क्‍यों अपनी ही पार्टी के मंत्रियों के खिलाफ पत्र लिखने लगे भाजपाई?

भाजपा

अनिल सिंह

ईमानदार योगी सरकार के भ्रष्‍ट मंत्री अपनी दागदार छवि से सीएम को भी नुकसान पहुंचा रहे हैं। अब तक चुनिंदा मंत्रियों की दबे-छुपे भ्रष्‍टाचार के आरोप तो बाहर आते ही रहते थे, लेकिन अब इनके खिलाफ पार्टी के ही सांसद विधायक मुखर होने लगे हैं। वह पत्र लिखकर खुलेआम भ्रष्‍टाचार का इजहार कर रहे हैं तो इसकी गंभीरता को समझा जा सकता है। अब देखना है कि लगातार भ्रष्‍टाचार के आरोपों से सराबोर हो रहे मंत्रियों के खिलाफ भाजपा कोई कार्रवाई करती है या फिर उन्‍हें लूटने की छूट यूं ही मिली रहती है?

बजबजाता मंत्रियों का भ्रष्‍टाचार

लखनऊ : भारतीय जनता पार्टी के मंत्रियों के भ्रष्‍टाचार से आहत अब पार्टी के ही जिम्‍मेदार पदाधिकारी मुखर होने लगे हैं। घोषी से भाजपा सांसद हरिनारायण राजभर ने अनुपमा जायसवाल पर भ्रष्‍टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं तो दूसरी तरफ आगरा से भाजपा विधायक जगन प्रसाद गर्ग ने आगरा के मेयर नवीन जैन पर भ्रष्‍टाचार का आरोप लगाया है। खास बात यह है कि अनुपमा जायसवाल और नवीन जैन संगठन मंत्री सुनील बंसल के खासमखास माने जाते हैं।

दरअसल, योगी आदित्‍यनाथ के नेतृत्‍व में सरकार बनने के बाद ईमानदारी की आस जगी थी, लेकिन पार्टी हाईकमान के चहते सुनील बंसल की चलने से संगठन और सरकार में ऐसे लोगों की भरमार हो गई, जिन्‍हें जनता के कामों से नहीं बल्कि पैसे से मतलब है। साल भर तक दबाव में रहे पार्टी के जनप्रतिनिधि अपने ही सरकार में काम ठीक ना होने से मुखर होने लगे हैं। बजबजाती गंदगी अब पत्रों के माध्‍यम से बाहर आने लगी है। सहयोगी दल के नेता ओम प्रकाश राजभर तो पहले से ही आरोप लगाते रहे हैं, लेकिन पार्टी के भीतर से आरोप लगने से सरकार का मुंह खट्टा हो गया है। सब तरफ यही सवाल है कि जब भ्रष्‍ट टीम मिली है तो अकेला मुख्‍यमंत्री क्‍या कर लेगा?

खैर, आते हैं मुद्दे पर। घोषी से भाजपा सांसद हरिनारायण राजभर ने मुख्‍यमंत्री को पत्र लिखकर बेसिक शिक्षा एवं पुष्‍टाहार जैसे महत्‍वपूर्ण विभाग देख रहीं अनुपमा जायसवाल पर गंभीर आरोप थोपे हैं। अपने पत्र में श्री राजभर ने लिखा है कि बेसिक शिक्षा विभाग की मंत्री और विभागीय अधिकारी बाल विकास और पुष्टाहार के नाम पर जमकर घोटाला कर रहे हैं। टेंडर जारी करने में भारी अनियमितता बरती जा रही है। टेंडर के जरिए अनियमित तरीके से अपने कुछ विशेष लोगों को लाभ पहुंचाया जा रहा है। बेसिक शिक्षा विभाग में भी ऐसा ही खेल चल रहा है।

सांसद ने आरोप लगाया है कि उनके अपने मऊ जिले में जांच करने पर पता चला है कि पिछले 10 महीने से बाल विकास और पुष्टाहार द्वारा दी जाने वाली पौष्टिक आहार की सप्लाई नहीं की जा रही है, जबकि सुप्रीम कोर्ट का यह निर्देश है कि एक भी दिन पुष्‍टाहार की आपूर्ति नहीं रूकनी चाहिए। उनका यह भी आरोप है कि छात्रों को दिए जाने वाले जूता और मोजा टेंडर में भी भारी अनियमितताएं बरती गई हैं। इसमें ज्‍यादातर मंत्री की करीबी हैं। दरअसल, लंबे समय से यह आरोप लगता आ रहा है कि बेसिक शिक्षा विभाग और बाल विकास सेवा एवं पुष्‍टाहार में भ्रष्‍टाचार का बोलबाला है।

अनुपमा जायसवाल के हाथ में नियंत्रण आने के बाद से इनमें और बढ़ोतरी हो गई है। मंत्री के अपने लोगों को लाभ पहुंचाया जा रहा है। टेंडर प्रक्रिया में अनदेखी कर कमीशन देने वालों को लाभ पहुंचाया जा रहा है, जिससे सरकार की छवि खराब हो रही है। वहीं दूसरी तरफ सांसद हरिनारायण राजभर ने कहा कि इन दोनों विभागों में भले काम नहीं हो रहा हो, लेकिन योगी आदित्‍यनाथ की सरकार ईमानदारी से बेहतर काम कर रही है।

