चंदौली में तैनात सिपाही ने एसपी,सीओ सदर व पूर्व कोतवाल मुगलसराय पर जान मरवाने की शंका का लगाया गंभीर आरोप,डीजीपी को लिखा पत्र हो रहा वायरल

चंदौली एसपी,सीओ सदर व पूर्व कोतवाल पर जान मरवाने की शंका संबंधित एक सिपाही का पत्र हो रहा वायरल : चंदौली : गत दिनों जनपद के मुगलसराय कोतवाल के अवैध वसूली की लिस्ट सौमित्र मुखर्जी नामक एक कांस्टेबल द्वारा वायरल करने के मामले में हुई विजिलेंस जांच में लिस्ट वायरल करने वालों की सूची में आये चंदौली में तैनात अनिल सिंह नामक हेड कांस्टेबल के नाम का एक पत्र सोशल मीडिया में फिर वायरल हुआ है। जिसमें उक्त हेड कॉन्स्टेबल द्वारा चंदौली के एसपी,सीओ सदर व पूर्व कोतवाल शिवानंद मिश्रा पर जान से मारने व फर्जी मुकदमें में फंसाने की बात लिखकर डीजीपी से न्याय की गुहार लगाई गयी है।

जिसकी प्रतिलिपि मुख्यमंत्री, मानवाधिकार आयोग,एडीजीपी को भी भेजी गई है। जिसमें अंकित किया गया है कि पुलिस अधीक्षक हेमंत कुटियाल, सदर क्षेत्राधिकारी कुंवर प्रभात सिंह तथा इंस्पेक्टर शिवानंद मिश्रा द्वारा फर्जी मुकदमे में फंसाने तथा जान से मारने व परिवार के साथ किसी प्रकार की घटना घटाने का चक्रव्यू रचा जा सकता है।

पत्र में यह भी लिखा है कि लाइन हाजिर होने के बाद शिवानंद मिश्रा को प्रशासनिक आधार पर ईओडब्ल्यू लखनऊ ट्रांसफर किया जा चुका है। जिससे वसूली का सारा मामला सही पाया गया। इस मामले में पुलिस अधीक्षक चंदौली भी दोषी पाए जा रहे हैं।

इसलिए एसपी द्वारा खिन्न होकर पूर्व में की गई कार्यवाही के अंतर्गत 14 (1) की कार्यवाही की जा रही है। जिसमें वह मुझे दोषी ठहराकर बर्खास्त कराना चाहते हैं।

मुझे यह भी आशंका है कि एसपी व सीओ कुंवर प्रभात सिंह तथा इंस्पेक्टर शिवानंद मिश्रा द्वारा जान से मरवाने झूठे मुकदमे में फंसाने की साजिश की जा सकती है। उसमें लिखा है कि प्रार्थी वाराणसी में अपने बच्चों से मिलने ज्यादा आता रहता है।

इसलिए एक्सीडेंट भी करवाए जाने की आशंका है। यह भी कहा गया है कि मेरे या मेरे परिवार में किसी प्रकार की घटना होती है या फर्जी मुकदमे में फंसाया जाता है तो पूर्ण रूप से जिम्मेदार एसपी चंदौली, क्षेत्राधिकारी कुंवर प्रभात सिंह तथा इंस्पेक्टर शिवानंद मिश्रा होंगे।

हालांकि वायरल हुये आवेदन पत्र के बारे में अभी यह स्पष्ट नहीं है कि यह आवेदन पत्र उसी सिपाही ने लिखा है। फिलहाल यह जांच का विषय है। और अगर यह मान लिया जाये कि यह पत्र उसी सिपाही का है तो यह एक गंभीर आरोप है जिसकी उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिये।