देव दीपावली : ढपोरशंखी साबित हुये प्रशासन के दावे 

हरेंद्र शुक्‍ला

: जनता के जतन से उत्सव छुयेगा भव्यता का शीर्ष : वाराणसी। जनभावनाओं को लेकर प्रशासन कितना गंभीर और कितना संवेदनशील है, इसे दरवाजे पर खड़े देव दीपावली उत्सव की तैयारियों ने यह साबित कर दिया। बीते एक पखवाड़े से प्रशासन ढपोरशंख बजा रहा है कि देव दीपावली के पूर्व काशी के 84 घाटों को पूरी तरह साफ कर दिया जायेगा, लेकिन हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है।

घाटों की बात तो छोडि़ए जिस अस्सी घाट से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पूरे देश के लिए स्वच्छता अभियान का शुभारंभ करके एक नई पहचान दी थी, वहां भी देव दीपावली उत्सव के पूर्व संध्या तक जमा बाढ़ की मिट्टी प्रशासन की दावों की धज्जियां उड़ा रही है। ऐसा पहली बार हुआ है कि देव दीपावली जैसे पर्व की दस्तक के बाद भी घाट पूरी तरह साफ नहीं है। सबसे हास्यास्पद तो यह है कि घाटों की साफ-सफाई को लेकर प्रदेश के राज्यमंत्री नीलकंठ तिवारी के निर्देशों को भी प्रशासन ने अंगूठा दिखा दिया।

जनता के जतन से उत्सव निश्चित ही भव्यता के शीर्ष तक पहुंचेगा किन्तु दशहरा, दीपावली जैसे त्योहारों की इंतजाम में विफल प्रशासन की थोथी बयानबाजी एक बार फिर उजागर हो गई। प्रशासन ने इस अवसर पर दीया-बाती की सहभागिता को लेकर 20 लाख दीये उपलब्ध कराने की शेखी बघारी थी, लेकिन यहां भी मामला ठनठन गोपाल है। कौन किसको दीया बांट रहा है कुछ पता नहीं है?

बनारस से वरिष्‍ठ पत्रकार हरेंद्र शुक्‍ला की रिपोर्ट.