भाजपा सरकार की जनविरोधी नीति से हर तबका परेशान : राम किशुन

  • जनपद में भ्रमण कर किसानों को जागरूक कर रहे हैं पूर्व सपा सांसद

चंदौली। केंद्र सरकार द्वारा बनाई गई नई किसान नीति के विरोध के लिए जिले के किसान अब एकजुट होने लगे हैं। सपा नेता एवं पूर्व सांसद राम किशुन की मेहनत अब रंग लाने लगी है। पूर्व सांसद लगातार किसानों से मिलकर केंद्र सरकार के किसान विरोधी नी‍ति की पोल खोल रहे हैं। किसान पृष्‍ठभूमि से आने वाले सांसद किसानों की बीच लगातार सक्रिय हैं।

इसी क्रम में मुगलसराय (दीनदयालनगर) स्थित सपा कार्यालय में जनपद के दर्जनों किसानों ने इसके लिए पूर्व सांसद रामकिशुन के नेतृत्व में आंदोलन चलाने की रणनीति बनाई। साथ ही संघर्ष को जारी रखने का संकल्प तथा किसानों को इस बिल के नुकसान के बारे में बताने का निर्णय लिया।

पूर्व सांसद ने कहा कि एक तरफ सरकार किसानों के हित की बात करती है तो वहीं दूसरी ओर उनके खिलाफ काला कानून भी बनाती है। जब से भाजपा की सरकार केंद्र व प्रदेश में बनी है, तब से समाज का हर वर्ग पूरी तरह से परेशान है। नया कानून बनाकर सरकार कुछ मुट्ठी भर लोगों को फायदा पहुंचाना चाहती है।

रामकिशुन ने कहा कि नए कानून के लागू हो जाने से देश की कृषि व्यवस्था पूरी तरह से चौपट हो जाएगी। किसान अपनी ही जमीन पर बंधुआ हो जायेगा। किसी भी मुश्किल मौके पर देश की अर्थव्‍यवस्‍था को रीढ़ बनकर संभालने वाली कृषि चौपट हो जायेगी। किसान व उस पर आश्रित लोग भूखमरी का दंश झेलेंगे।

बुद्धिजीवियों को संबोधित करते पूर्व सांसद राम किशुन

उन्‍होंने कहा कि सरकार को ऐसा कानून बनाना चाहिए, जिसमें न्यूनतम समर्थन मूल्य अनिवार्य रूप से लागू हो, ताकि कोई भी किसान समर्थन मूल्य से नीचे अपनी उपज की बिक्री करने को मजबूर ना हो। मंडी पर निर्भरता कम करने के बावजूद मंडियों का अस्तित्‍व जारी रखा जाये ताकि किसानों को बिक्री का विकल्‍प मिले।

पूर्व सांसद ने कहा कि भाजपा सरकार की इस नीति से एक दो साल दिखावे के लिये भले  ही लाभ दिये जाये, लेकिन सरकार के नियंत्रण वाली मंडियों के खत्‍म होने के बाद बड़े बिजनेस घरानों की मोनोपोली हो जायेगी, जिसके चलते वह किसानों को मजबूर करके कम दाम पर अनाज खरीदेंगे। बाजार में प्रतिस्‍पर्धा नहीं रहने से किसानों को नुकसान होगा।

उन्‍होंने कहा कि भाजपा सरकार की नीतियां किसान, गरीब, मजदूर,  नौजवान, बेरोजगार, छात्र आदि वर्ग के खिलाफ है। श्रम कानून में संशोधन करके सरकार जिन इकाइयों में तीन सौ या उससे अधिक मजदूर कार्य करेंगे, उसे मान्यता देगी। उससे कम मजदूर संख्या होने पर श्रम कानून उन इकाइयों पर लागू नहीं होगा, जिसका सीधा फायदा पूंजीपतियों को होगा।

कहा कि सरकार के इन काले एवं जनता विरोधी कानूनों के खिलाफ सभी राजनीतिक दलों को दलगत भावना से ऊपर उठकर विचार विमर्श करना चाहिए, ताकि देश का मजदूर, किसान, नौजवान किसी भी तरह की समस्या से ग्रसित न हो। इस कानून के लागू हो जाने से पशुपालन पर भी बुरा प्रभाव पड़ेगा, क्योंकि जो उद्योगपति खेती कराएगा। वह पशुओँ के लिए चारा नहीं छोड़ेगा। ऐसी स्थिति में देश का पशुपालन भी चौपट होगा।

इस मौके पर रामचंद्र पांडेय, बनवारी यादव, अंबिका सिंह, रविंद्र सिंह, नागेंद्र सिंह, रामआसरे मौर्य, जयनाथ सिंह, रामबचन सिंह, राजनाथ सिंह, गिरिजा सिंह, पवन मिश्रा, विनय मिश्रा, नन्दलाल मिश्रा, सुदर्शन पटेल, राणा पटेल, मार्कण्डेय बिंद, रामनारायण यादव, मुन्ना यादव आदि किसान मौजूद रहे।