पहली ही बारिश ने खोल दी नमामि गंगे और कुंभ मेला आयोजन की पोल

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अरविंद कुमार चौधरी 

: विकास कार्यों से परेशान हुई संगमनगरी : इलाहाबाद : यूं तो इलाहाबाद में विकास कार्य बड़ी तेजी से चल रहा है क्योंकि यहाँ पर नमामि गंगे के साथ-साथ कुंभ मेला 2019 के आयोजन भी होना है। इसी को देखते हुए विकास कार्य तेजी से किया जा रहा है, जो अति आवश्यक भी है। मगर विकास कार्यों को गति देने के चक्‍कर में गुणवत्ता पर से शासन-प्रशासन दोनों का ही ध्यान भटक गया है। वैसे भी, विकास कार्यों के चलते होने वाली परेशानियों से पूरा इलाहाबाद जूझ रहा है, लेकिन इन विकास कार्यों का लाभ कितने दिन तक बना रहेगा बड़ा सवाल है?

इलाहाबाद में विकास कार्यों के चलते होने वाली परेशानियों का कोई समाधान तो  अभी नजर नहीं आ रहा, मगर इलाहाबाद के एक क्षेत्र में  परेशानियों कुछ ज्‍यादा ही बढ़ गई हैं। और यह घटने की बजाय दिन-प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही है। वह क्षेत्र है लूकर गंज से चकिया होते हुए राजरूपपुर से झलवा तक। यहाँ आए दिन कोई ना कोई वाहन सड़क में  धंस जाता है, जिसकी वजह से जाम लगना तो आम बात हो गई है। इससे लोगों की जान भी जोखिम में पड़ रही है।

सड़क टूटने के कारण लोगों को अन्य रास्तों के विकल्प का सहारा लेना पड़ता है, मगर उन रास्तों की हालात मुख्य रास्‍ते से भी दयनीय है। गत बुधवार को इलाहाबाद में भारी बरसात के कारण यहाँ के हालात बद से बदतर हो गये। पहली ही बरसात ने नमामि गंगे और कुंभ 2019 के आयोजन के अंतर्गत चल रहे विकास कार्यों के गुणवत्ता की पोल खोल कर रख दिया। इसके चलते लूकरगंज से झलवा तक सभी सभी मुख्य मार्गों की हालत धान के खेत जैसी नजर आने लगी थी।

इसके  चलते राजरूपपुर में  साईधाम अपार्टमेंट के निकट नागर प्लाजा  के सामने सीमेंट से भरा ट्रक बीच सड़क में धंस गया तथा पटलते-पलटते बचा। गनीमत यह रही की इस दुर्घटना में किसी की जान नही गयी। आनन-फानन मे ट्रक के सीमेंट को ट्रेकटर  ट्राली की मदद से खाली कर लिया गया, मगर सुरक्षा के मद्देनजर कोई इंतजाम यहाँ नजर नहीं आया। झुके हुए ट्रक के नीचे से राहगीरों का आवागमन चालू रहा, जो एक बड़े हादसे को दावत दे सकता था। मगर इस पर किसी की नजर नहीं थी। जमीन में धंस चुके झुके हुए ट्रक को पलटने से बचाने के लिए लकड़ी की बल्लियों पर रोका गया था, जो लापरवाही का जीता जागता सबूत था। मगर अपने फायदे के सामने किसी के नुकसान की परवाह करता भी कौन है?

ऐसा ही यहाँ देखने को मिला। सड़क में धंसे हुए ट्रक से सीमेंट उतारने वाले मजदूर से लेकर वहाँ से गुजरने वाले राहगीर तक सभी तो असुरक्षित थे। ऐसा भी नहीं था कि प्रशासन को इसकी जानकारी नहीं हो, क्योंकि इस ट्रक के आगे और पीछे कुंभ मेला कार्य में लगे डम्‍फरों की लंबी लाइन लगी थी। जब प्रशासन ही नियमों को ताक पर रखकर कार्य क्या रहा हो तो आम जनता भी भला क्‍यों पीछे रहती? अपनी जान की परवाह किए बगैर लोगों ने इस ट्रक के बराबर से आना-जाना चालू रखा अभी तो कोई बड़ा हादसा बच गया, लेकिन अगर ऐसी ही स्थिति बनी रही तो आने वाली अगली बरसात एक नहीं कई बड़े हादसों को अंजाम दे सकती है।arvind

अरविंद कुमार चौधरी की रिपोर्ट. अरविंद युवा एवं जुझारू पत्रकार हैं. कई संस्‍थानों में सक्रिय रहे हैं.