पहली वर्षगाँठ पर कुछ बड़ा करने की तैयारी में हैं किसान आंदोलनकारी

26 नवंबर को किसान आंदोलन का एक साल पूरा हो जायेगा और केंद्र के कृषि सुधार कानूनों का विरोध कर रहे किसान नेताओं का प्रयास है कि 26 नवंबर को दिल्ली में संसद की तरफ मार्च किया जाये। यही नहीं गाजीपुर, टीकरी बॉर्डर और सिंघू बॉर्डर पर भीड़ फिर से बढ़ाने की तैयारी भी चल रही है। इस बीच मेघालय के राज्यपाल ने आंदोलनकारी किसानों के समर्थन में बड़ा बयान देकर भाजपा नेतृत्व को एक बार फिर असमंजस में डाल दिया है। इस मुद्दे पर आपको सारा अपडेट देंगे और बताएंगे कि 2016 में की गयी नोटबंदी का कितना फायदा हुआ है। इसके साथ ही बात करेंगे चेन्नई में भारी बारिश से उपजे हालात की।

नमस्कार। न्यूजरूम में आप सभी का स्वागत है। पूर्व में भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रह चुके मेघालय के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने घोषणा की है कि वह किसानों के आंदोलन का समर्थन करने के लिए अपने पद से हटने को तैयार हैं। उन्होंने कहा कि दिल्ली में नेता “कुत्ते के मरने पर भी” शोक व्यक्त करते हैं, लेकिन किसानों की मौतों की उन्हें कोई परवाह नहीं है। सत्यपाल मलिक ने सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास योजना की भी आलोचना यह कहते हुए कि एक नए संसद भवन के बजाय एक विश्व स्तरीय कॉलेज बनाना बेहतर होगा। राज्यपाल द्वारा आलोचनात्मक टिप्पणियों की एक श्रृंखला के क्रम में यह नया बयान है। हम आपको बता दें कि राज्यपाल सत्यपाल मलिक किसानों के मुद्दे और कथित भ्रष्टाचार को लेकर केंद्र और राज्यों की भाजपा सरकारों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से निशाना बनाते रहे हैं।

जयपुर में ग्लोबल जाट समिट को संबोधित करते हुए मलिक ने कहा कि उन्हें किसानों के मुद्दे पर दिल्ली के नेताओं को निशाना बनाने पर राज्यपाल का अपना पद खोने का डर नहीं है .. “राज्यपाल को हटाया नहीं जा सकता लेकिन कुछ मेरे शुभचिंतक हैं जो इस तलाश में रहते है कि यह कुछ बोले और इसे हटाया जाए।” उन्होंने कहा कि दिल्ली में “दो या तीन” नेताओं ने उन्हें राज्यपाल बनाया। उन्होंने कहा, “जिस दिन वे कहेंगे कि उन्हें समस्या है और मुझे पद छोड़ने के लिए कहेंगे, मैं एक मिनट भी नहीं लूंगा।”
संसद मार्च की तैयारी