दरअसल, योगी सरकार में सबसे बड़े भ्रष्‍ट विभाग के रूप में बेसिक शिक्षा विभाग की पहचान बनती जा रही है। इसके पहले भी स्‍वतंत्र प्रभार मंत्री अनुपमा जायसवाल शासन से महीनों पहले मंजूरी मिलने के बावजूद समय से स्‍वेटर वितरण नहीं करवा पाई थीं, जिससे योगी सरकार की जमकर किरकिरी हुई थी। आरोप लगा था कि कमीशन सेट नहीं हो पाने के चलते टेंडर नहीं हो पाए थे। इस बार पुस्‍तकों का वितरण भी तय समय से नहीं हो पाया।

उल्‍लेखनीय है कि पिछले सत्र में भी इस विभाग पर 300 करोड़ रुपए का घोटाले का आरोप कक्षा एक से लेकर आठ तक की पुस्‍तकों की छपाई में लग चुका है। पिछले सत्र में यूपी बेसिक एजुकेशनल प्रिंटर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष शैलेंद्र जैन और उपाध्यक्ष विवेक बंसल ने आरोप लगाया था कि एक खास कंपनी को लाभ पहुंचाने के लिए पुराने नियमों को बदल दिया गया।

इन्‍होंने आरोप लगाया था कि शिक्षा सत्र 2017-18 में पिछले 15 वर्षों से चली आ रही व्यवस्था खत्‍म करके बेसिक शिक्षा विभाग ने अपने चहेती कंपनी को कॉपी-किताबों की आपूर्ति का ठेका दे दिया गया। खास बात यह है कि बेसिक शिक्षा निदेशक सर्वेंद्र विक्रम सिंह ने जिस प्रकाशक कंपनी की गड़बड़ी को देखते हुए शासन को पत्र लिखकर ठेका ना देने की सिफारिश की थी, नई सरकार की मंत्री अनुपमा जायसवाल ने उसी को ठेका दे दिया था।

इधर, दूसरी तरफ आगरा भी पार्टी की आपसी घमासान का मैदान बन गया है। भाजपा विधायक जगन प्रसाद गर्ग ने अपनी ही पार्टी के मेयर पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्‍होंने तो मुख्‍यमंत्री की बजाय राज्‍यपाल से भ्रष्‍टाचार की शिकायत की है। श्री गर्ग ने राज्‍यपाल को भेजे गए पत्र में लिखा है कि जो कमीशन 15 प्रतिशत था, नए मेयर के आने के बाद से बढ़कर 27 प्रतिशत हो गया है। श्री गर्ग ने बाकयदा इसके लिए अधिकारियों के कमीशन का प्रतिशत भी लिखा है।

विधायक ने आरोप लगाया है कि नगर निगम आगरा में 2014 से व्‍याप्‍त भ्रष्‍टाचार की शिकायत कर रहे हैं, तब कमीशन 15 प्रतिशत था, जो अब बढ़कर 27 फीसदी तक पहुंच गया है। विधायक ने निगम अफसरों पर राजनीति करने का आरोप भी लगाते हुए कहा कि नगर आयुक्‍त पार्षदों को उनके खिलाफ भड़का रहे हैं। इसकी शिकायत मुख्यमंत्री, राज्यपाल, नगर विकास मंत्री और प्रभारी मंत्री से करेंगे।

दूसरी तरफ सुनील बंसल से नजदीकी रखने वाला मेयर नवीन जैन का खेमा भी रणनीति बनाने में जुटा है। आरोपों से हलकान यह खेमा फिलहाल चुप्‍पी साध रखी है, लेकिन प्रदेश के सबसे ज्‍यादा धनवान नवीन जैन की हनक का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कई नेशनल हाइवे के टोल प्‍लाजा पर उनके पारिवारिक कंपनी की वसूली का ठेका है।

दरअसल, भाजपा सरकार से जिस ईमानदारी की अपेक्षा की गई थी, और कार्यकर्ता जिस ईमानदार सरकार की अपेक्षा कर रहे थे, साल भर बाद ही उनकी उम्‍मीदें धूल-धूसरित होने लगी हैं। मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ अपनी सरकार से ईमानदारी की अपेक्षा कर रहे हैं तो दूसरी तरफ संगठन मंत्री सुनील बंसल से नजदीकी रखने वाले मंत्री, संगठन पदाधिकारी दोनों हाथों से पैसा दूहने में जुटे हुए हैं। पैसा चाहे जिधर से आए आना चाहिए।

दिक्‍कत इस बात की है कि सब कुछ मुख्‍यमंत्री के हाथ में नहीं है। शीर्ष नेतृत्‍व ने उनके हाथ बांध रखे हैं, लिहाजा वह कोई ऐसी कार्रवाई भी नहीं  कर सकते, जिससे भ्रष्‍ट मंत्रियों को कोई सबक मिले। अब जिस तरीके से अपने लोग ही मंत्रियों और जनप्रतिनिधियों के खिलाफ मुखर होने लगे हैं, उसकी धमक 2019 में और तेज हो सकती है।