CMS प्रकरण में क्‍यों चुप्‍पी साध गया पूरा सिस्‍टम!

: सिटी मांटेसरी स्‍कूल प्रबंधन के रसूख के सामने बौना सत्‍ता-प्रशासन एवं पुलिस : लखनऊ। क्‍या एक स्‍कूल प्रबंधन इतना ताकतवर है कि कक्षा चार की मासूम छात्रा के साथ छेड़छाड़ और दुष्‍कर्म जैसे आरोपों के सामने आने के बाद भी सत्‍ता, प्रशासन और पुलिस चुप्‍पी साधने को मजबूर हो सकती है? सीएमएस यानी सिटी मांटेसरी स्‍कूल के अलीगंज शाखा में मामले की जांच किए बगैर पुलिस ने जिस तरीके से प्रबंधन के पक्ष में घोड़े दौड़ाने शुरू किए, उससे तो साफ जाहिर है कि पैसे और ताकत की बदौलत कुछ भी किया जा सकता है?

उल्‍लेखनीय है कि राजधानी के नामचीन सिटी मांटेसरी स्कूल यानी सीएमएस की अलीगंज शाखा में कक्षा चार की छात्रा से स्कूल के बाथरूम में कथित तौर कक्षा आठ के एक छात्र द्वारा दुष्कर्म किये जाने का आरोप सामने आया था। इसकी जानकारी होने के बाद अभिभावक और छात्रों ने पुलिस की लापरवाही और सीएमएस स्कूल प्रबंधन के खिलाफ प्रदर्शन भी किया। अभिभावक प्रबंधन के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मांग करते रहे, लेकिन पुलिस की तरफ से कोई एक्‍शन नहीं लिया गया।

आरोप लगा कि स्कूल प्रबंधन अपने पैसे, रसूख और संबंधों के बल पर इस पूरे मामले को मैनेज करने में जुटा हुआ है। इसी का परिणाम रहा है कि बड़े-बड़े अखबार तक इस पूरे मामले को घोंट गए। आरोप के मुताबिक कक्षा आठ के किशोर ने छात्रा के साथ दुष्कर्म किया। छात्रा रोते हुए बाथरूम से बाहर आई। बच्‍ची के साथ हुई घटना की सूचना पर पीडि़त छात्रा के परिजन स्कूल पहुंचे और आरोपी छात्र की वहीं पर पिटाई कर दी। स्‍कूल में मारपीट की सूचना डॉयल 100 पुलिस को दी गई, जिसके बाद पुलिस दोनों पक्षों को पकड़कर थाने ले गई।

स्‍कूल प्रशासन इस पूरे मामले को अपनी तरफ से प्रयास कर भरसक दबाने की कोशिश की, लेकिन किसी तरह रविवार को घटना का खुलासा हो गया। सीएमएस से जुड़ा मामला होने के कारण लखनऊ पुलिस बैकफुट पर आ गई। प्रशासन भी एक्‍शन लेने से बचने लगा। एसपी ट्रांसगोमती हरेंद्र कुमार, सीओ अलीगंज दीपक कुमार पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और आरोप दर्ज करने की बजाय समाज, इज्‍जत की दुहाई देकर दोनों पक्षों में समझौता करवा दिया गया। आरोप है कि पुलिस ने दबाव देकर दोनों पक्षों को सामने नहीं आने दिया।

पुलिस की तरफ से बयान सामने आया कि एसपी टांसगोमती ने जांच की, इस मामले में अभिभावक कोई कार्रवाई नहीं चाहते हैं। आरोप है कि पुलिस और स्‍कूल प्रशासन के दबाव में किसी भी पक्ष ने रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई। सवाल यह है कि क्‍या अभिभावक कार्रवाई नहीं चाहते हैं तो क्‍या पुलिस की कोई जिम्‍मेदारी नहीं बनती कि वह कानून का पालन कराए? क्‍या किसी की हत्‍या हो जाने के बाद अगर दोनों पक्ष कार्रवाई नहीं चाहेंगे तो पुलिस चुपचाप बैठ जाएगी?

इस पूरे मामले में अलीगंज पुलिस की भूमिका निष्‍पक्ष नहीं है। अलीगंज पुलिस और अधिकारी दोनों पक्षों से घंटों बातचीत कर और दबाव बनाकर, तरह-तरह से दुहाई देकर समझौता करा दिया। बताया जा रहा है कि लखनऊ के तमाम पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों के रिश्‍तेदार-नातेदार-परिचित सीएमएस स्‍कूल में कार्यरत हैं। सीएमएस प्रबंधन जानबूझकर उच्‍च पदस्‍थ लोगों को ओबलाइज करने के लिए उनके परिजनों, नातेदार, रिश्‍तेदार या चहेतों को अपने स्‍कूल से जोड़ता है ताकि इस तरह के वक्‍त जरूरत पर ये रिश्‍ते काम आ सकें। इस मामले में भी ऐसा ही होता दिख रहा है।

सीएमएस के संस्थापक जगदीश गांधी पर पैसे और रसूख की बदौलत नियम-कानूनों की अनदेखी करने के आरोप लगते रहते हैं। अपने मेगा कार्यक्रमों के जरिए वह तमाम लोगों को ओबलाइज करके सत्‍ता-सिस्‍टम पर भी दबाव बनाए रखते हैं। अभी हाल ही में मीडिया से जुड़े एक कार्यक्रम में मुख्‍यमंत्री को भी बुलाने में सफल रहे थे। फीस से जुड़ा अध्‍यादेश आने के बाद भी सीएमएस की सेहत पर कोई फर्क नहीं पड़ा तो इसीलिए कि जगदीश गांधी का रसूख सब पर भारी है। नामचीन लोगों को बुलाकर वह अपनी पहुंच का मुजाहिरा भी कराते रहते हैं।

मोटी फीस वसूलने के बावजूद सरकार सीएमएस के खिलाफ कोई एक्‍शन नहीं ले पाई तो इसके पीछे यही मैनेजमेंट काम करता है। प्रतिष्ठित स्कूलों में शुमार सीएमएस पर अवैध निर्माण के आरोप भी लगे हैं, लेकिन कहीं कुछ नहीं बिगड़ा।  सीएमएस स्कूल की इन्दिरा नगर शाखा पर अवैध निर्माण करने का आरोप एक आरटीआई के जरिए सामने आया है। यहां अर्बन प्लानिंग एक्ट को दरकिनार करते हुए चार मंजिला इमारत बना कर स्कूल खोल दिया गया है। इसे फायर विभाग की एनओसी भी नहीं मिली है।

इन्दिरा नगर में भवन संख्या- 823 और 903 को जोड़ कर चार मंजिला अवैध निर्माण कर लिया गया। फिर उस बिल्डिंग में स्कूल खोल दिया गया। अपनी सियासी पहुंच और रसूख के दम पर स्‍कूल प्रबंधन द्वारा आवास विकास परिषद के अफसरों और अभियंताओं को खरीदकर बिल्डिंग का अवैध निर्माण पूरा किया जा सका। वैसे, आवास विकास परिषद की ओर से सीएमएस स्कूल को ध्वस्त करने का आदेश 2017 से पूर्व ही दिया जा चुका है,  लेकिन श्री गांधी के रसूख के चलते आज भी सीएमएस की यह बिल्डिंग खड़ी है। और इसमें स्‍कूल का संचालन हो रहा है।