दूसरी ओर, हरियाणा भाकियू (चढूनी) के प्रमुख गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा कि यदि संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) मंजूरी देता है तो राज्य के किसान 26 नवंबर को संसद की ओर मार्च करेंगे। उन्होंने कहा कि रविवार को रोहतक में हुई एक बैठक में इस संबंध में निर्णय लिया गया और अब मोर्चे की मंजूरी का इंतजार है। चढूनी ने संवाददाताओं से कहा कि हरियाणा के रोहतक में राज्य के विभिन्न किसान संगठनों की एक बैठक हुई। बैठक में लिए गए निर्णयों के बारे में उन्होंने कहा, ‘हमने बैठक में 26 नवंबर को, जोकि संविधान दिवस भी है, संसद तक मार्च करने का फैसला किया। नौ नवंबर को हम यह फैसला एसकेएम की बैठक के समक्ष रखेंगे। अगर वे इसे मंजूरी देते हैं, तो हम जाएंगे।’ यहां बाइट लग जायेगी।
उधर, भाजपा राष्ट्रीय कार्यकारिणी ने सरकार की इस बात के लिए तारीफ की है कि उसने किसानों तक विभिन्न योजनाओं का लाभ पहुंचाया है लेकिन किसान नेता राकेश टिकैत का कहना है कि प्रधानमंत्री मोदी ने हमारे लिये कुछ नहीं किया। टिकैत का कहना है कि सरकार किसानों की बात नहीं सुन रही है और आंदोलन के दौरान मारे गये किसानों के लिए कोई शोक नहीं जताया गया है।
नोटबंदी के पाँच साल पूरे
आज आठ नवंबर है और आठ नवंबर का दिन देश की अर्थव्यवस्था के इतिहास में एक खास दिन के तौर पर दर्ज है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2016 में इसी दिन रात आठ बजे दूरदर्शन के जरिए देश को संबोधित करते हुए 500 रुपये और 1000 रुपये के नोट बंद करने का ऐलान किया था। नोटबंदी की यह घोषणा उसी दिन आधी रात से लागू हो गई थी। इससे कुछ दिन देश में अफरातफरी का माहौल रहा और बैंकों के बाहर लंबी कतारें लगी रहीं। बाद में 500 रुपये और 2000 रुपये के नये नोट जारी किए गए। सरकार ने ऐलान किया था कि उसने देश में मौजूद काले धन और नकली मुद्रा की समस्या को समाप्त करने के लिए यह कदम उठाया है। हालांकि देखा जाये तो नोटबंदी के पांच साल बाद डिजिटल भुगतान में वृद्धि के बावजूद चलन में नोटों की संख्या में भी लगातार वृद्धि हो रही है। हालांकि, वृद्धि की रफ्तार धीमी है। दरअसल, कोविड-19 महामारी के दौरान लोगों ने एहतियात के रूप में नकदी रखना बेहतर समझा। इसी कारण चलन में बैंक नोट पिछले वित्त वर्ष के दौरान बढ़ गए। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार डेबिट/क्रेडिट कार्ड, नेट बैंकिंग और यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) जैसे माध्यमों से डिजिटल भुगतान में भी बड़ी वृद्धि हुई है पर नकदी का चलन भी बढ़ा है। आरबीआई के ताजा आंकड़ों के अनुसार, मूल्य के हिसाब से चार नवंबर, 2016 को 17.74 लाख करोड़ रुपये के नोट चलन में थे, जो 29 अक्टूबर, 2021 को बढ़कर 29.17 लाख करोड़ रुपये हो गए।
बारिश से चेन्नई और उसके आसपास बुरा हाल
उधर, मॉनसून के दौरान चक्रवाती परिस्थितियों के कारण चेन्नई और आसपास के क्षेत्रों में लगभग 24 घंटों में तेज बारिश हुई, जिससे रविवार को अधिकतर इलाकों में पानी भर गया और अतिरिक्त पानी को बाहर निकालने के लिए शहर के तीन जलाशयों के स्लुइस गेट (जल स्तर या प्रवाह दर को नियंत्रित करने वाले दरवाजे) खोल दिए गए। अक्टूबर में उत्तर-पूर्व मॉनसून की शुरुआत के बाद से, तमिलनाडु और पुडुचेरी क्षेत्र में करीब 43 प्रतिशत अधिक वर्षा हुई है। पिछले 24 घंटे से भारी से अत्यधिक भारी बारिश शहर में करीब छह साल बाद हो रही है जबकि तमिलनाडु के अन्य क्षेत्रों में हल्की या मध्यम बारिश हुई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्य को केंद्र की सहायता का आश्वासन देते हुए ट्वीट किया, “तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन से बात की और राज्य के कुछ हिस्सों में अत्यधिक वर्षा से उत्पन्न स्थिति पर चर्चा की। राहत एवं बचाव कार्य में केंद्र की तरफ से हरसंभव मदद का आश्वासन दिया। मैं हर किसी की कुशलता एवं सुरक्षा की कामना करता हूं।”
मुख्यमंत्री स्टालिन ने मुख्य सचिव वी इरई अनबु सहित शीर्ष अधिकारियों के साथ कई जलमग्न इलाकों का दौरा किया और अधिकारियों को बाढ़ के पानी की निकासी के लिए त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए। स्टालिन ने कैबिनेट सहयोगियों के साथ अस्थायी शिविरों में प्रभावित क्षेत्रों के लोगों को चावल, दूध और कंबल सहित बाढ़ सहायता सामग्री वितरित की। उन्होंने अधिकारियों को राहत एवं बचाव कार्य में तेजी लाने का निर्देश दिया। सरकार ने 8 और 9 नवंबर को चेन्नई, तिरुवल्लूर, कांचीपुरम और चेंगलपेट जिलों में स्कूलों और कॉलेजों के लिए अवकाश घोषित किया है। मौसम विभाग ने कहा कि उत्तर तटीय तमिलनाडु, बंगाल की खाड़ी के दक्षिण-पूर्व में चक्रवाती हवाओं का क्षेत्र बना हुआ है और नौ नवंबर तक कम दबाव का क्षेत्र बनने की संभावना है। एजेंसी ने राज्य में कम से कम अगले तीन दिनों तक बड़े पैमाने पर वर्षा का अनुमान जताया है। हम आपको बता दें कि भारी बारिश के मद्देनजर यातायात, बस और ट्रेन सेवाएं प्रभावित हुईं हैं।