सियासी फरेब की कलई खोलता महदी खेड़ा

सियासी

मनोज श्रीवास्‍तव

लखनऊ : सियासत और ब्‍यूरोक्रेसी जनता से कैसे फरेब करती है, इसका जीता जागता उदाहरण है सियासी राजधानी लखनऊ और औद्योगिक राजधानी कानपुर के बीच बसे उन्‍नाव का महदी खेड़ा गांव। जब केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार सारे गांवों में बिजली पहुंचाने का दावा हवाओं में उछाले पड़ी है, वहीं लखनऊ मंडल में आने वाले उन्‍नाव का यह गांव बिजली से अब तक महरूम है।

160 घर, 1300 की आबादी और लगभग 500 वोटरों वाले इस गांव में आजादी के बाद से अब तक बिजली नहीं पहुंच पाई है, लेकिन मोदी सरकार ने ऐसे-ऐसे दावे कर दिए हैं कि इन गांव वालों को भी लगने लगा है कि कहीं उनके यहां अदृश्‍य बिजली तो नहीं पहुंच चुकी है और इन लोगों को दिख नहीं रही है। भाजपा सांसद साक्षी महराज और विधानसभा अध्‍यक्ष हृदय नारायण दीक्षित के विधानसभा क्षेत्र में आने वाला यह गांव मूलभू‍त सुविधाओं के लिए भी तरस रहा है।

इस गांव में दो-तीन को छोड़कर किसी भी घर में शौचालय नहीं है। प्राइमरी स्‍कूल भी गांव से तीन किलोमीटर दूर नौबतपुर में है, जबकि डिग्री कालेज गांव से दस किलोमीटर दूर है। उल्‍लेखनीय है कि उन्‍नाव की पिछली कांग्रेसी सांसद अन्‍नू टंडन के बारे में कहा जाता था कि उनकी अंबानी से निकटता है, उनके समय में भी केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी, बावजूद इसके किसी गांव की तस्‍वीर नहीं बदल पाई।

योगी सरकार ने भी गांवों में बिजली पहुंचाने का दावा किया, लेकिन महदी खेड़ा सारे दावों की कलई खोलता है। दरअसल, सियासत ऐसा फरेब है जहां गंजों को कंघी और अंधों को चश्‍मा बेच दिया जाता है। वैसा ही केंद्र और राज्‍य की भाजपा सरकार कर रही है।

वरिष्‍ठ पत्रकार मनोज श्रीवास्‍तव की रिपोर्ट.