…वो बोलता है तो इक रौशनी सी होती है

swami

: श्रद्धा सुमन समर्पित : स्वामी विवेकानंद। एक ऐसा नाम जिस के बारे में कुछ कहने की सामर्थ्य कम से कम मेरे जैसे अदना व्यक्ति की तो हो ही नहीं सकती। कितने विशेषण दिए जा सकते हैं उन्हें। यह भी अनंत है उस शख्स की अनंत अप्रतिम गाथा की तरह। चार जुलाई 1902 को इस पीर पैगम्बर जैसे शख्स को बेलूर में गंगा के किनारे चंदन की चिता पर हमने विदा किया उसी जगह के सामने जहां 16 साल पहले उनके गुरु रामकृष्ण पंचतत्व में विलीन हुए थे।

बंगाल के एक कुलीन कायस्थ परिवार में 12 जनवरी 1863 को जन्मे नरेंद्र का विवेकानंद बनने का सफर सभी को मालूम है। शिकागो में विश्व धर्म संसद में 11 सितंबर 1893 में स्वामी विवेकानंद ने जो कुछ कहा वह विश्व इतिहास में दर्ज है। योग, ध्यान, अध्यात्म, राष्ट्रवाद और हिन्दुत्व को नए सिरे से परिभाषित किया। और भारत नहीं विश्व को उपहार दिया।

ब्रुकलीन इथिकल सोसाइटी के साथ एक प्रश्नोत्तर सत्र में स्वामी विवेकानंद ने कहा- I have a message to the West as Buddha had a message for East. कोई ताज्जुब नहीं कि अमेरिकी मीडिया ने स्वामी विवेकानंद की जमकर तारीफ की। किसी ने लिखा- Cyclonic monk has arrived from India. क्या कहा जाय, कितना कहा जाय। एक नामालूम शायर की दो पंक्तिया पेश करते हुए मैं एक महामानव को श्रद्धा सुमन अर्पित करता हूं-

खुदा की उस के गले में अजीब कुदरत है
वो बोलता है तो इक रौशनी सी होती है।

श्रद्धा सुमन स्वामी विवेकानंद को।rbs

राज बहादुर सिंह उत्तर प्रदेश के जाने माने पत्रकार हैं. हिंदी-अंग्रेजी पर समान पकड़ रखते हैं. दैनिक जागरण समेत कई बड़े संस्थानों में वरिष्ठ पदों पर रहे हैं. सियासतफिल्म और खेल पर जबरदस्त पकड़ रखने वाले श्री सिंह फिलहाल पायनियर में वरिष्ठ पद पर कार्यरत हैं. उनका लिखा फेसबुक से साभार लेकर प्रकाशित किया गया है.