पिछली सरकारों में सत्ता के साथ आका बदल लेता था कुख्‍यात गिरधारी

: कुख्‍यात गिरधारी को पालती रहीं थी पिछली सरकारें : योगी सरकार में खत्‍म हुई एक और अपराधी की कहानी : सपा और बसपा सरकारों के दौरान अपराध की दुनिया में बढ़ा गिरधारी का रसूख : कई हत्‍याओं को अंजाम दे चुका था बेरहम शूटर : लखनऊ। गिरधारी 29 साल से जरायम की दुनिया में सक्रिय था। वह दोनों हाथों से असलहा चलाने में माहिर था। पिछली सरकारें उसे सुरक्षित पनाह देकर बाकायदा पाल रही थी। शायद यही कारण था कि बेखौफ गिरधारी लखनऊ में हत्‍या कर योगी सरकार को चुनौती देने का दुस्‍साहस कर बैठा, जो उसके जीवन की आखिरी चूक साबित हुई। अपराध के खिलाफ मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ के जोरो टालरेंस के संकल्‍प पर आगे बढ़ रही पुलिस ने एक और अपराधी को ढेर कर दिया ।

गिरधारी शक्ल से ही नहीं बल्कि दिमाग से भी बहुत शातिर था। सपा,बसपा की सरकारों के दौरान उसकी सत्‍ता तक मजबूत पैठ थी। 2005 में जौनपुर में चेयरमैन चुनाव की रंजिश में विजय गुप्ता की हत्या करने के बाद उसने तत्कालीन सांसद से नजदीकी बना ली थी। 2007 में बसपा की सरकार बनने के बाद आजमगढ़ से सत्ताधारीदल के विधायक से रिश्ते मजबूत कर वह सरकार में काफी ऊपर तक पहुंच गया। 2012 में सरकार फिर बदली तो आजमगढ़ के सपा विधायक के जरिये सत्‍ता की सीढि़यां चढ़ गया।

पिछली सरकारों में गिरधारी बेखौफ होकर प्रदेश भर में वारदातों को अंजाम देता था। लखनऊ, वाराणसी, दिल्ली समेत 12 बड़े शहरों की क्राइम डायरी में भले ही उसका असली नाम गिरधारी विश्वकर्मा दर्ज हो। लेकिन अपराध की दुनिया में उसे गिरधारी लोहार, डॉक्टर, टग्गर और DM के नाम से जाना जाता था

सुपारी लेकर हत्‍याएं करता था गिरधारी

शूटर गिरधारी का निशाना अचूक था। वह सुपारी लेकर हत्याकांड को अंजाम देता था। उसकी तलाश वाराणसी पुलिस को भी थी। गिरधारी ने 30 दिसंबर 2019 को वाराणसी के सदर तहसील परिसर में दिनदहाड़े ठेकेदार नीतीश सिंह की हत्या कर दी थी। इसके बाद उसका नाम प्रदेश के बड़े अपराधियों में शुमार हो गया था।

16 साल पहले की थी पहली हत्या

वाराणसी के चोलापुर थाने के लखनपुर का मूल निवासी गिरधारी विश्वकर्मा साल 2001 से जरायम जगत में सक्रिय था । वर्ष 2001 में गिरधारी के खिलाफ लूट का पहला मुकदमा दर्ज किया गया था। वर्ष 2000 तक गिरधारी चोलापुर क्षेत्र के ही एक सफेदपोश का शागिर्द था । वर्ष 2005 में जौनपुर के केराकत क्षेत्र में हत्या के बाद गिरधारी दोनों हाथ से ताबड़तोड़ फायरिंग करने वाले शार्प शूटर के तौर पर जरायम जगत में कुख्यात हो गया। वर्ष 2010 में गिरधारी पर 50 हजार का ईनाम घोषित हुआ था । 2019 में नितेश की हत्या के बाद उस पर एक लाख का ईनाम घोषित हुआ था ।