डीएवीपी नीति के खिलाफ अब अदालत का दरवाजा खटखटायेंगे अखबारकर्मी

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लखनऊ। डीएवीपी (DAVP) द्वारा लगातार मनमाने तरीके से थोपे जा रहे नियमों व अखबारी कागज पर लगे जीएसटी के खिलाफ अब अखबारकर्मी अदालत का दरवाजा खटखटायेंगे। सोमवार को प्रेस क्लब में आयोजित बैठक में यह भी निर्णय हुआ कि इस मुद्दे को लेकर देशव्यापी आंदोलन छेड़ा जाएगा ताकि देश भर में 60 से 70 लाख लोगों को बेरोजगार होने से बचाया जा सके।

इस बैठक में अखबार के संपादक और प्रकाशकों के साथ ही पत्रकारों ने बड़ी संख्या में हिस्सा लेकर डीएवीपी (DAVP) नीति के खिलाफ मुखर तरीके से आवाज उठाई। मीटिंग में सर्वसम्मत से तय किया गया कि DAVP की विज्ञापन नीति 2016 के अनुसार चिन्हित एजेंसियों से न्यूज़ लेने को बाध्य करना तथा अखबारों पर अंकुश लगाने के लिए तरह तरह के नियम थोपना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रतता पर सीधा हमला है। इसके खिलाफ हमें कोर्ट जाना चाहिए। यह भी निर्णय हुआ कि इस अभियान में देश भर के पत्रकारों को जोड़ा जाना चाहिये। पत्रकारों से सम्पर्क करने की जिम्मेदारी वरिष्ठ पत्रकार मनोज मिश्र को सौंपी गई।

इससे पूर्व वरिष्ठ पत्रकार नीरज श्रीवास्तव ने जीएसटी के विरोध से लेकर अखबार को संकट से उबारने के लिए पत्रकारों द्वारा अब तक किये गये प्रयासों के बारे में विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया। डीएवीपी (DAVP) की नीतियों व जीएसटी को लेकर कानूनी लड़ाई लड़ने पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि इसके लिए अब हम सबको निर्णायक संघर्ष के लिए तैयार रहना चाहिये। उन्होंने कहा पूरे देश में 70 से 80 लाख लोग सड़क पर आने जा रहे हैं, यह बहुत बड़ा मुद्दा है कोई सरकार यह नहीं चाहेगी कि 80 लाख लोग सड़क पर आकर धरना-प्रदर्शन नारेबाजी करें।

कानूनी लड़ाई व देशव्यापी आंदोलन छेड़ने में लगने वाले फण्ड को एकत्रित करने की जिम्मेदारी वरिष्ठ पत्रकार राजेन्द्र गौतम व राजेश जायसवाल को सौंपी गई। इस मौके पर राजेन्द्र गौतम ने कहा कि डीएवीपी (DAVP) छोटे अखबारों को खत्म करना चाहती है, उसकी नीतियां बड़े पूंजीपति अखबारों को सब कुछ देने की है। हमें कोर्ट जाना चाहिए। हम सारे प्रयास करने के साथ कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाएंगे। वरिष्ठ पत्रकार मनोज मिश्र ने जानकारी दी कि इलाहाबाद व लखनऊ के वरिष्ठ वकीलों से सम्पर्क किया जा रहा है।

बैठक को सम्बोधित करते हुए उत्तर प्रदेश राज्य मुख्यालय मान्यता प्राप्त संवादाता समिति के सचिव शिवशरण सिंह ने बताया कि अखबारों को बचाने के संबंध में उनकी प्रथम चरण की वार्ता प्रदेश सरकार से हो चुकी है। फिलहाल हमें डीएवीपी (DAVP) की पॉलिसी का पुरजोर विरोध करना चाहिए। प्रेस काउंसिल के सदस्य रजा रिजवी का कहना था यह बहुत बड़ा मामला है 31दिसंबर 2018 हमारे लिए वह काला दिन होगा जब सारे लघु-मध्यम अखबार बंद हो जाएंगे। यही नहीं 2016 और 2017 के जो विज्ञापन मिले हैं एजेंसी से वह पेमेंट अभी तक हम लोगों को नहीं मिला है।

उन्‍होंने कहा कि अखबार वाले अपना बैलेंस पेमेंट की डिटेल प्रेस काउंसिल को दें हम प्रयास करेंगे कि 2 महीने के अंदर बकाया भुगतान किया जाए। नावेद शिकोह ने कहा डीएवीपी (DAVP) ने जो नंबर सिस्टम बनाया उससे भ्रष्टाचार बढ़ रहा है अपनी वसूली बढ़ाने के लिए उसके अधिकारी ऐजेंटों के माध्यम से दबाव बना रहे हैं। आलोक त्रिपाठी का कहना था कि आंदोलन जैसा होना चाहिए ऐसा नहीं हुआ यह सिर्फ लखनऊ अथवा यूपी का आंदोलन नहीं है। हम आर-पार की लड़ाई लड़ेंगे।

बैठक में विनेश ठाकुर, मोहम्मद ताहिर, राजेश कुमार गुप्ता, अमिताभ नीलम, राजेश जायसवाल, सुमित अवस्थी, अजय कुमार,विवेक श्रीवास्तव, शीबू निगम, आफताब रिजवी, हरेंद्र सिंह, संदीप खेर, सैयद अख्तर अली, शादाब अहमद, नवाब सिद्दीकी, भूपेंद्र उपाध्याय, अशोक यादव, अनिल कुमार सिंह, अरुण कुमार श्रीवास्तव, नज़म अहसन, शेखर पंडित, शकील रिजवी, इफ्तिदा भट्टी, नरेश दीक्षित, रामानंद शास्त्री, अनुज कुमार सिंह, एस के तिवारी, अर्जुन द्विवेदी, हेमंत कृष्णा, अरशद, और शिकोह आज़ाद ने भी अपने विचार रखे।

इस मौके पर संघ के वरिष्ठ प्रचारक स्वामी मुरारी दास ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि नौकरशाही की तानाशाही रवैये के खिलाफ हमें अपनी आवाज बुलंद करनी होगी। इस अभियान में हम आपके साथ हैं। बैठक में सर्वसम्मति से फैसला लिया गया कि प्रत्येक सप्ताह शनिवार को प्रेस क्लब में 3ः00 बजे बैठक होगी जिसमें समस्त अखबारों के प्रतिनिधि शिरकत करेंगे।