मंच पर एकता दिखाने के बाद क्‍यों बीच में ही निकल गए शिवपाल!

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: रामगोपाल यादव के जन्‍मदिन के बहाने एकता दिखाने की कोशिश : लखनऊ। अखिलेश यादव के नेतृत्‍व में हाशिए की तरफ जा रही समाजवादी पार्टी को बचाने के लिए अब परिवार एक होने की तरफ बढ़ रहा है। माना जा रहा है कि भाजपा से लोहा लेने से ज्‍यादा अपने-अपने साम्राज्‍य को बचाने के लिए परिवार एक होने की तरफ बढ़ रहा है। इसके प्रदर्शन का मौका मिला प्रोफेसर राम गोपाल यादव के जन्‍मदिन पर। इस मौके पर अहम की लड़ाई लड़ रहे रामगोपाल यादव और शिवपाल सिंह यादव लंबे समय बाद एक साथ एक मंच पर दिखे।

यूपी लोक सेवा आयोग मामले में घिरते दिख रहे रामगोपाल यादव भी इस मौके पर एकता का संदेश देने का प्रयास किया। दोनों नेताओं ने एक-दूसरे को केक खिलाया। शिवपाल ने रामगोपाल का पैर छूकर आशीर्वाद लिया। मंच पर एकजुटता की सारी औपचारिकताएं दिखाने की कोशिश की गई। हालांकि शिवपाल कार्यक्रम के तुरंत बाद लखनऊ के लिए निकल लिए तो रामगोपाल भी मीडिया से परहेज करते दिखे।

सपा में राम गोपाल एवं शिवपाल खेमे बीच लंबे समय से एक दूसरे को निपटाने का खेल चल रहा था। अहम से शुरू हुआ यह खेल व्‍यक्तिगत स्‍तर तक पहुंच गया था। अखिलेश के राम गोपाल के पक्ष में खड़ा हो जाने तथा मुलायम सिंह यादव के पुत्र के खिलाफ ना जाने की वजह से शिवपाल पार्टी में एकदम अलग-थलग पड़ गए थे। इनकी आपसी की रार के चलते ही सपा की लोकसभा तथा विधानसभा चुनाव में करारी हार हुई थी।

मुलायम सिंह यादव लंबे समय से परिवार को एक करने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन दोनों इसके लिए तैयार नहीं हो रहे थे। अब सूत्र बता रहे हैं कि रिवर फ्रंट की जांच और यूपीपीएससी की जांच की आंच इन दोनों की तरफ बढ़ रही है। दोनों नेताओं को समझ में आ गया था कि अगर यह एक नहीं हुए या एकता दिखाने की कोशिश नहीं की तो आने वाले समय में मुश्किल का सामना करना पड़ सकता है। इन्‍हें महसूस हुआ कि मजबूत दिखने पर ही बचाव संभव है।

इसी क्रम में इटावा के थ्री स्‍टार होटल में राम गोपाल यादव का 72वां जन्मदिन समारोह आयोजित किया गया, जिसमें शिवपाल भी नजर आए। कार्यक्रम में यह दिखाने की पूरी कोशिश की गई सैफई परिवार एक है, आपस में अब कोई भी दुराव शेष नहीं है। इस दौरान शिवपाल यादव ने प्रदेश की भाजपा सरकार पर तीखा हमला भी बोला और एकजुट होकर इस सरकार को उखाड़ फेंकने का आह्रवान भी किया। खास बात यह रही कि आयोजन के बीच से शिवपाल यादव उठकर चल दिए।

माना जा रहा है कि तात्‍कालिक समस्‍याओं और परेशानियों के चलते दोनों ने भले ही अपने दर्द छुपा रखे हों, लेकिन शिवपाल सिंह यादव के लिए यह भूलना बहुत मुश्किल है। अपने ही परिवार में वह सबसे अलग-थलग कर दिए गए थे। उन्‍होंने अपने राजनीतिक भविष्‍य को लेकर कुछ योजनाएं भी बनाई, लेकिन वह कारगर नहीं हो पाईं। इससे कोई इनकार नहीं कर सकता कि शिवपाल की मेहनत भी मुलायम और अखिलेश सीएम बनने की एक वजह रही है।