धार्मिक ध्रुवीकरण पर पहुंचा यूपी का उपचुनाव!

मनोज श्रीवास्तव

कैराना। कर्नाटक में भाजपा की सरकार बनाने का सपना टूटने के बाद उत्तर प्रदेश में हो रहे उपचुनाव में भाजपा का जोश ठंढा पड़ गया है। दूसरी तरफ विपक्षी दल खुशियों में डूबे हुए हैं। कैराना लोकसभा और नूरपुर विधानसभा में क्रमशः भाजपा सांसद हुकुम सिंह और विधायक लोकेंद्र सिंह की मृत्यु के बाद उपचुनाव हो रहा है। विपक्ष की ओर से दोनों सीटों पर मुस्लिम प्रत्याशी उतारा गया है।

इन दोनों सीटों पर विपक्ष जातियों में बंटे हिन्दू मतों को अपने मुस्लिम प्रत्याशी के पक्ष में स्थान्तरित कराने में सफल हुआ तो 2019 के लोकसभा चुनाव में पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सीटों पर मुसलमानों का दबदबा बढ़ जाएगा। कैराना लोकसभा और नूरपुर विधानसभा क्षेत्र में  न्यूनतम 35-40 प्रतिशत मुस्लिम मतदाता बताए जा रहे हैं। मुस्लिम धार्मिक ध्रुवीकरण को दबा नहीं पा रहे हैं।

इसके कारण सपा-कांग्रेस, राष्ट्रीय लोकदल और बसपा के आकाओं के चाहने के बाद भी हिन्दू वोट मुस्लिम प्रत्याशियों को जाते नहीं दिख रहे हैं। भाजपा के शीर्ष नेतृत्व द्वारा कार्यकर्ताओं की लगातार उपेक्षा से पार्टी का स्थानीय वर्कर अनमने मन से निकल रहा है। केंद्र से लेकर राज्य तक अनेक मुद्दों पर अपेक्षाकृत परिणाम न दे पाने से क्षेत्र में भाजपा कार्यकर्ता सवालों से घिर जा रहे हैं, लेकिन अपने प्रत्याशी के पक्ष में मुसलमानों के मुखर होने के चलते भाजपा प्रत्याशियों को संजीवनी दिखने लगी है।

दोनों क्षेत्रों में विकास और धर्मनिरपेक्षता से प्रारम्भ हुई सारी बहस हिन्दू-मुस्लिम पर समाप्त हो रहा है। जानकर मानते हैं कि सब कुछ करने के बावजूद लगातार 10 उपचुनाव हार चुकी भाजपा 2019 से पहले कट्टर हिंदुत्व का कार्ड खेल के लिए माहौल गर्म नहीं करेगी तो दुबारा सत्ता में लौटना मुश्किल होगा। क्‍योंकि जमीनी स्‍तर पर बताने के लिए ऐसा कोई काम नहीं है, जिसकी बदौलत उसकी वापसी की संभावनाएं मजबूत हों।

वरिष्‍ठ पत्रकार मनोज श्रीवास्‍तव की रिपोर्ट.