विश्‍वनाथ कारिडोर प्रकरण : ए भोला तूं लेSला लोला, सुखले शंख बजावS

हरेन्द्र शुक्ला 

: कारिडोर के नाम पर विस्थापितों का फ्लैट डीपीआर में ही हुआ धड़ाम : वाराणसी। भोजपुरी कहावत है “ए भोला तूं लेSला लोला, सुखले शंख बजावS.” यही कहावत प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की महत्वाकांक्षी योजनाओं में से एक श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर कारिडोर निर्माण के नाम पर विस्थापितों पर सटीक लागू हो रहा है। पहले विस्थापितों को काशी के बाहरी अलंग फ्लैट का सब्जबाग दिखाया गया, अब डीपीआर निरस्त होने के नाम पर उन्हें मायूस कर दिया गया।

बताते चलें कि शहर के गरीबों के आवास के लिए चिंतित सरकार द्वारा उन्हें छत मुहैया कराने के उद्देश्य से पीएम आवास योजना के तहत काशी में 9 हजार आवास बनाए जाने पर तेजी से कार्य हो रहा है। इस योजना के तहत पहले चरण में दादुंपुर में 350 फ्लैट बनाये जाने थे। इसी में श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर कारिडोर के विस्थापितों के लिए भी फ्लैट आवंटित किये जाने की योजना थी।

अब दादंपुर में बनने वाले 9 मंजिले फ्लैट की लागत ज्यादा होने और नव निर्मित काशी विश्वनाथ विशिष्ट क्षेत्र प्राधिकरण के भुगतान से हाथ खड़ा कर देने के बाद विकास प्राधिकरण वाराणसी अब उस डीपीआर को रद्द करके नया डीपीआर बनाने के लिए युद्ध स्तर पर लग गया है।

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार लाहौरी टोला, सरस्वती फाटक, नीलकंठ, ललिता घाट, नेपाली खपडा, ब्रह्मनाल और मणिकर्णिका घाट आदि मुहल्ले के मकानों को कारिडोर के नाम पर रजिस्ट्री कराये जाने से पूर्व काशी विश्वनाथ मंदिर प्रशासन ने कारिडोर योजना का विरोध कर रहे स्थानीय लोगों से कहा था कि विस्थापितों को बहरी अलंग फ्लैट आवंटित कर बसाया जायेगा।

श्रीकाशी विश्वनाथ विशिष्ट क्षेत्र प्राधिकरण बनते ही विस्थापितों को बसाने के लिए डीपीआर पर बने फ्लैट योजना के परवान चढ़ने से पहले ही धड़ाम से ढह गया, कयोंकि प्राधिकरण ने फ्लैट के लिए भुगतान से ही हाथ खड़ा कर दिया।

बनारस से वरिष्‍ठ पत्रकार हरेंद्र शुक्‍ला की रिपोर्ट. श्री शुक्‍ला अमर उजालादैनिक जागरणआज समेत कई अखबारों में कार्यरत रहे हैं.