उपचुनाव : हाथी की रणनीति से पिछड़ गया साइकिल

: कांग्रेस की हालत सबसे खराब : मायावती के स्‍टैंड ने दिलाई बढ़त : लखनऊ। केंद्र सरकार द्वारा जम्मू-कश्मीर से धारा 370 और 35A हटाये जाने के बाद कांग्रेस और सपा से अलग स्‍टैंड लेकर बसपा अध्‍यक्ष मायावती ने पार्टी को यूपी में मुख्‍य विपक्षी दल बना दिया है। कांग्रेस एवं बसपा से अधिक सीटें जीतने के बावजूद विधानसभा चुनाव 2017  और लोकसभा चुनाव 2019 में क्रमशः कांग्रेस और बहुजन समाज पार्टी के साथ मिल कर चुनाव लड़ने के बाद सपा ने अपनी साख गंवाई है। प्रदेश की विधानसभा में मुख्य विपक्षी दल होने के बावजूद सपा को उपचुनाव में उतरने के लिये एक कंधे की तलाश है।

संभावना है कि भाजपा सरकार से बर्खास्‍त किये गये ओम प्रकाश राजभर की सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी से समाजवादी पार्टी गठबंधन करेगी। अपने चाचा शिवपाल सिंह यादव से संषर्घ एवं आंतरिक कलह में अखिलेश ने कब समाजवादी पार्टी को रसातल में पहुंचा दिया, उन्‍हें इसका भान भी नहीं हो पाया। रही-सही कसर धारा 370 पर देश की जनमानस की मंशा के विपरीत स्‍टैंड लेकर पूरी कर दी है। एक खास वर्ग को खुश करने के चक्‍कर में अखिलेश ने बड़ी आबादी को नाराज किया है।

राज्यसभा में कश्मीर से 370 हटाने के मुद्दे पर बहस के दौरान गृहमंत्री अमित शाह ने इस पर डॉ. राममनोहर लोहिया का दृष्टिकोण को साझा करते हुए समाजवादी पार्टी के नेता रामगोपाल यादव को जिस तरह धोया, वह देखने लायक था। उस समय रामगोपाल के चहरे पर हवाईयां उड़ रही थीं। उसी सदन में बसपा के सतीशचंद्र मिश्र ने अपनी पार्टी मुखिया का निर्देश मानते हुए कश्मीर से धारा 370 और 35A हटाने का समर्थन कर पहले राष्ट्र बाद में राजनीति का संदेश देकर बड़ी लकीर खींच दी।

इसके पहले यूपी में मायावती ने बसपा के प्रदेश अध्यक्ष आरएस कुशवाहा को हटाकर मुनकाद अली को यह जिम्‍मेदारी दे दी। मयावती ने दलित-मुस्लिम कार्ड खेल कर उपचुनाव की मजबूत तैयारी का खाका खींच दिया है। हालांकि बहुजन समाज पार्टी 18 विधायकों के साथ विधानसभा में तीसरे नंबर की पार्टी है, लेकिन मायावती की लगातार आक्रामक रणनीति ने उसे मुख्य विपक्षी जैसा ताकतवर बना दिया है। अखिलेश इस मोर्चे पर कहीं बहुत पीछे छूट गये लगते हैं। कांग्रेस तो इस स्थिति में है कि उसे उम्‍मीदवार ढूंढे नहीं मिलेंगे।

लोकसभा चुनाव 2019 के परिणाम पर गौर किया जाये तो बहुजन समाज पार्टी दस सांसदों के साथ यूपी की दूसरी सबसे बड़ी पार्टी है। कांग्रेस की स्थिति सबसे खराब है। कांग्रेस अपना गढ़ अमेठी तक नहीं बचा पाई। हालात ऐसे हैं कि कांग्रेस को उपचुनाव वाली 13 सीटों पर मजबूत उम्‍मीदवार तक ढूंढने में नाकों चने चबाने पड़ेंगे। कांग्रेस ने प्रियंका गांधी को उपचुनाव के लिए सहयोगी दल तय करने का जिम्मा दिया है, लेकिन अभी तक उन्हें कोई ऐसा सहयोगी दल नहीं मिला जो इनके साथ मिल कर उपचुनाव लड़े।

गौरतलब है कि उत्‍तर प्रदेश में 13 सीटों पर उपचुनाव होने हैं, उसमें हमीरपुर सीट के लिये चुनाव तिथि घोषित हो गई है। शेष 12 सीटों सहारनपुर की गंगोह सीट, अलीगढ़ की इगलास, रामपुर सदर, फीरोजाबाद की टूंडला, कानपुर की गोविंदनगर, लखनऊ की कैंट, बाराबंकी की जैदपुर, चिटकूट की मानिकपुर, बहराइच की बलहा, प्रतापगढ़ सदर, अंबेडकरनगर की जलालपुर तथा घोसी सदर सीट शामिल है। इनमें से रामपुर और जलालपुर छोड़कर सभी सीटों पर भाजपा का कब्‍जा रहा है। रामपुर में सपा और जलालपुर में बसपा ने जीत हासिल की थी।