योगी आदित्‍यनाथ को आखिर क्‍यों पहननी चाहिए टोपी?  

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: मुख्‍यमंत्री ने मगहर में टोपी पहनने से किया इनकार : लखनऊ : संत कबीरनगर के मगहर में बुधवार को कबीर की मजार पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने टोपी पहनने से इनकार कर दिया तो अचानक धर्मनिरपेक्षता पर सवाल खड़ा किया जाने लगा है। मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आगमन से पहले कबीर की मजार पर तैयारियों का जायजा लेने पहुंचे थे। मजार के संरक्षक ने योगी से बिना पूछे टोपी पहनाने की कोशिश की, लेकिन मुख्‍यमंत्री ने साफ इनकार कर दिया।

दरअसल, संत कबीर की मजार पर पहुंचे योगी आदित्‍यनाथ को टोपी पहनने के लिए दी गई तो उन्होंने इसे पहनने से साफ इनकार कर दिया। इसके बाद उनसे टोपी हाथ में पकड़ने का आग्रह किया गया तो उन्‍होंने टोपी को हाथ में पकड़ लिया। इस घटना के बाद तथाकथित धर्मनिरपेक्ष दल के नुमाइंदे मुस्लिम वोटों की खेती करने के लिए इस पर सियासत शुरू कर दी है।

तथाकथित धर्मनिरपेक्ष पार्टी समाजवादी पार्टी तथा कांग्रेस ने योगी पर हमला किया। सपा के नेता सुनील साज ने कहा कि योगी को सभी टोपियां एक जैसी लगती हैं। पाखंड में फंसे लोगों को कबीरधाम नहीं जाना चाहिए। कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी ने कहा कि किसी को जबरदस्‍ती टोपी नहीं पहनाई जानी चाहिए। पहले मोदी और अब योगी ने टोपी पहनने से मना किया है।

टोपी को लेकर गरमाई सियासत पर सरकार के मंत्री मोहसिन रजा ने कहा कि मैं खुद मुसलमान हूं, लेकिन टोपी नहीं पहनता हूं। जो लोग बार-बार ऐसे मौकों पर टोपी पहनाने की कोशिश करते हैं, उन्‍हें अपनी सोच में बदलाव लाना चाहिए। मुस्लिम धर्मगुरु खालिद रशीद फिरंगी ने भी कहा कि दूसरे के धर्म का सम्‍मान करते हुए इस तरह टोपी नहीं पहनानी चाहिए।

वरिष्‍ठ पत्रकार मनोज सामना ने इस विवाद के संदर्भ में कहा कि क्‍या किसी मुस्लिम नेता को जबरदस्‍ती तिलक और टीका लगाया जा सकता है? अगर सपा और कांग्रेस के मुस्लिम नेता ति‍लक-टीका लगावाने को तैयार हैं तो फिर योगी का टोपी लेने से इनकार करना धर्मनिरपेक्षता का अपमान है? लेकिन अगर मुस्लिम नेता अपने धर्म का आदर करते हुए तिलक-टीका नहीं लगवाता है तो योगी को भी टोपी नहीं पहनने का पूरा अधिकार है।

मनोज ने कहा कि कुछ सपा-कांग्रेस जैसे तथाकथित धर्मनिरपेक्ष दल वोटों की राजनीति के लिए एकतरफा बयानबाजी करके सामाजिक समरसता खत्‍म करने का कुचक्र रचते रहते हैं। सभी धर्मों का सम्‍मान किया जाना चाहिए। अगर एक मुस्लिम नेता अपने धर्म के खिलाफ जाकर जनेऊ नहीं पहन सकता है तो एक हिंदू नेता को भी ऐसा करने का पूरा अधिकार है। इस पर सियासत नहीं की जानी चाहिए।