दादा फिरोज की कब्र पर क्यों नहीं जाते राहुल गांधी?

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सौरभ सिंह सोमवंशी व अरविंद कुमार चौधरी

: क्‍यों गांधी परिवार दूरी बनाए हुए है : सोनिया गांधी मात्र दो बार कई हैं कब्र पर : इलाहाबाद : पिछले दिनों जब भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की तबीयत अचानक खराब हुई तो उनको एम्स में भर्ती कराया गया। तब कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी उनको देखने एम्‍स गए और उन्होंने ट्वीट किया कि वे अटलजी को देखने गए थे। इसके बाद सोशल मीडिया में तरह-तरह की बातें राहुल गांधी के बारे में कही जाने लगी। उनसे लोग पूछने लगे कि वह अपने दादा फिरोज गांधी की कब्र पर कितनी बार गए हैं?

इस सवाल के बाद हम लोगों के मन में भी यह आशंका उभरी कि हमें पता करना चाहिए की राजीव गांधी और इंदिरा गांधी की समाधि स्थल पर साल भर में कई बार जाने वाले कांग्रेसी फिरोज गांधी की कब्र पर कितनी बार गए हैं? इसी की पड़ताल करने हम पहुंच गए इलाहाबाद के आबकारी चौराहे ममफोर्डगंज में स्थित पारसी समुदाय के कब्रिस्तान में, जहां पर फिरोज गांधी की कब्र स्थित है। यहां पर हमारी मुलाकात सबसे पहले कब्रिस्तान के  केयरटेकर बृजलाल से हुई, जिन्होंने हमें बताया कि यहां पर इंदिरा गांधी केवल एक बार, सोनिया गांधी दो बार और राहुल गांधी केवल एक बार रात के वक्त आए हैं।

kabrबृजलाल ने बताया कि उनकी तीसरी पीढ़ी इस कब्रिस्तान की रखवाली कर रही है, लेकिन जहां तक उन्हें याद है यहां पर कोई कांग्रेसी आना पसंद नहीं करता। उन्होंने कारण तो नहीं बताया, लेकिन कहा कि उनको उनका खर्च फिरोज गांधी के बड़े भाई फिरदौस के बेटे 75 वर्षीय रुस्तम से मिलता है। जाहिर है कि कांग्रेस या गांधी परिवार की तरफ से उन्हें कुछ नहीं दिया जाता। बृजलाल ने बताया कि उनको मात्र 15 सौ रुपए महीने के दिए जाते हैं, जिसमें उनका खर्च पूरा नहीं हो पाता है।

बड़ा प्रश्न यह है कि राजीव गांधी और इंदिरा गांधी की पुण्य तिथि पर 12-12 करोड़ का विज्ञापन देने वाली कांग्रेस पार्टी फिरोज गांधी के लिए 1 रुपए नहीं खर्च करना चाहती, इसका कारण क्या है? जहां पर इंदिरा गांधी की समाधि 45 एकड़ में बनी है, वहीं पर फिरोज गांधी की कब्र पर कोई भी आदमी, बकरी या जानवर बेझिझक जा सकता है। ना तो वहां पर कोई विजिटर रजिस्टर है और ना ही अन्य कोई सुविधा। बृजलाल ने बताया कि वहां पर पीने के लिए स्वच्छ पानी का भी इंतजाम नहीं है।

बृजलाल ने बताया कि यदि वह सब्जी का कारोबार ना करें तो उनके घर में 2 जून की रोटी ना नसीब हो। भले ही वह देश की पुरानी पार्टी और प्रधानमंत्रियों के परिवार से संबंधित व्‍यक्ति के एक कब्र की रखवाली करते हों। फिरोज जहांगीर खान उर्फ फिरोज गांधी एक ऐसा नाम, जो एक प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू का दामाद, एक प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का शौहर और एक प्रधानमंत्री राजीव गांधी का पिता था। वर्तमान में तीन सांसदों का रिश्‍तेदार।

आजाद भारत में घोटाले पर सबसे पहले आवाज उठाने वाले फिरोज के कारण ही तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के कैबिनेट  के वित्त मँत्री टीटी कृष्णामाचारी को मूँधरा घोटाला और जीप घोटाला में  इस्तीफा देना पड़ा था। फिरोज गांधी के पिता का नाम जहांगीर और माता का नाम रति माइ था। फिरोज का विवाह 1942 में इंदिरा गांधी के साथ मुस्लिम रीति रिवाज से हुआ था। रायबरेली से सांसद रहे फिरोज गांधी का नाम कांग्रेस के ईमानदार कद्दावर जुझारू संघर्षशील नेताओं में है, लेकिन इसे फिरोज गांधी का दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि ना तो उनकी कब्र पर कभी राजीव गांधी गये और ना ही कभी संजय गांधी गए थे।

एक बार जब जनता पार्टी सरकार के दौरान संजय गांधी को गिरफ्तार किया गया तो सरकारी वकील ने 3 बार उनके पिता का नाम पूछा। तीनों ही बार संजय गांधी ने इंदिरा गांधी का नाम बताया। उसी समय मजिस्ट्रेट ने सरकारी वकील को चौथी बार यह प्रश्न पूछने से मना कर दिया। यह घटना फिरोज गांधी की अपने परिवार में हैसियत के बारे में काफी कुछ बयान करती है। फिलहाल पारिवारिक कारण चाहे जो भी हो, लेकिन गांधी परिवार को फिरोज गांधी की उसी तरह से इज्जत करनी चाहिए थी, जिस तरह से वह इंदिरा, राजीव और जवाहरलाल नेहरू को देता आया है।

सौरभ सिंह सोमवंशी एवं अरविंद कुमार चौधरी की रिपोर्ट.