एक और राज्य में अपाहिज हो गई कांग्रेस

राज बहादुर सिंह

: बेटे के बाद कहीं पिता को भी तोहफा न कुबूल करवाना पड़े : जनादेश की मनमानी और स्वार्थपरक व्याख्या नुकसानदायक होती है भले ही तात्कालिक तौर पर आंख मूंदने से इसका अहसास न हो लेकिन इसके असर से बचा नहीँ जा सकता। कर्नाटक के जनादेश की ऐसी ही व्याख्या करने का खामियाजा कांग्रेस आगे निश्चित भुगतेगी और आज की उसकी दुर्दशा अतीत की ऐसी ही व्याख्याओं का नतीजा है।

उपदेश देने के अंदाज में असत्य और मिथ्या भाषण करने वाले कांग्रेस के पचास साला युवा अध्यक्ष से कोई पूछे कि क्या यह सच नहीं है कि 122 विधायकों के बहुमत के साथ सरकार चला रही कांग्रेस को चुनाव बाद केवल 78 सीटें मिलीं? कांग्रेस के सीएम एक सीट से 35 हजार से ज्यादा वोटों से हारे तो दूसरी सीट से बमुश्किल 1600 वोटों से जीते। इतने से ज्यादा वोटों से तो नगर निगम के पार्षद चुनाव जीतते हैं। क्या यह सच नहीं है कि जद एस 40 की जगह 38 सीट पर रह गयी जबकि भाजपा 40 से उछल कर 104 पहुंची, बहुमत से सात सीट कम। तो जनादेश क्या हुआ ?

कांग्रेस ने चुनाव प्रचार के दौरान जद एस को भाजपा की बी टीम कहा और फिर थ्री इडियट्स की तर्ज पर ”तोहफा कुबूल करें ”कह कर अपने से आधे विधायकों वाली पार्टी को गद्दी सौंप कर कौन सी रचनात्मक और विचारात्मक राजनीति की मिसाल पेश की है। यह विशुद्ध नकारात्मक राजनीति है और इसी राजनीति का अनुसरण करने के कारण कांग्रेस आज इस हाल में पहुंच गई है कि देश की लगभग दो प्रतिशत आजादी पर ही उसका शासन रह गया है।

कर्नाटक चुनाव और उसके पहले हुए यूपी सहित कुछ अन्य राज्यों के चुनाव परिणामों ने नोटबन्दी, जीएसटी, दलित उत्पीड़न, जैसे कांग्रेस अध्यक्ष के प्रलाप को नकार दिया है लेकिन विरासत में मिली कुर्सी के अहंकार में डूबा राजनीतिक निठल्ला सच्चाई से रूबरू होने को तैयार नहीं है।सुप्रीम कोर्ट के जजों के जरिए साजिश रचना और सीजेआई के खिलाफ महाभियोग लाने का षड्यंत्र तो खुल ही चुका है और ऊपर से बात बात पर सीजेआई के समक्ष जाने से सियासी दोगलापन भी उजागर हुआ है।

कर्नाटक में तोहफा कुबूल कराने वाली कांग्रेस के लिए इस राज्य में जमीनी सच्चाई क्या हो गयी है जरा इस पर भी गौर कर लें। सीधी सपाट भाषा में कहें तो कांग्रेस एक और राज्य में अपाहिज होकर बैसाखी के सहारे पर आ गयी है। अब जब लोकसभा चुनाव होंगें तो कर्नाटक की 28 सीटों का बंटवारा कांग्रेस और जद एस के बीच होगा और यूं कांग्रेस के लड़ने की सीटें और कम हो जाएंगी।

इतिहास गवाह है कि जिस राज्य में समर्थन देने के खेल में कांग्रेस अपाहिज हुई वहां उसका शरीर और कमजोर होता गया। यूपी और बिहार, उड़ीसा, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में तो पार्टी या तो आईसीयू में है या इसके मुहाने पर। बेटे को केवल 38 सीट होने पर तोहफा कुबूल कराने के बाद कांग्रेस के सामने पिता का भी खतरा खड़ा हो गया है। कांग्रेस की जैसी हालत होती जा रही है कौन जाने लोकसभा चुनाव में भाजपा को रोकने के नाम पर भाजपा विरोधी 22 साल पहले पीएम बने देवेगौड़ा का तोहफा कुबूल करने पर कांग्रेस को न मजबूर कर दे।

राज बहादुर सिंह उत्तर प्रदेश के जाने माने पत्रकार हैं. हिंदी-अंग्रेजी पर समान पकड़ रखते हैं. दैनिक जागरण समेत कई बड़े संस्थानों में वरिष्ठ पदों पर रहे हैं. सियासत, फिल्म और खेल पर जबरदस्त पकड़ रखने वाले श्री सिंह फिलहाल पायनियर में वरिष्ठ पद पर कार्यरत हैं. उनका लिखा फेसबुक से साभार लेकर प्रकाशित किया गया है.