जाट खड़ी कर सकते हैं भाजपा की खाट

: जाट सम्‍मेलन में नहीं जुटी भीड़ : लखनऊ : भाजपा के पिछड़ा वर्ग जातीय सम्‍मेलन करके लोकसभा चुनाव की तैयारियों जुटी हुई है, लेकिन जाट सम्‍मेलन के बाद पार्टी पश्चिमी क्षेत्र को लेकर परेशान हो गई है। मंगलवार को आयोजित भाजपा के जाट सम्‍मेलन में कम जुटी भीड़ ने पार्टी के रणनीतिकारों को परेशान कर दिया है।

आज आयोजित जाट सम्‍मेलन में विश्‍वसरैया हाल की सीट तक नहीं भर पाई। यह हाल तब है जब भाजपा के 6 सांसद, 14 विधायक, एक एमएलसी और पांच जिला पंचायत अध्‍यक्षों के साथ कई नगर पंचायतों पर भी जाटों का कब्‍जा है। सतपाल सिंह केंद्र में मंत्री हैं तो भूपेंद्र चौधरी और लक्ष्‍मी नारायण चौधरी उत्‍तर प्रदेश में मंत्री पद का दायित्‍व संभाल रहे हैं।

इसके बावजूद सभागार की सीटों का खाली रह जाना बहुत कुछ कहता है। जाटों की अनदेखी से यूपी भाजपा के रणनीतिकार परेशान हो उठे हैं। माना जा रहा है कि जाटों में भाजपा को लेकर नाराजगी पनपने लगी है। अगर जाटों का रूख नहीं बदला तो पश्चिमी यूपी में भाजपा को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। हाल में हुए उपचुनावों में पार्टी पश्चिम की कैराना लोकसभा और बिजनौर की विधानसभा सीट हार चुकी है।

भाजपा से नाराज जाट अगर रालोद की तरफ लौट गया तो संभावित गठबंधन पश्चिम की कई लोकसभा सीटें भाजपा से छीनने में सफल हो जाएगा। सूत्र बताते हैं कि इसका अंदाजा केंद्रीय मंत्री सतपाल सिंह को भी होने लगा है, लिहाजा वह भी इस बार बागपत की बजाय मुंबई से लड़ने की कोशिश में जुट गए हैं।

अब देखना है कि भाजपा लोकसभा चुनाव से पहले जाट वोटरों को कैसे मनाकर अपने पक्ष में करती है। माना जा रहा है कि जाट वोटर केंद्र की मोदी सरकार की वादाखिलाफी से नाराज हैं तथा उसे स‍बक सिखाने की तैयारी में हैं। जाटों की बेरुखी से पार्टी के चेहरे पर शिकन बढ़ गई है।