गैंगेस्‍टर बना भाजयुमो का पदाधिकारी, ठेकेदार और डीलर भी टीम में शामिल

: ओवरएज नेताओं को किया गया शामिल : लखनऊ : काफी उठापटक और पांच साल के अंतराल पर जारी हुई भारतीय जनता युवा मोर्चा की सूची गैंगेस्‍टर और ओवरएज विधायक को भी पदाधिकारी बना दिया गया है। सत्‍ता के मद में डूबी भारतीय जनता पार्टी का युवा संगठन ने नैतिकता को दरकिनार करते हुए एक गैंगेस्‍टर पर रहमदिली दिखाई तो दूसरी तरफ अपने संविधान को ही दरकिनार करते हुए 36 साल के विधायक को भी उपाध्‍यक्ष बना दिया।

दरअसल, नई पदाधिकारियों की टीम ने साबित कर दिया है कि यह पार्टी अब विचार और व्‍यवहार के दायरे को मीलों पीछे छोड़कर अराजकता की राह पर बढ़ चली है। भाजयुमो की इस लिस्‍ट से कर्मठ और जुझारू युवाओं को दरकिनार करके गणेश परिक्रमा करने वालों, नेताओं के चिंटुओं, अपराधियों तथा ठेकेदारों-प्रापर्टी डीलरों को पदाधिकारी बना दिया गया है। मिर्जापुर के चेतनारायण सिंह पर गैंगेस्‍टर एक्‍ट तक लग चुका है।

कृष्‍णानंद राय के गनर रह चुके चेत नारायण सिंह वर्ष 2012 में मिर्जापुर के मझवां सीट से विधानसभा चुनाव लड़ चुके चेत नारायण पर कई मुकदमे दर्ज हैं, जिनमें जानलेवा हमला और हत्‍या तक के मामले शामिल हैं। चेत नारायण का नाम बिहार में हुए एक अपहरण से भी जोड़ा जा चुका है। दरअसल, अब भारतीय जनता पार्टी को विचारधारा और नैतिकता की कोई फिक्र नहीं है। चेत नारायण की उम्र भी लगभग 40 साल के आसपास है, जो पार्टी संविधान का खुला उल्‍लंघन है।

ऐसे ही ठेकेदारी करने वाले राहुल राज रस्‍तोगी को भाजयुमो का उपाध्‍यक्ष बना दिया गया है। राहुल राज भाजपा मुख्‍यालय निर्माण का ठेका ले रखा था तथा इनके पिता जी गोंडा से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ चुके हैं। इसी तरह मंत्री बनाए गए पुरुषार्थ सिंह के पिता आजमगढ़ जिले में बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ चुके हैं। प्रदेश उपाध्‍यक्ष बनाए गए अजीत गुप्‍ता वर्ष 2017 में विधानसभा चुनाव में बगावत कर  चुके हैं।

इतना ही नहीं, विधायक आशीष सिंह आशु को भी उपाध्‍यक्ष बना दिया गया है, जबकि उनकी उम्र 36 वर्ष से ज्‍यादा है। नियमानुसार भाजयुमो में पदाधिकारी बनने की उम्र 35 साल से ज्‍यादा नहीं होनी चाहिए। इसी तरह, आयुषि श्रीमाली को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने किसी आरोप में साल भर पहले निष्‍काषित कर दिया था, लेकिन जुगाड़ कोटे से श्रीमाली भी उपाध्‍यक्ष बनने में सफल रहीं।

दरअसल, भाजपा के लिए लाठियां खाने वाले युवाओं को दरकिनार करके ऐसे लोगों को युवामोर्चा में समायोजित कर लिया गया है, जो दूसरे दलों से आए हैं या कोचिंग के धंधे से जुड़े हुए हैं। भाजयुमो की नई टीम में ला‍ठी खाने वाले कार्यकर्ताओं को दरकिनार करके मलाई खाने और खिलाने वाले कार्यकर्ताओं को पुरस्‍कृत किया गया है। उन युवाओं को दरकिनार किया गया है, जो लगातार पार्टी के लिए सक्रिय रहे हैं।

खुद परिक्रमा कोटे से अध्‍यक्ष बने सुभाष यदुवंश ने अपनी ऐसी टीम बनाई है, जिसकी सूची जारी होते ही विवाद और नाराजगी शुरू हो गई है। इतना ही नहीं, पार्टी के संविधान को भी दरकिनार करते हुए सुभाष ने ऐसे लोगों को पदाधिकारी बना दिया है, जिनकी उम्र 35 वर्ष से अधिक है, जबकि पार्टी के संविधान में साफ-साफ लिखा है कि भारतीय जनता युवा मोर्चा के पदाधिकारियों की उम्र 35 वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए।

सुभाष ने आशुतोष राय की पुरानी टीम में से किसी भी महत्‍वपूर्ण पदाधिकारी को जगह नहीं दी है। उनकी जगह धंधेबाज और धनपशुओं को शामिल किया गया है। कुंवर सिंह निषाद, सोनू सिंह, योगेश सिंह, अनिल यादव, राहुल मिश्रा, विजय सोनी, शिव सिंह, पुष्‍पराज सिंह, संजय मिश्र, जितेंद्र सिंह, सौरभ राय जैसे जुझारू कार्यकर्ताओं को किसी लायक नहीं समझा गया तो केवल इसलिए कि इनके पास पैसा और सेटिंग नहीं थी। इस संदर्भ में पक्ष लेने के लिए सुभाष यदुवंश को फोन किया गया लेकिन उन्‍होंने काल रिसीव नहीं की।