रसूखदार परिवार का बिगडैल लड़का बन गया बड़ा माफिया

: कोर्ट के फैसले के बाद एक बार फिर चर्चा में मुख्‍तार : लखनऊ। भाजपा विधायक कृष्‍णानंद राय समेत सात लोगों की हत्‍या में बरी हो जाने के बाद बसपा विधायक एवं माफिया डान मुख्‍तार अंसारी एक बार फिर चर्चा में हैं। मुख्‍तार पर हत्‍या, अपहरण,‍ फिरौती समेत 40 से ज्‍यादा गंभीर मामले तमाम थानों और जिलों में दर्ज हैं, लेकिन इस माफिया की छवि मऊ जिले में एक राबिनहुड नेता की है, जो अमीरों से लूटकर गरीबों की मदद करता है। इस छवि के चलते मुख्‍तार ने मोदी लहर में भी अपने खास अतुल राय ने घोसी से सांसद बनवा दिया।

पूर्वांचल में कभी मुख्‍तार अंसारी और बृजेश सिंह गैंग के बीच कोयला, जमीन, स्‍क्रैप, पीडब्ल्‍यूडी के ठेकों पर वर्चस्‍व और वसूली को लेकर गैंगवार होती थी, लेकिन अब दोनों गैंग गोलीबारी छोड़कर अपनी जुटाई गई अवैध कमाई के साम्राज्‍य को सहेजने और आगे बढ़ाने में लगे हुए हैं। दोनों परिवारों ने राजनीति में मजबूती से घुसपैठ कर ली है। पिछले एक दशक से छुटपुट घटनाओं को छोड़कर इन दोनों गैंग के बीच कोई बड़ा गैंगवार देखने को नहीं मिला है।

मुख्‍तार के पारिवारिक इतिहास पर नजर डालें तो उसकी छवि एक सांभ्रांत परिवार के बिगडैल लड़के की है, जो गलत संगत में पड़कर अपराध की दुनिया का बेताज बादशाह बन गया। पिछले 14 सालों से उत्‍तर प्रदेश और गुजरात की जेलों में बंद मुख्‍तार की दबंगई का आलम यह है कि वह सिंकचों के भीतर रहकर भी मऊ से विधानसभा का चुनाव लगातार जीतता आ रहा है। पांचवी बार विधायक चुने गये मुख्‍तार पहली बार 1996 में बसपा के टिकट पर मऊ से जीत हासिल की थी। इसके बाद पीछे मुड़कर नहीं देखा। दो बार निर्दल तथा एक बार अपने कौमी एकता दल से विधायक बने। इस बार बसपा से जीत हासिल की है।

मुख्‍तार पर कृष्‍णानंद राय की हत्‍या के अलावा विश्‍व हिंदू परिषद के कोषाध्‍यक्ष नंदलाल रुंगटा के अपहरण और हत्‍या का भी आरोप था, लेकिन मुख्‍तार को इस मामले में भी क्‍लीन चिट मिल चुकी है। मुख्‍तार अंसारी के अपराध और उसके परिवार का राजनीति में स्‍थापित होने के बीच कोई सीधा संबंध नहीं है। मुख्‍तार के दादा डाक्‍टर मुख्‍तार अहमद अंसारी स्‍वतंत्रता आंदोलन के दौरान 1926-27 में नेशनल कांग्रेस के अध्‍यक्ष रह चुके हैं तो उनके पिता सुब्‍हानउल्‍लाह अंसारी वामपंथ की राजनीति करते थे और 1971 में नगर पालिका के निर्विरोध अध्‍यक्ष चुने गये।

मुख्‍तार अंसारी का हत्‍या में पहली बार नाम वर्ष 1988 में आया, जबकि इनके बड़े भाई अफजाल अंसारी 1985 में ही सीपीआई के टिकटपर मोहम्‍मदाबाद से विधायक चुने जा चुके थे। मुख्‍तार के नाना महावीर चक्र विजेता एवं भारतीय सेना के बिग्रेडियर उस्‍मान हैं। मुख्‍तार के रिश्‍ते के चाचा हामिद अंसारी अलीगढ़ विवि के वीसी रहने के साथ देश के उपराष्‍ट्रपति भी रह चुके हैं।

दरअसल, मुख्‍तार साधु सिंह की गैंग में आने के बाद अपराध की दुनिया में तेजी से पांव बढ़ाये। साधु सिंह की हत्‍या के बाद मुख्‍तार गैंग सरगना बन गया, जिसमें उसे अपने भाई अफजाल अंसारी के राजनीतिक पकड़ का लाभ मिला। इसके बाद मुख्‍तार की नजर रेलवे और कोयला के धंधे पर पड़ी। अस्‍सी-नब्‍बे के दशक में चंदौली जिले का चंधासी कोयला मंडी एशिया का सबसे बड़ी मंडी हुआ करती थी, जहां प्रति दिन करोड़ों रुपये का गलत-सही कारोबार होता था। इसी कोयले के कारोबार पर कब्‍जा के लिये ब्रृजेश और मुख्‍तार गैंग कई बार आमने-सामने हुए, जिसमें वर्ष 2002 का उसरी चट्टी कांड भी शामिल है, जिसमें मुख्‍तार के तीन लोग मारे गये। साथ ही बृजेश के घायल होकर मारे जाने की खबर फैल गई।

रेलवे के करोड़ों में बिकने वाले स्‍क्रैप तथा लोक निर्माण विभाग के ठेकों को लेकर भी कई बार पूर्वांचल समेत लखनऊ में दोनों गैंगों की तरफ से गोलियां गूंजी। इसके बाद ब्रिजेश के खास एवं भाजपा विधायक कृष्‍णानंद राय की 2007 में हुई हत्‍या में मुख्‍तार और मुन्‍ना बजरंगी समेत कई लोगों का नाम आया। 2008 में ब्रिजेश सिंह की गिरफ्तारी के बाद इन दोनों माफिया गिरोहों के बीच छिटपुट गोलीबारी को छोड़कर कोई बड़ा गैंगवार नहीं हुआ है।