उपेक्षा से नाराज पिछड़ी-दलित जातियां बना रहीं भाजपा से दूरी

भाजपा

मनोज श्रीवास्तव

: अपनी उपेक्षा से नाराज है भाजपा का दलित-पिछड़ा कार्यकर्ता : लखनऊ। लोकसभा चुनाव 2019 का बिगुल बजने से पूर्व ही यूपी में भाजपा का जातीय वोट बैंक दरकता दिख रहा है। प्रदेश सरकार के मंत्री जय प्रकाश निषाद और साध्वी निरंजन ज्योति के रहने के बावजूद निषाद समाज को भाजपा के पक्ष में लामबंद ना कर पाने के कारण पार्टी को गोरखपुर उपचुनाव में पराजय का सामना करना पड़ा। उपचुनाव के ठीक पहले ही बांसगांव के दलित सांसद कमलेश पासवान पर मुख्‍यमंत्री के गृह जनपद गोरखपुर में जमीन कब्जाने का आरोप लगा था।

इस बीच गोरखपुर मेडिकल कॉलेज मामले में ऑक्सीजन की कमी से हुई मासूम बच्चों की मौत के मामले में जेल से जमानत पर छूट कर आये डॉ. कफील के भाई पर हुई फायरिंग के आरोप में कमलेश पासवान का नाम उछला है। कमलेश पासवान के भाई विमलेश पासवान गोरखपुर की बांसगांव विधानसभा सीट से विधायक हैं। सरकार में अपनी जाति के क्षत्रप की घेरेबंदी करने से नाराज आधे पूर्वांचल में दलितों में धाकड़ मानी जानी वाली पासी जाति के लोग भाजपा से रूठे तो तराई समेत पूरे पूर्वांचल में पार्टी को नुकसान हो सकता है।

पिछड़ों में यादवों के बाद मजबूत स्थित रखने वाली कुर्मी जाति की उपेक्षा भी भाजपा को भारी पड़ सकता है। केंद्र में भाजपा के नेतृत्व की जब से सरकार बनी तब से अपना दल की अनुप्रिया पटेल को स्थापित करने के हठ में भाजपा दिग्‍गज अपनी पार्टी के कुर्मी नेताओं को खोदकर जमीन में गाड़ने को उतावले हैं। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष ओम प्रकाश सिंह और बाबरी गुम्बदों को जमींदोज करने वाले पूर्व सांसद विनय कटियार को जबरन रिटायर कर दिया गया। यूपी सरकार में शामिल ओम प्रकाश राजभर सरकार में रह कर भाजपा को पानी पिला रहे हैं, लेकिन उनके खिलाफ कोई संदेशात्‍मक कार्रवाई अब तक नहीं हुई। ना तो पार्टी अपने किसी राजभर नेता को ताकत दे रही है। पूर्वी उत्तर प्रदेश के अलावा पश्चिमी बिहार में राजभरों की स्थित काफी मजबूत है।

ऐसे में लोकसभा चुनाव के पूर्व पिछड़ी जातियों की बनती दूरी 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा की नैया डूबा सकती है। सरकार और संगठन में भी इन जातियों को वह तवज्जो नहीं है, जो अगड़ी जातियों को पार्टी में मिलती है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ठाकुर, विधानसभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित ब्राह्मण, एक उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा ब्राह्मण, प्रदेश संगठन के मुखिया डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय ब्राह्मण  वर्ग से हैं। एकमात्र पिछड़े उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य हैं।

संदर्भ में वरिष्ठ पत्रकार डॉ. विपिन पांडेय ने कहा कि सामाजिक समीकरण की अनदेखी भाजपा सरकार के ताबूत में अंतिम कील साबित होगी। भाजपा ने सरकार और संगठन में अति दलितों और अति पिछड़ों को उपेक्षित कर लॉलीपॉप चुसा रही है, जबकि इस वर्ग ने लोकसभा चुनाव और विधानसभा चुनाव में खुलकर भाजपा के पक्ष मतदान किया था। अगर चुनाव तक स्थिति यही बनी रही तो भाजपा को चालीस सीटें लाना भी मुश्किल हो जाएगा।manoj

वरिष्‍ठ पत्रकार मनोज श्रीवास्‍तव की रिपोर्ट.