उड़ने से पहले ही जोर पकड़ने लगा है रॉफेल का रंग!

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मनोज श्रीवास्तव

: भाजपा का बोफोर्स बन सकता है यह विवाद : लखनऊ। भारतीय सेना को शक्तिशाली बनाने के लिए भारत सरकार द्वारा फ्रांस की राफेल जहाजों की खरीद को लेकर जनता में भ्रम बढ़ता जा रहा है। यदि लोकसभा चुनाव 2019 के पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस मामले पर दूध-पानी अलग-अलग नहीं किये तो केंद्र सरकार में सत्तारुढ़ भारतीय जनता पार्टी का लौटना मुश्किल हो सकता है।

लखनऊ के ऐतिहासिक काफी हाउस में आज भी पुराने राजनैतिक, साहित्यिक और विभिन्न क्षेत्रों के दिग्गजों का जमावड़ा होता है। तीन दिन से लगातार यही सुनने को मिल रहा है कि रॉफेल नरेंद्र मोदी के लिए बोफोर्स तोप सौदा की तरह आत्मघाती हो गया है। जिसने दगने से पहले तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी को सत्ताच्यूत कर दिया था।

इस संदर्भ में विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रामगोविंद चौधरी ने बताया कि यह विषय देश की सुरक्षा से जुड़ा है इसलिए बहुत गंभीर है। प्रधानमंत्री और केंद्र सरकार के मंत्री इस तरह की भाव-भंगिमा का प्रदर्शन कर रहे हैं मानो इससे पहले कोई भी प्रधानमंत्री ईमानदार नहीं था। देश रॉफेल जहाजों की कीमत जानना चाहता है, जबकि प्रधानमंत्री छिपाना चाहते हैं। यदि सब कुछ ठीक है तो केंद्र सरकार रॉफेल जहाजों की वह कीमत सार्वजनिक करे कि कितने में फ्रांस से खरीददारी की गई।

कांग्रेस प्रवक्ता वीरेंद्र मदान ने बताया कि केंद्र सरकार के मन में खोट है। प्रधानमंत्री बतायें कि इस सौदे में अंबानी को लाने की क्या जरूरत पड़ी? पीएम बोलते हैं कि रॉफेल जहाज का सौदा दो सरकारों के बीच का सौदा है। दो सरकारों के बीच में अंबानी की कंपनी का क्या रोल है? राष्ट्रीय लोकदल के प्रवक्ता अनिल दूबे ने कहा कि जनता सब जान चुकी है। 2019 के चुनाव में भाजपा को सबक सिखाने के लिए जनता तैयार बैठी है। निर्वाचन आयोग चुनाव की औपचारिकता पूरी करे तो हकीकत सामने आ जायेगा।

वरिष्ठ पत्रकार दिवस दूबे ने कहा कि मोदी सरकार पर रॉफेल जहाजों की खरीद को लेकर इतने लंबे समय से आरोप लग रहे हैं और प्रधानमंत्री अभी भी चुप्पी साधे हैं। जैसे-जैसे रॉफेल को लेकर बहस आम होती जा रही है और पीएम कुछ बोल नहीं रहे हैं वैसे-वैसे रहस्य गहराता जा रहा है। यदि किसी भी कारण देर-सबेर मोदी के जवाब से देश संतुष्ट नहीं हो पाया तो राष्ट्रवादी विचारधारा को लेकर राजनीति करने वाले दलों को पुनः शाख स्थापित करने में लोहे के चने चबाने पड़ेंगे।manoj

वरिष्‍ठ पत्रकार मनोज श्रीवास्‍तव की रिपोर्ट.