…जब वरिष्‍ठ पत्रकार ने सुषमा के सामने ही कर दी सोनिया से हार जाने की बात

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राज बहादुर सिंह

: यादों के झरोखे से : किसी के जाने के बाद, करे फिर उसकी याद : लखनऊ : कश्मीर मामले से जुड़ी न्यूज़ देख रहा था कि अचानक सुषमा स्वराज के एम्स में भर्ती होने की खबर चलने लगी और चंद मिनटों में वो खबर आ गयी जो कतई नहीं आनी चाहिए थी। उनकी तारीफ में बहुत कुछ कहा जा सकता है। मुझे भी अनुभव था उनके साथ कुछ समय बिताने का।

बात 1999 के लोक सभा चुनाव की है। सुषमा स्वराज बेल्लारी से सोनिया गांधी के खिलाफ चुनाव लड़ीं थीं। बेल्लारी में वोट पड़ चुके थे इसलिए वह उत्तर प्रदेश प्रचार के लिए आईं थीं। उन्हें एक दिन में तीन वीवीआईपी क्षेत्रों में जाना था। अकबरपुर (अब अम्बेडकरनगर) में बसपा की मायावती, अमेठी में सोनिया गांधी और रायबरेली में कैप्टन सतीश शर्मा के खिलाफ भाजपा प्रत्याशी क्रमशः त्रिवेणी राम, डॉक्टर संजय सिंह व अरुण नेहरू के समर्थन में एक ही दिन उनकी सभाएं प्रस्तावित थीं।

मैं उन दिनों दैनिक जागरण में था। मुझे उनके साथ भेजा गया। अकबरपुर और अमेठी की मीटिंग खत्म होते होते शाम होने लगी और हेलीकॉप्टर के पायलट ने कहा कि अब वह नहीं उड़ेगा लेकिन सुषमाजी ने भी जैसे जिद पकड़ ली और कहा कि अरुण की मीटिंग में तो जाना ही होगा। खैर पायलट ले गया हेलीकप्टर रायबरेली लेकिन उसने इंजन नहीं बन्द किया और पंखों की तेज हवा के बीच सुषमा जी बड़ी मुश्किल से सुरक्षाकर्मियों की मदद से किसी तरह हेलीकप्टर से उतर सकीं।

हेलीकॉप्टर उड़ गया था और मीटिंग के बाद स्थानीय नेता अजयपाल सिंह (तब भाजपा में थे और बाद में कांग्रेस से डलमऊ से विधायक रहे) अपनी सीलो कार से खुद ड्राइव कर लखनऊ छोड़ने गए। यात्रा की कई यादें हैं लेकिन सबसे मजेदार वाकिया बताता हूं। अमेठी में लैंड करने के पहले जब हेलीकाप्टर हवा में चक्कर लगा रहा था तो सुषमाजी ने खुश होकर कहा कि संजय ने बहुत भीड़ जुटा रखी है। इस पर मैंने कहा कि लेकिन होगा क्या इससे। सोनिया को तो दोनों जगह से जीतना ही है।

मेरे मुंह से यह निकला ही था कि मुझे यह सोच कर झटका लगा कि बेल्लारी से तो मेरे सामने बैठीं सुषमाजी ही सोनिया से चुनाव लड़कर आयी हैं और सोनिया की जीत की बात कह कर मैंने दूसरे सिरे से सुषमाजी की हार की बात कही है। मैंने बात संभालने की कोशिश की और कहा कि चुनाव तो आपने जबरदस्त लड़ा है, लेकिन जीतने पर संदेह है। उनकी भाषण कला खासकर कन्नड़ में दिए भाषण का उल्लेख कर मैंने उनकी प्रशंसा की, जो सच भी था। बेल्लारी में शार्ट नोटिस पर प्रभावी चुनाव लड़ने के लिए उन्हें खूब शोहरत मिली थी।

बहरहाल तीर निकल चुका था और जो भी असर किया हो उसने लेकिन लखनऊ आने तक उनके हाव भाव या बातचीत के रवैये से ऐसा आभास नहीं मिला कि उन्हें मेरी बात नागवार लगी है। उनसे बातचीत में मेरा काफी ज्ञानवर्धन भी हुआ। वह सहज, सौम्य, विद्वान, प्रखर वक्ता, मिलनसार और भी तमाम गुणों से लबरेज थीं।rbs

राज बहादुर सिंह उत्तर प्रदेश के जाने माने पत्रकार हैं. हिंदी-अंग्रेजी पर समान पकड़ रखते हैं. दैनिक जागरण समेत कई बड़े संस्थानों में वरिष्ठ पदों पर रहे हैं. सियासतफिल्म और खेल पर जबरदस्त पकड़ रखने वाले श्री सिंह फिलहाल पायनियर में वरिष्ठ पद पर कार्यरत हैं. उनका लिखा फेसबुक से साभार लेकर प्रकाशित किया गया है.