गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की मांग व अनर्गल फीस वसूली वसूली का विरोध करने अकेले धरने पर बैठा चन्दौली का छात्र

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गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की मांग व मानक से ज्यादा फीस वसूली के खिलाफ एकल धरना पर उतरा छात्र चंदौली के धानापुर शहीद पार्क से की आंदोलन की शुरुआतधरने को मिल रहा अन्य छात्रों व अभिभावकों का भारी समर्थन चंदौली : सरकारी शैक्षणिक संस्थानों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा व तय राशि से ज्यादा फीस वसूली को लेकर रामगढ़ निवासी बीएड के छात्र अनुज सिंह रधुवंशी गुरुवार से धानापुर कस्बा स्थित शहीद पार्क में अनिश्चितकालीन धरने पर हैं। धरने के दूसरे दिन शुक्रवार को कुछ अन्य छात्रों का जबर्दस्त समर्थन मिलने से उनके आंदोलन को बल मिलने लगा है।

बताते चलें कि अनुज ने मंगलवार को सोशल साइट फेसबुक पर इस बाबत एक पोस्ट किया था। उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा था कि…
“आप सभी को सादर प्रणाम।
मैं छात्र हूँ मेरा काम है पढा़ई करना,लेकिन क्या हमे अपने देश और समाज की परिस्थितियों का ज्ञान नहीं होना चाहिए।उसमें सुधार करने के लिए प्रयास नहीं करना चाहिए?

मैं आपसे पूछता हूँ?
मैने पहले भी सरकरी स्कूल में सुधार और उसमें हो रहे अवैध वसूली को बन्द कराने को लेकर बात रखी पर कुछ भी न हुआ।
अब मैं इस लडा़ई को सड़क पर लड़ने जा रहा हूँ
22/10/2020 को सुबह 10 बजे से धानापुर (शहीद स्मारक) में अनिश्चितकालीन हड़ताल (एकल हड़ताल) पर अकेले बैठने जा रहा हूँ,अकेले इसलिए क्योंकि भीड़ जुटाने की मेरी हैसियत ही नहीं।
(School strike for education)

 

अब मैं स्कूल जाने की बजाय हड़ताल पर रहूँगा।
मैं इस लडा़ई को आपके हवाले करता हूँ,आप इसे शासन प्रशासन तक पहुँचाने का प्रयास करें।
ये काम मेरा नहीं जनप्रतिनिधियों का था लेकिन उन्हे फुर्सत ही नहीं।

मेरे इस प्रयास से हो सकता है कुछ भी न बदले लेकिन मैं इसलिए भी प्रयास करना चाहता हूँ क्योंकि कोई मलाल न रहे की किसी ने प्रयास नहीं किया। जय हो।”

 

अनुज सिंह रघुवंशी का आरोप है कि कोरोना काल में भी माध्यमिक विद्यालयों में तय राशि से ज्यादा फीस वसूली जा रही है। जो कि ग्रामीण क्षेत्र के छात्रों एवं अभिभावकों के ऊपर अनावश्यक बोझ है। स्कूलों में पठन-पाठन का कार्य कोरोना की वजह से ठप है।

फिर भी छात्रों से मनमाने ढंग से फीस वसूला जा रहा है। आम दिनों में भी पठन-पाठन ठीक से नहीं हो पा रहा है। जिससे कि शैक्षणिक गुणवत्ता में कमी है, जिसमें काफी सुधार की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि मेरी मांग जायज है और आम जन से जुड़ी हुई है।

मेरा मानना है कि मूलभूत अधिकारों में से एक शिक्षा का अधिकार है और वह सभी भारतीयों को मिलना चाहिए। ताकि राष्ट्र के विकास में सबका योगदान हो सके।