हाथ मलते रह जाएंगे अखिलेश!

मनोज श्रीवास्‍तव

लखनऊ। मध्‍य प्रदेश में कांग्रेस के साथ मिलकर लड़ने की तैयारी कर रही बहुजन समाजवादी पार्टी ने कांग्रेस अध्‍यक्ष राहुल गांधी पर कमेंट करने वाले अपने कोआर्डिनेटर तथा राष्‍ट्रीय उपाध्‍यक्ष जय प्रकाश सिंह को हटाकर अपना एजेंडा साफ कर दिया है। बसपा के इस कदम के बाद सबसे ज्‍यादा मुश्किल सपा अध्‍यक्ष अखिलेश यादव के सामने खड़ी हो गई है।

तत्‍कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्‍यक्ष रीता बहुगुणा जोशी के घर जलाने वाले को विधायक बनाने वाली मायावती ने राहुल पर टिप्‍पणी करने वाले जय प्रकाश सिंह को हटाकर यह संकेत दे दिया है कि राहुल गांधी और कांग्रेस उसके गठबंधन एजेंडे में सबसे ऊपर है। संभव है कि मायावती और बसपा गठबंधन में बड़ी पार्टी होने के नाते राहुल गांधी को पीएम पद का दावेदार भी मान लें, लेकिन सवाल यह है कि अखिलेश यादव के हाथ क्‍या आएगा? पिता मुलायम सिंह यादव को प्रधानमंत्री बनाने का सपना देखने वाले अखिलेश यादव के हाथ से मुख्‍यमंत्री की कुर्सी भी जाने का खतरा पैदा हो गया है।

अगर मायावती पीएम पद की दावेदार नहीं बनती हैं तब स्‍वभाविक रूप से गठबंधन होने की सूरत में वह मुख्‍यमंत्री पद की दावेदार बनेंगी। इस स्थिति में अखिलेश यादव के हाथ क्‍या आएगा? भाजपा को हराने की मंशा में अखिलेश यादव अपने ही पैरों पर कुल्‍हाड़ी मारते जा रहे हैं। अखिलेश के इस प्रयास से भाजपा हारे या ना हारे, लेकिन अखिलेश की समाजवादी पार्टी के बुरे दिन आने की आशंका तो बलवती होती जा रही है।

लोकसभा चुनाव में गठबंधन होने का दुष्‍परिणाम भी सपा को उठाना पड़ेगा, जबकि उसके खुद के घर में भगदड़ मचेगी। मुलायम सिंह यादव जैसे दिग्‍गज राजनेता के पुत्र अखिलेश का बसपा और कांग्रेस का पिछलग्‍गू बनना सियासी पंडितों को भी समझ में नहीं आ रहा है।manoj

वरिष्‍ठ पत्रकार मनोज श्रीवास्‍तव की रिपोर्ट.