निशीथ राय की जांच अधिकारी बदलने की मांग सामान्य परिषद ने की खारिज

लखनऊ : डॉ. शकुन्तला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय की सामान्य परिषद ने बुधवार को कुलपति प्रो. निशीथ राय की सभी मांगों को सिरे से खारिज कर दिया है। परिषद ने जांच अधिकारी जस्टिस शैलेन्द्र सक्सेना को हटाने और फिर से कुलपति का कार्यभार देने से इनकार कर दिया। साथ ही कहा है कि जांच पूरी होने के बाद ही प्रो. राय के बारे में अन्तिम फैसला लिया जाएगा।

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. निशीथ राय को भ्रष्टाचार, गलत नियुक्ति करने और अर्बन सेंटर में वित्तीय अनियमितता जैसे गंभीर आरोप पर प्रदेश सरकार ने अगस्त 2017 को कुलपति पद पर काम करने से रोक दिया था। साथ ही उनके खिलाफ जांच बैठा दी थी। इसके खिलाफ प्रो. निशीथ राय ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। न्यायालय ने सामान्य परिषद के आदेश को निरस्त करते हुए कहा था कि अगर प्रो.राय के खिलाफ प्रथम दृष्टया कोई मामला बनता है तो तीन माह के भीतर कार्रवाई प्रारम्भ कर दी जाए।

इसके बाद परिषद ने फरवरी 2018 में बैठक कर कुलपति प्रो. निशीथ राय को फिर से कुलपति का काम करने से रोक दिया और उनके खिलाफ जांच के लिए रिटायर जस्टिस शैलेन्द्र सक्सेना को जांच अधिकारी बना दिया। साथ ही राजस्व परिषद के अध्यक्ष वरिष्ठ आईएएस प्रवीर कुमार को कार्यकारी कुलपति बना दिया। इसके बाद रिटायर जस्टिस शैलेन्द्र सक्सेना ने जांच की कार्रवाई शुरू कर दी। आरोप पत्रों का जवाब भी प्रो. राय ने जांच अधिकारी को भेज दिया था।

प्रो. निशीथ राय ने जांच अधिकारी को हटाने की मांग की : इस बीच प्रो. निशीथ राय ने शासन को पत्र भेजा। जिसमें उन्होंने आरोप लगाया कि जांच अधिकारी रिटायर जस्टिस शैलेन्द्र सक्सेना का पुत्र प्रदेश सरकार में सरकारी वकील है। लिहाजा जांच निष्पक्ष नहीं हो सकती है। इसलिए जांच अधिकारी बदला जाए। साथ ही प्रो. राय ने सरकार से मांग की कि विवि अधिनियम के अनुसार विवि में छह माह से अधिक कार्यकारी कुलपति नहीं रह सकता है। इसके बाद स्थाई कुलपति की नियुक्त होनी चाहिए। ऐसे में उन्हें फिर से कुलपति पद पर बहाल किया जाए।

परिषद ने खारिज की मांग : सामान्य परिषद की बुधवार की शाम को हुई बैठक की अध्यक्षता मुख्यमंत्री योगी आदित्य राथ ने की। बैठक में कुलपति प्रो. निशीथ राय के पत्रों पर विचार-विमर्श किया गया। इसके बाद परिषद ने कहा कि प्रो. राय द्वारा जांच अधिकारी रिटायर जस्टिस शैलेन्द्र सक्सेना पर लगाए गए आरोप उचित नहीं है। और आरोप बेबुनियाद है। ऐसे में जांच अधिकारी को हटाया नहीं जा सकता है। साथ ही परिषद ने उनकी दूसरी मांग पर कहा कि विवि अधिनियम के अनुसार छह माह बाद स्थाई कुलपति होना जरूरी नहीं है। लिहाजा प्रो. निशीथ राय को फिर से कुलपति के पद पर बहाल करने की जरूरत नहीं है। प्रो. राय के भविष्य पर फैसला जांच रिपोर्ट आने के बाद ही लिया जाएगा।