्टर की रेपुटेशन का रौब नहीं खाया।

अगर मैं संघर्ष के द्वारका और विधाता के अबू बाबा की दिलीप जैसे दिग्गज के सामने की बात करूं या अमिताभ बच्चन के सामने त्रिशूल के आर के गुप्ता की बात करूं, संजीव कुमार को कोई काबू में नहीं कर सका। सिवाय मौत के जिस पर किसी का काबू नहीं है। सिवाय खुद उसके और सिर्फ 47 साल की उम्र में यह अनमोल से भी ज्यादा अनमोल सितारा चला गया। अपना फन और अपने फैंस को छोड़कर। बहरहाल उनके जन्म दिन उन्हें याद करते हैं और परवरदिगार का शुक्रिया जिसने ऐसे नूर की रौशनी से हमें नवाजा।rbs

राज बहादुर सिंह उत्तर प्रदेश के जाने माने पत्रकार हैं. हिंदी-अंग्रेजी पर समान पकड़ रखते हैं. दैनिक जागरण समेत कई बड़े संस्थानों में वरिष्ठ पदों पर रहे हैं. सियासतफिल्म और खेल पर जबरदस्त पकड़ रखने वाले श्री सिंह फिलहाल पायनियर में वरिष्ठ पद पर कार्यरत हैं. उनका लिखा फेसबुक से साभार लेकर प्रकाशित किया गया है.