चंदौली में खाद की किल्‍लत को लेकर हाहाकार, पूर्व सांसद ने साधा सरकार पर निशाना

Ex MP

: वर्तमान सांसद सात महीने से क्षेत्र से बाहर : दो साल में केवल दो बार उतरी खाद : चंदौली। सांसद जी पिछले सात महीने से अपने संसदीय क्षेत्र से गायब हैं। विधायक लोग विकास कार्यों को मैनेज करने में अपनी ऊर्जा खपा रहे हैं। इधर, जिले के किसान खाद के लिये मारे मारे फिर रहे हैं। खाद की किल्‍लत उनके माथे पर बल डाल रहा है, लेकिन अधिकारियों से लेकर जनप्रतिनिधियों तक किसी को इसकी परवाह नहीं है। मुख्‍यमंत्री ने किसानों की परेशानी को देखते हुए कृषि कार्य को लॉकडाउन से बाहर किया, लेकिन जिले के  अधिकारियों की लापरवाही उनकी मंशा पर पानी फेर रही है।

चंदौली में वर्षों से खाद का संकट झेल रहे किसानों को अप्रैल 2018 में अपनी परेशानी खत्‍म होने की उम्‍मीद उस समय जगी, जब स्‍थानीय सांसद एवं केंद्रीय मंत्री डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय ने सरेसर रैक प्वाइंट का उद्घाटन किया। मालगाड़ी से खाद आई और समितियों तक पहुंची, और किसानों को राहत भी मिली, लेकिन फिर अधिकारियों, ठेकेदारों के गठजोड़ ने इस योजना को फेल कर दिया और सवा दो साल में मात्र दो बार ही सरेसर रैक पर खाद उतरी। इस रैक पर कोल और सीमेंट अनलोडिंग वालों का दबदबा है।

सांसद एवं विधायक की उदासीनता एवं अधिकारियों की लापरवाही के चलते अब खाद की रैक बनारस के शिवपुर या फिर बिहार के सासाराम में उतर रही है। खेती के सीजन में जब किसानें के सामने धान रोपाई के बाद यूरिया का संकट खड़ा हो गया है तो जिम्मेदार जिले में पर्याप्त खाद उपलब्ध होने का हवा हवाई दावा कर रहे हैं, लेकिन किसान परेशान हैं।चंदौली में 11400 एमटी उर्वरक अनलोडिंग का लक्ष्य सहकारिता विभाग के पास है, लेकिन अप्रैल 2018 के बाद इस साल के शुरू में खाद रैक पर आई। इस बीच एक बार भी रैक पर खाद नहीं आई।

अब निबंधक सहकारिता का दावा है कि जिले में 4600 एमटी यूरिया, 4000 एमटी डीएपी, 261 एनपीके उतर चुकी है। सहायक निबंधक सहकारिता सोमी सिंह कहती हैं कि इस संदर्भ में जिलाधिकारी के माध्‍यम से पत्र भेजा गया है। शीघ्र ही सरेसर में यूरिया की रैक पहुंचने की संभावना है। इस संदर्भ में पूछे जाने पर जिला प्रबंधक पीसीएफ रमेश गुप्‍ता कहते हैं कि चंदौली में भंडारण क्षमता कम होने की वजह से रैक मंगाने में परेशानी होती है। अभी 3000 एमटी की भंडारण क्षमता है, जबकि बफर स्‍टॉक के साथ रेक आने पर यूरिया 5000 एएमटी तक पहुंच जाती है।

पूर्व सांसद चंदौली राम किशुन यादव आरोप लगाते हैं कि जिले के किसान यूरिया की कमी के चलते परेशान हैं। सरेसर में रैक बनने के बाद भी यूरिया की अनलोडिंग यहां होने की बजाय बनारस के शिवपुर या फिर सासाराम में होती है। इन दोनों जगहों से यूरिया मंगाने में खर्च बढ़ने के साथ परेशानी भी होती है। समय से यूरिया समितियों पर नहीं पहुंचती है। इसके चलते किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। सरकार किसानों की परेशानी को लेकर पूरी तरह उदा‍सीन है। विभागीय अधिकारी भी सरकार की नहीं सुन रहे हैं। किसानों को समय से यूरिया नहीं मिलने से उत्‍पादन भी प्रभावित होने की आंशका बनी हुई है।

कोल माफियाओं के आगे अफसर नतमस्तक

सरेसर में खाद उतारने के लिए बनाये गये रैक पॉइंट के ठीक उसके बगल में ही कोयला और सीमेंट बनाने वाले कागज की भी अनलोडिंग होती है। यह काम कुछ ऐसे लोगों के हाथ में है, जो ऊपर तक अपनी पहुंच रखते हैं। आरोप है कि कोल इन माफियाओं के दबाव के चलते सरेसर परिसर में खाद रैक पॉइंट को फिलहाल बंद किया गया है। इन लोगों के दबाव के चलते ही खाद की रैक यहां नहीं उतरती है। यहां खाद की अनलोडिंग केवल दो बार हुई है, जबकि कोयले और सीमेंट की अनलोडिंग अक्‍सर होती है। हमेशा यहां कोल माफियाओं का कब्‍जा रहता था और महीनों तक खाद रैक बंद रखा जाता है।