यादवजी को लाठी खाता छोड़ भाग निकले भाजयुमो के पदाधिकारी, देखें वीडियो  

अनिल सिंह

: सुभाष यदुवंश खाते रहे लाठी, पदाधिकारी जान बचाने छुप गए शौचालय में : पूरी टीम नहीं दिखाई पाई पुलिस से जूझने की क्षमता : लखनऊ। शायद यह राजनीतिक इतिहास की पहली घटना होगी कि किसी राजनैतिक दल की सरकार हो और उसके युवा नेता पुलिस के हाथों बुरी तरह पीटे जाएं। लखनऊ में मंगलवार को ऐसा ही हुआ। भारतीय जनता युवा मोर्चा के कार्यकर्ता बुरी तरह पीटे गए। अध्‍यक्ष पुलिस के हाथों धुना जा रहा था, उसके मोर्चा के पदाधिकारी अध्‍यक्ष को पिटता छोड़ अपनी जान बचाने को भाग खड़े हुए। कुल मिलाकर सुभाष यदुवंश के नेतृत्‍व में ठेकेदारों का भाजयुमो अपने पहले ही इम्तिहान में बुरी तरह फेल रहा।

सवाल यह भी उठ रहा है कि अपनी ही सरकार में ऐसी कौन सी बात हो गई कि भाजयुमो कार्यकर्ताओं को पुलिस से भिड़ना पड़ गया? क्‍या यह किसी सोची समझी योजना के तहत अंजाम दिया गया या फिर यह अतिरंजना का परिणाम था? आखिर क्‍यों कलानिधि नैथानी की पुलिस ने भारतीय जनता पार्टी की सरकार में भाजयुमो के कार्यकर्ताओं को कार्यालय तक दौड़ाकर पीटा? इस घटना के बाद भाजयुमो का असली टेस्‍ट भी हो गया कि एक भी कार्यकर्ता पुलिस से जूझने वाले टेम्‍परामेंट का नहीं निकला। साबित हो गया कि बिना संघर्ष से आए लोग कैसा आंदोलन कर सकते हैं?

दरअसल, भारतीय जनता युवा मोर्चा के कार्यकर्ता भाजपाई से कांग्रेसी हो चुके नवजोत सिंह सिद्धू के पाकिस्‍तान जाने से नाराज थे। उन्‍होंने सिद्धू का पुतला फूंकने का कार्यक्रम बनाया। बिना रूकावट पुलता फूंक भी दिया, फिर पता नहीं क्‍या योजना बनी यह टीम अपनी ही सरकार में सड़‍क जाम करने पर उतारू हो गई। पुलिस ने समझाने की कोशिश की तो दोनों तरफ से हुज्‍जत होने लगी। बात हाथापाई तक पहुंच गई। युवा मोर्चा की टीम जोश में आ गई। किसी ने चौकी इंचार्ज पर हाथ छोड़ दिया।

इसके बाद पुलिस जोश में आ गई और दे दनादन लाठियां भांजने लगी। कोचिंग और ठेकेदारी के धंधे से जुड़े भाजयुमो के पदाधिकारी पुलिस की लाठियां उठते ही सुरक्षित ठिकाना ढूंढने लगे। बिना संघर्ष किए यहां तक पहुंचने वाले पदाधिकारी अपनी जान बचाने के लिए सुरक्षित रास्‍ता खोजने लगे। कुछ तो जीपीओ के पास स्थित शौचालय तक में जान बचाने के लिए छुप गए। धंधेबाजी से जुड़े साथियों के भाग निकलने के बाद प्रदेश अध्‍यक्ष सुभाष यदुवंश एक साथी के साथ अकेले पड़ गए। खार खाए पुलिस वालों ने यादवजी को ठीक से रेल दिया।

बेचारे अध्‍यक्षजी और उनके साथी दोनों पुलिस की लाठियां खाकर बेचारगी से किनारे हो गए। अकेले पड़ गए अध्‍यक्षजी एक बार भी पुलिस से संघर्ष करने का मादा नहीं दिखा पाए। ठेकेदार और कोचिंग के धंधे वाली टीम उन्‍हें छोड़कर पहले ही भाग निकली थी। जिस टीम का अपनी सरकार में ऐसा हाल है, उसकी हालत दूसरे सरकार में कैसी होगी इसका बस अनुमान लगाया जा सकता है। अपने अध्‍यक्ष को अकेला छोड़कर जान बचाने के लिए भागने वाले कार्यकर्ता और पदाधिकारी अपनी पार्टी के लिए कितना संघर्ष करेंगे समझना मुश्किल नहीं है।

मुझे याद आता है कि सपा सरकार के शासनकाल में आंदोलन के दौरान आशुतोष राय के नेतृत्‍व में भाजयुमो कार्यकर्ता एकजुटता के साथ पुलिसवालों से भिड़ा करते थे। लाठियां खाते थे, लेकिन जूझते थे। सुभाष की टीम तो अपनी ही सरकार में पुलिस के सामने टिक नहीं पाई। आशुतोष के जमाने में योगेश सिंह, रूपाली रस्‍तोगी, सोनू सिंह, साकेत सिंह, राजेश सिंह सोनू, अभिजात मिश्रा, कुंवर सिंह निषाद, अनिल यादव जैसे तमाम युवा मोर्चा के कार्यकर्ता पुलिस वालों से डरकर भागते नहीं थे बल्कि लाठियां खाते थे। अपने अध्‍यक्ष को बचाने में खुद लाठियां खाते थे, लेकिन सुभाष की टीम तो ठीक इसके उलट निकली।