पेड़ कटवाकर क्या संदेश देना चाहता है उपश्रमायुक्त कार्यालय?

अरविंद कुमार चौधरी

इलाहाबाद : उपश्रमायुक्त कार्यालय इलाहाबाद में 15 मई दिन मंगलवार को उस वाटिका में वृक्षारोपण किया गया, जिस वाटिका से कुछ ही समय पहले हरे भरे छायादार एवं कीमती पेड़ काटे गये थे। अब उसी वाटिका को फिर से हरा भरा करने के लिए कुछ नन्हे पौधे लगाकर वृक्षारोपण का कार्यक्रम संपन्न कराया गया, जिसमें खुद उपश्रमायुक्त शामिल रहे। इसके लिए उनके नाम का एक शिलापट वाटिका के मेन गेट पर  लगाया गया हैं, जो बहुत ही अजीब सा प्रतीत होता है।

इसमें उपश्रमायुक्त के साथ-साथ उनकी धर्मपत्नी के नाम का उल्लेख किया गया जो शायद उचित नहीं हैं। इतना ही नहीं इस दफ्तर के आंगन से तीन अमरूद के पेड़ काटे गये जो फल एवं छायादार वृक्ष थे। ये पेड़ तब काटे जब इन पर फल लगे थे। अब उक्त स्थान पर चरी बोयी गयी है, अमरूद तो सभी कर्मचारी खाते थे।  मगर अब यहाँ उगायी गयी चरी किस के पशु खाते हैं ये बात समझ से परे है। क्या सिर्फ चरी उगाने के लिए अमरूद के फल व छाया दार वृक्ष काट दिया गए।

अमरूद के वह पेड़ जड़ से नहीं निकाले गये इसलिए यह पेड़ दोबारा अंकुरित होने लगे हैं। देखना यह है कि क्या  फिर से यह पेड़ चरी की भेंट चढ़ाए जायेंगे या इनको पनपने दिया जायेगा, मगर एक सवाल अभी भी सुलझ नहीं पाया कि आखिर फलदार वृक्ष काटे क्यो गये? और अब वृक्षारोपण कर क्या संदेश देना चाहता हैं उपश्रमायुक्त कार्यालय?

उप श्रमायुक्त कार्यालय के कर्मचारी दबी जुबान में स्वीकार करते हैं कि पुराने बड़े फलदार एवं छायादार वृक्षों को काटा गया था और उनको बेचा गया था, उनकी कीमत लाखों में थी। सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि एक बार बड़े-बड़े वृक्षों को कटवाकर के पौधों को लगवा करके वृक्षारोपण का कार्य श्रमआयुक्त कार्यालय किसे दिखाना चाहता है? जब छोटे-छोटे पौधे लगाने ही थे तो बड़े और फलदार पेड़ कटवाए क्‍यों गए?

अरविंद कुमार चौधरी की रिपोर्ट. श्री चौधरी स्‍वतंत्र पत्रकार हैं.