…और जया ने आर्डर दिया, जार्ज ने हमें बाहर का रास्‍ता दिखा दिया  

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चंचल सिंह

: जया ने अशोक को आर्डर दिया कि यह बात कैबिनेट में उठे उसके पहले ही चंचल को निकाल दीजिये : जार्ज रेल मंत्री थे और हम उनके कई सहायकों में एक थे। कई बार सार्वजनिक रूप से जार्ज यह बोल चुके थे ये सहायक नही हैं, मंत्री हैं। हम तीन जन थे। विजय नारायण, असीम और हम। अमूमन जो समाजवादियों की मूल कारस्तानी है एक दूसरे को नीचे फेंकना, हम करते रहते थे, इसमें हम थोड़ी अपनी तारीफ कर लूं, हम मस्तमौला बने काम करते रहते थे, किसी से कोई लेना देना नहीं।

जनेश्वर मिश्रा जी संचार मंत्री थे, हमारी उनकी खूब जमती थी। साथ में जेल रह चुके थे। अल सुबह सात बजे हम मिश्रा जी के यहां पहुंच जाते, नींबू की चाय पीते किसी न किसी को मिल कर गरियाते, हंसते। पर आड़ में। जार्ज के आंतरिक घेरे में हमारे खिलाफ सब थे, बस जार्ज को छोड़ कर। नौकरशाही से आई जया जेटली और एक मुंह लगा क्लर्क अशोक सुब्रमण्यम सबसे ज्यादा, लेकिन मौका नहीं पा रहे थे।

इधरं वीपी सिंह के खिलाफ चंद्रशेखरजी की लाबी दल के अंदर सुलग रहे विस्फोट पर नजर रखे हुए थे और जनेश्वरजी चंद्रशेखर के ज्यादा करीब रहे। एक दिन अल सुबह हम जार्ज के घर बैठे थे, तब तक बीबीसी से नरेश कौशिक का फोन आया। हम दोनों बात कर रहे थे कि शायद उलट-पलट हो जाय। इस पर नरेश ने पूछा-कल तो आप जनेश्वरजी की पार्टी में शामिल थे, जो रात को उनके घर पर आयोजित थी।

हमने सच सच बोल दिया कि हम थे जरूर, लेकिन लोंगो के जुटने के पहले वहां से निकल लिए थे। वजह तुम जानते हो साँझ कैसे काटता रहा हूँ और हम चले आये थे, लेकिन सम्भावना है सरकार पलट जाय। हम जिस समय बात कर रहे थे हमारे पीछे जया जेटली खड़ी थीं, उनके साथ मृणाल ताई भी थीं। जया ने जार्ज को फोन पर हुए बात का ब्‍यौरा देकर मृणालजी को सामने कर दिया।

थोड़ी देर में बीबीसी लंदन ने जो खबर दी, उसमे हमारे नाम के साथ जार्ज के विश्वसनीय का विशेषण जुड़ा हुआ प्रसारित हो गया। लोग बताते हैं जया और अशोक सुब्रमण्यम हमारे खिलाफ बोलते रहे, पर जार्ज मुस्कुराते रहे। इतने में जया ने अशोक को आर्डर दिया कि यह बात कैबिनेट में उठे उसके पहले ही चंचल को निकाल दीजिये। चिट्ठी अभी बना दो। और आधे घंटे बाद वहः चिट्ठी हमें मिली।

हमने गाड़ी वापस की। रेलवे का गोल्ड पास और कुछ कागजात और जार्ज के नाम एक खत लिख कर विदा हो गए। लेकिन, जार्ज से हमारे रिश्ते बने रहे। बाद में उन्‍होंने माना कि हमें गलत बताया गया।

वरिष्‍ठ समाजवादी चिंतक तथा बीएचयू के अध्‍यक्ष रहे चंचल सिंह के फेसबुक वाल से साभार. चंचलजी ना केवल समाजवादी विचारधारा के पोषक रहे बल्कि उन्‍होंने इसे अपने जीवन में भी उतारा.