यूपी में भाजपा ने पिछड़ों को हाशिये पर धकेला! 

कार्यकर्ता

मनोज श्रीवास्तव

लखनऊ। पिछड़े वोट बैक के बल पर केंद्र से लेकर राज्यों तक फैल रही भारतीय जनता पार्टी यूपी में पिछड़े नेताओं को अपमानित करने का कोई मौका छोड़ नहीं रही है, जबकि 2014 के लोकसभा चुनाव के समय नरेंद्र मोदी ने यह कह कर पिछड़ों को पार्टी से जोड़ा था कि देश की आने वाली राजनीति में पिछड़ों और दलितों का राज होगा। हालिया मामला सरकार में पिछड़े वर्ग के नेता के रूप में प्रतिनिधित्व देने वाले उपमुख्यमंत्री केशव मौर्य के दिवस अधिकारी को हटाने को लेकर और वाराणसी हादसे में केशव की रणनीतिक घेराबंदी को लेकर सुलग रहा है।

वाराणसी हादसे में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उपमुख्यमंत्री केशव मौर्य के समर्थकों में विवाद बढ़ता जा रहा है। वाराणसी हादसे के बाद सेतु निगम के एमडी राजन मित्तल को हटा दिया गया, जबकि निर्माणाधीन पुल के नीचे से रास्ता रोकने पर ट्रैफिक पुलिस ने सेतु निगम के बगल से न सिर्फ रास्ता शुरू करा दिया बल्कि रास्ता अवरुद्ध करने के आरोप में सेतु निगम पर मुकदमा पंजीकृत करा दिया था। अब सेतुनिगम के कर्मचारियों का एक समूह यह मांग कर रहा है कि पुल के नीचे से रास्ता पुलिस प्रशासन ने खोलवाया था इसलिए इस जनहानि का जिम्मेदार मानते हुए उन पर गैर इरादतन हत्या का मुकदमा चलाया जाय।

जानकार  इसे मुख्यमंत्री की घेराबंदी के रूप देख रहे है। जिस दिन सर सूबे में योगी की सरकार बनी है, उसी दिन केशव बनाम योगी के झगड़े का जन्म भी हो गया था। विधानसभा चुनाव के समय भाजपा प्रदेश अध्यक्ष रहे केशव मौर्य को पार्टी के बहुत सारे कार्यकर्ता पिछड़े मुख्यमंत्री के रूप में दावेदार मानते थे। उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहली पसंद माना जा रहा था, लेकिन सरकार गठन के समय दिल्ली में मीडिया से यह कह कर केशव की गणित बिगाड़ दी गई कि यूपी के सीएम का नाम इनके पास है। इनसे पूछ लीजिये, जिसे कहेंगे उसे मुख्यमंत्री बना दिया जाएगा।

इसी बीच शाह ने गोरखपुर से योगी को बुलवा लिया। इस बात को योगी आदित्यनाथ बार-बार कहते सुने गए हैं कि मुझे राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने मुख्यमंत्री बनाया है। उसके बाद मुख्यमंत्री कार्यालय शास्त्री भवन में केशव मौर्य के दफ्तर बनने और हटने के बाद पिछड़ों में अच्छा संदेश नहीं गया। यूपी सरकार के एक वर्ष पूरे होने पर केशव मौर्य ने अपने विभागों की उपलब्धि बताने के लिए प्रेस करने की तिथि घोषित किया तो यह कह कर रोकवा दिया गया कि अभी मुख्यमंत्री ने प्रेस नहीं किया है। पहले सीएम योगी प्रेस कर लें बाद में कोई भी प्रेस करे।

इसी बीच प्रदेश भर से कार्यकर्ताओं ने आवाज उठाई कि सरकार में किसी कार्यकर्ता की सुनवाई नहीं हो रही है, तो केशव मौर्य ने ट्विट किया कि कार्यकर्ताओं की अनदेखी करने वाले अफसर बख्शे नहीं जाएंगे। इसके बाद सरकार से नाराज विधायक, सांसद, मंत्री और पार्टी कार्यकर्ता केशव के पक्ष में लामबंद हो गये। सरकार के सहयोगी दल भारतीय समाज पार्टी और अपना दल के नेताओं/विधायकों ने सरकार पर हमलावर हो मुख्यमंत्री पर पिछड़ों की उपेक्षा और भ्रष्‍टाचारियों पर नकेल कसने में फेल बताया। पार्टी के भीतर उबल रहा लावा उस समय फटा तो मीडिया का मसाला बन गया।

न्यूज चैनलों और हिंदी-अंग्रेजी अखबारों में न्यूज का गैंगवार जब शुरू हुआ तो गूंज दिल्ली तक सुनाई दी। दोनों पक्षों को दिल्ली तलब किया गया। जानकर बताते हैं कि अभी तक कोई समाधान नहीं निकल पाया है। उनकी माने तो  समय रहते पार्टी नेतृत्व इस मामले का पटाक्षेप नहीं कर पायी तो परिणाम गंभीर हो सकते हैं। इस संदर्भ में भाजपा मामलों के जानकार वरिष्ठ पत्रकार नरेंद्र उत्तम ने कहा भाजपा ने जब भी यूपी में पिछड़े नेता को आगे किया है पार्टी को बड़ी सफलता मिली है, लेकिन भाजपा नेतृत्व उनको बहुत दिन तक बनाने में गंभीर नहीं रही, जिसका पार्टी को भारी कीमत भी चुकाना पड़ा है।

वह आगे कहते हैं कि पार्टी में एक वर्ग भ्रष्‍टाचार के आरोपित सवर्ण मंत्रियों को बचाते हुए पिछड़ों को निशाना बनवा कर उन्हें बदनाम करने की कोशिश कर रहा है, जो कामयाब नहीं हो पायेगा। यदि भाजपा पिछड़ों को हाशिये पर कर देगी तो मोदी 2019 में प्रधानमंत्री नहीं हो पाएंगे। मजे की बात तय यह है कि भाजपा शीर्ष नेतृत्‍व ने पिछड़े प्रदेश अध्यक्ष की जगह ब्राह्मण अध्यक्ष बैठा दिया।

वरिष्‍ठ पत्रकार मनोज श्रीवास्‍तव की रिपोर्ट.